चिली की राजधानी सैंटियागो में अभी पतझड़ का मौसम चल रहा था. अचानक सर्दी बढ़ने लगी. कुछ ही घंटों में सर्दी इतनी बढ़ गई कि इसने 74 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. चिली के लोग जो सर्दियों के कपड़े रख चुके थे. उन्हें वापस निकालना पड़ा. रजाई-कंबल बाहर निकालना पड़ा.
सैंटियागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेटोलॉजिस्ट रॉल कॉरडेरो ने कहा कि 1950 के बाद करीब 74 वर्षों में ऐसा मौसम नहीं देखा. पतझड़ के मौसम के बीच अचानक से तापमान का इतना गिर जाना. सर्दी का लौट आना, ये भयावह बदलाव है. ये अब तक का सबसे लंबा सर्दियों का सीजन है. इस मौसम में ऐसी सर्दी तो कभी नहीं पड़ी.
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सैंटियागो में गुरुवार की सुबह तापमान 1 डिग्री सेल्सियस था. सैंटियागो के आसपास के पहाड़ों पर बर्फ गिरी हुई थी. यह मौसमी बदलाव देखकर दुनियाभर के वैज्ञानिक हैरान हैं. ये जलवायु परिवर्तन का सबसे खतरनाक उदाहरण है. यह एक तरह का एक्सट्रीम वेदर इवेंट है. यानी चरम मौसमी आपदा है.
गर्मी के मौसम में सर्दी, लगाया गया कोड ब्लू
रॉल कॉरडेरो कहते हैं कि मई का महीना गर्म होता रहा है. बहुत ज्यादा नहीं लेकिन शुरुआत सामान्य गर्मी से होती आई है. लेकिन अब हम एक्सट्रीम हीट से एक्सट्रीम कोल्ड की तरफ जा रहे हैं. यानी चरम गर्मी से चरम सर्दी की तरफ. चिली की सरकार ने मध्य चिली के छह इलाकों में कोड ब्लू (Code Blue) लगा दिया है.
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ध्रुवीय और ट्रॉपिकल हवाओं की टक्कर है वजह
कोड ब्लू का मतलब है कि लोगों को सर्दी से बचकर रहना है. ताकि कोल्ड वेव के चक्कर में किसी की तबियत न बिगड़े. मौसम खराब होने पर बच्चों और बुजुर्गों को बचाया जा सके. रॉल ने बताया कि ध्रुवीय ठंडी हवाओं और गर्मी ट्रॉपिकल हवाओं का यहां पर मिलन हो रहा है. इसकी वजह से तूफान आने की आशंका भी है.
ब्राजील में तूफान इसी वजह से आया था
रॉल ने बताया कि ब्राजील में इसी मौसमी बदलाव की वजह से तूफान आया. भयानक बारिश हुई. बाढ़ आई. जिसकी वजह से करीब 150 लोग मारे गए. जलवायु परिवर्तन के अलावा अल-नीनो और ला-नीना का भी प्रभाव पड़ रहा है. सैंटियागो से कुछ सौ किलोमीटर दूर ये मौसमी बदलाव हो रहे हैं. इसका असर भी हो सकता है.