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अब 'प्लास्टिकोसिस' का खतरा! शरीर में प्लास्टिक से हो रही बीमारी का पता चला

शरीर में जाने वाले प्लास्टिक से होने वाली बीमारी का पहली बार पता चला है. इसका नाम प्लास्टिकोसिस रखा गया है. इससे ज्यादातर समुद्री पक्षी परेशान हो रहे हैं. समुद्र में शिकार करने के दौरान शरीर में प्लास्टिक चला जाता है, जिसके बाद धीरे-धीरे उनकी मौत हो जाती है. जानिए इस बीमारी के बारे में वैज्ञानिकों ने क्या पता लगाया है.

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ये है पक्षियों के शरीर से निकले प्लास्टिक के टुकड़ों की तस्वीर. (सभी फोटोः डॉ. एलेक्स बॉन्ड)
ये है पक्षियों के शरीर से निकले प्लास्टिक के टुकड़ों की तस्वीर. (सभी फोटोः डॉ. एलेक्स बॉन्ड)

पहली बार प्लास्टिक से होने वाली बीमारी का पता चला है. वैज्ञानिकों ने इसका नाम प्लास्टिकोसिस (Plasticosis) रखा है. फिलहाल तो ये समुद्री पक्षियों को हो रहा है. लेकिन भविष्य में यह कई प्रजातियों के जीवों में फैल सकता है. इस बात की आशंका साइंटिस्ट्स ने जताई है. 

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प्लास्टिकोसिस उन पक्षियों को हो रहा है जो समुद्र में शिकार करते हैं. शिकार के साथ उनके शरीर में छोटे और बड़े आकार के प्लास्टिक चले जाते हैं. जिनसे उनके शरीर को नुकसान होने लगता है. धीरे-धीरे वो बीमार होकर मर जाते हैं. वैज्ञानिकों ने प्लास्टिकोसिस की वजह से शरीर पर पड़ने वाले असर को भी रिकॉर्ड किया है. 

Plasticosis
इस पक्षी के शरीर से निकला है इतना प्लास्टिक. तस्वीर वीभत्स थी इसलिए उसे धुंधला किया गया है. 

तेज और नुकीले प्लास्टिक के टुकड़े कई बार पक्षियों के शरीर को अंदर से छील देते हैं. या फिर काट देते हैं. इससे उनकी तत्काल मौत हो जाती है. शोधकर्ताओं ने अपने रिसर्च में लिखा है कि उन्होंने कई समुद्री पक्षियों के शरीर में प्लास्टिकोसिस के दुष्प्रभावों को देखा है. इससे समुद्री पक्षियों की कई प्रजातियों को नुकसान हो रहा है. 

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समुद्रों में प्लास्टिक प्रदूषण बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. प्लास्टिक की वजह से करीब 1200 समुद्री प्रजातियों को नुकसान हो रहा है. इससे समुद्र का फूड वेब खराब हो जाएगा. यानी फूड चेन. वैज्ञानिक अब भी नहीं जान पाए हैं कि खाने के साथ शरीर के अंदर गए प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर्स और टुकड़ों से कितना नुकसान होने वाला है. 

Plasticosis

वैज्ञानिकों ने जिस पक्षी का अध्ययन किया है, वो है गहरे भूरे रंग के शरीर वाला फ्लेश-फुटेड शीयरवाटर्स. ये पक्षी ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट से 600 किलोमीटर दूर मौजूद द्वीप लॉर्ड होवे आइलैंड पर ज्यादा मिलते हैं. इंसानी बस्ती से इतनी दूर मौजूद इन पक्षियों के प्लास्टिकोसिस बीमारी की वजह हम इंसान ही हैं. हर साल यहां पतझड़ के मौके पर हजारों समुद्री पक्षी बीमार होते थे. मरते थे. वैज्ञानिक परेशान थे कि ऐसा हो क्यों रहा है. 

जांच करने पता चला कि पक्षियों के शरीर के अंदर प्लास्टिक घुसे हुए हैं. नुकीले प्लास्टिक से उनके अंग कट जा रहे हैं. जिससे उनकी मौत हो रही है. बीमार हो रहे हैं. पेट में चीर-फाड़ करने वाले इन प्लास्टिक से पक्षियों को बचाया भी नहीं जा सकता. पक्षियों के पेट के पहले हिस्से यानी प्रोवेनट्रिकुलस में सबसे ज्यादा क्षति पहुंच रही है. 

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