इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के एक क्रू मेंबर यानी एस्ट्रोनॉट ने भारत-चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मौजूद पैंगॉन्ग लेक (Pangong Tso) की तस्वीर ली. ये झील दुनिया की सबसे ऊंची झीलों में से एक है. तिब्बत के पठार के पश्चिमी हिस्से में मौजूद इस झील का पूरा क्षेत्रफल 134 किलोमीटर का है. यह 13,862 फीट की ऊंचाई पर है.
ऊपर दिख रही तस्वीर इस साल जनवरी की है, जिसे नासा ने फिर से ट्वीट किया है. तस्वीर के दाहिनी तरफ बर्फ और उसमें पड़ी दरारें दिख रही है. जबकि, बाईं तरफ नीला साफ पानी. जहां पर नदी का जुड़ाव है, वहां पर पानी का रंग हरा है. डेल्टा दिख रहा है. झील के किनारे ऊंचे तट हैं, यानी रेज्ड बीच. झील के किनारे सड़कें भी दिख रही हैं.
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कई नाम से फेमस, 10% हिस्से को लेकर अक्सर होता है विवाद
पैंगॉन्ग लेक को और भी कई नामों से जाना जाता है. जैसे- त्सो न्याक, रम त्सो और न्याक त्सो. इस झील का करीब 50 फीसदी हिस्सा चीन के तिब्बत वाले हिस्से में है. 40 फीसदी लद्दाख में हैं. 10 फीसदी हिस्से को लेकर अक्सर भारतीय और चीनी सेना के बीच विवाद होता रहता है. इस झील का सबसे चौड़ा इलाका 5 किलोमीटर का है.
तीन पहाड़ी रेंज से घिरा हुआ, हर रेंज की अपनी खासियत
नमकीन पानी होने के बावजूद इस झील में सर्दियों में बर्फ जम जाती है. यह झील अपने भौगोलिक स्थिति की वजह से भी काफी ज्यादा अद्भुत है. इसके तीन तरफ अलग-अलग माउंटेन रेंज हैं. पहला चांगचेनमो रेंज, दूसरा पैंगॉन्ग रेंज. ये दोनों ही काराकोरम रेंज के सब-रेंज हैं. इसके अलावा कैलाश रेंज.
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विवाद वाली जगहें और फिंगर इसी लेक के एक हिस्से में
चांगचेनमो रेंज झील के पूर्व से उत्तर की तरफ है. इसमें फिंगर-1 से फिंगर-8 तक हैं. पैंगॉन्ग रेंज दक्षिणी हिस्से की तरफ है. यह पश्चिम दिशा में तांग्त्से से दक्षिणी किनारे के चुशुल तक है. वहीं कैलाश रेंज झील के दक्षिणी हिस्से में मौजूद है. चीन झील के अपनी साइड में लगातार सड़कें बना रहा है. गांव बसा रहा है. सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है. इसके जवाब में भारत को भी झीले के आसपास की सिक्योरिटी और सैन्य ताकत बढ़ाना पड़ रहा है. भारत ने आधुनिक हथियार और राडार सिस्टम इस झील के आसपास लगा रखे हैं.