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Garden of Eden: आज की दुनिया में कहां है एडम और ईव का जन्मस्थान गार्डेन ऑफ इडेन?

बाइबिल में जिक्र है गार्डेन ऑफ इडेन का. वैसे तो ये एक माइथोलॉजिकल कहानी मानी जाती है. लेकिन असल में यह जगह आज होती तो कहां होती. क्या इसका लेना-देना इराक-ईरान से होता. या फिर अफ्रीका की जमीन से. या फिर फारस की खाड़ी में. आइए जानते हैं कि क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

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आज की दुनिया में कहां है एडम और ईव की उत्पत्ति वाला गार्डेन ऑफ इडेन. (फोटोः गेटी)
आज की दुनिया में कहां है एडम और ईव की उत्पत्ति वाला गार्डेन ऑफ इडेन. (फोटोः गेटी)

क्रिश्चैनिटी में गार्डेन ऑफ इडेन (Garden of Eden) का जिक्र बेहद अच्छी पौराणिक कहानियों में आता है. पर क्या ये सच में आज मौजूद है. अगर है तो दुनिया के नक्शे पर किस जगह? अगर बिना किसी पूर्वाग्रह और धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाए इस जगह को खोजा जाए तो शायद गार्डेन ऑफ इडेन के सांकेतिक भाषाओं के आधार पर उसके वर्तमान लोकेशन का आइडिया लगाया जा सकता है. हालांकि जरूरी नहीं कि वो सही हो. 

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गार्डेन ऑफ इडेन का जिक्र उस बगीचे के रूप में आता है, जहां पर लोग पहली बार बनाए गए. लोग यानी हम इंसान. पहले दो जोड़ी इंसान. एक नर और एक मादा. नाम था एडम (Adam) और ईव (Eve). ये आराम से इस बगीचे में घूमते रहे. बढ़िया जीवन जीते रहे, जबतक वहां पर एक सांप और एक फल नहीं आया. यह एक सांकेतिक कहानी है, जिसमें बताया गया है कि कैसे इंसान पहले बच्चों की तरह साफ दिमाग के थे. बाद में वो विकसित हुए. आजादी और नॉलेज की ओर बढ़े. शैतानियत उनके अंदर आई. कैसे वो मौत की तरफ आगे बढ़े. 

Where is Garden of Eden?

जेनेसिस 2:10-14 में लिखा है कि गार्डेन उस लोकेशन पर था, जहां इडेन से एक नदी निकलती है. वह बगीचे को सींचती है लेकिन बाद में चार हिस्सों में बांट देती है. उसके चार सिर बन जाते हैं. पहला नाम उसमें आता है Pishon. इसमें हविलाह (Havilah) का पूरा इलाका आता है. यानी सोने की जगह. सोने की जगह यानी अच्छे कामों की जगह. वहीं पर थे Bdellium और ओनिक्स स्टोन. दूसरी नदी का नाम है Gihon. 

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गिहोन यानी Cush की पूरी जमीन. तीसरी नदी का नाम है टिगरिस (Tigris). यह नदी अशर (Asshur) के पूर्व की ओर बढ़ती है. चौथी नदी है यूफ्रेट्स (Euphrates). अब यहां पर कॉमन ये है कि चारों नदियां कहां मिलती है. इनमें से दो नदियां आज भी मौजूद हैं. टिगरिस और यूफ्रेट्स. इनकी शुरुआत तुर्की से होकर सीरिया, इराक होते हुए फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में खत्म हो जाती हैं. हालांकि पिशोन और गिहोन नदियां कहां हैं इसका वर्तमान समय में कोई रेफरेंस नहीं मिलता. कुछ पुरातत्वविदों का मानना था कि इनमें से एक नदी भारत की गंगा और दूसरी मिस्र की नील नदी है. इतनी ज्यादा दूरी के बीच गार्डेन ऑफ इडेन का होना थोड़ा मुश्किल लगता है. 

ये है अफ्रीका का वो हिस्सा जहां पर इंसानों का विकास हुआ. (फोटोः गेटी)
ये है अफ्रीका का वो हिस्सा जहां पर इंसानों का विकास हुआ. (फोटोः गेटी)

खैर बात करते हैं टिगरिस और यूफ्रेट्स की. ये दोनों नदियां इराक और ईरान की सीमा पर फारस की खाड़ी से थोड़ा पहले मिलती है. जहां ये मिलती हैं, उस जगह का नाम है शत अल-अरब (Shatt Al-Arab). लेकिन कुछ लोगों का मानना ये भी है कि ये जगह अफ्रीका में भी हो सकती है. क्योंकि पृथ्वी पर इंसानों की शुरुआत तो यहीं से हुई थी. गार्डेन ऑफ इडेन के पीछे भी यही मान्यता है. क्रैडल ऑफ ह्यूमनकाइंड (Cradle of Humankind) जोहांसबर्ग से 50 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित है. 

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क्रैडल ऑफ ह्यूमनकाइंड में ही सबसे ज्यादा प्राचीन इंसानों के अवशेष मिले हैं. यहां से इंसानों के उन पूर्वजों के भी अवशेष मिले हैं, जो करीब 37 लाख साल पहले यहां रहते थे. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि ये भी संभव नहीं है कि गार्डेन ऑफ इडेन वहां हो. क्योंकि आधुनिक इंसानों का विकास तो इथियोपिया के आसपास हुआ है. हालांकि वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो सबसे बेहतरीन लोकेशन आज के दौर में दक्षिण अफ्रीका और इथियोपिया ही हैं, जहां पर गार्डेन ऑफ इडेन हो सकता था. क्योंकि इन जगहों पर पहले किसी जमाने में चार नदियां बहती थी. एकदूसरे से मिलती थीं. 

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