scorecardresearch
 

गर्मी ने तीन दिन तोड़ा रिकॉर्ड, पूरी दुनिया को हुआ 'बुखार'... वजह क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो

तीन दिनों से पूरी दुनिया रिकॉर्डतोड़ गर्मी का सामना कर रही है. वैज्ञानिकों ने इसके पीछे जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो को जिम्मेदार बताया है. जिम्मेदार कोई भी हो लेकिन अमेरिका से लेकर चीन तक हर तरफ गर्मी से हालत खराब है. 3 जुलाई को ही गर्मी ने रिकॉर्ड बनाया था. जिसे खुद उसने 4 और 5 जुलाई को तोड़ दिया.

Advertisement
X
गर्मी का असर पूरी दुनिया में है. अमेरिका से लेकर चीन तक सबकी हालत पस्त है. (सभी फोटोः एपी)
गर्मी का असर पूरी दुनिया में है. अमेरिका से लेकर चीन तक सबकी हालत पस्त है. (सभी फोटोः एपी)

3 जुलाई से 5 जुलाई 2023 तक दुनिया ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी महसूस की. 1979 के बाद पहली बार इस स्तर की गर्मी हुई है. या तो 44 साल पहले उस समय के तापमान की बराबरी हुई है. या फिर चढ़ते पारे ने उसे पीछे छोड़ दिया. 3 जुलाई को दुनिया का औसत तापमान 17 डिग्री सेल्सियस था. लेकिन 4 और 5 जुलाई को इसके भी आगे बढ़ गया. 

Advertisement

4-5 जुलाई को औसत तापमान 17.2 डिग्री सेल्सियस हो गया. आप कहेंगे कि ये कोई तापमान है. ये तो कुछ भी नहीं है. लेकिन यहां बात हो रही है पूरी दुनिया के औसत तापमान की. यह उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के तापमान का औसत है. ध्रुवों पर इस समय सर्दी है. तापमान में इस बढ़ोतरी की वजह जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो माना जा रहा है. 

Global Temperature Rising

जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के क्लाइमेट साइंटिस्ट किम कॉब ने बताया कि प्रशांत महासागर पूरी दुनिया का लगभग आधा हिस्सा कवर करता है. अल-नीनो के समय इसका बड़ा हिस्सा गर्म हो जाता है. इसकी वजह से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान बढ़ता जा रहा है. चाहे वह अमेरिका हो या फिर चीन. दोनों ही देश तप रहे हैं. 

3 को रिकॉर्ड टूटा, 4-5 को नया रिकॉर्ड

Advertisement

दुनिया के तापमान पर मायन यूनिवर्सिटी का क्लाइमेट रीएनालाइजर नजर रखता है. यह एक तरह का टूल है जो दुनिया भर से डेटा जमा करता है. वो डेटा जो वैश्विक वायुमंडल की नाप-जोख करता है. उसी ने बताया कि दुनिया का औसत तापमान 3 जुलाई को 17 डिग्री सेल्सियस और 4-5 जुलाई को 17.2 डिग्री सेल्सियस था. 

Global Temperature Rising

क्लाइमेट रीएनालाइजर सिर्फ वायुमंडल का ही नहीं, बल्कि सतह का तापमान भी देखता है. इसके अलावा सैटेलाइट्स से पूरी धरती के तापमान के आंकड़ों को भी जांचता है. इसके आंकड़ों को NOAA भी मानता है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ जुलाई ही इकलौता महीना है जब तापमान इतना ऊपर चला जाता है. 

जून महीना भी पिछले साल से गर्म था

यूरोपियन यूनियन के कॉपरनिकल क्लाइमेट चेंज सर्विस ने पिछले महीने यानी जून में भी गर्मी महसूस की थी. इस साल जून का महीना पिछले साल के जून महीने से 0.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म था. पिछले हफ्ते ही दक्षिणी और पूर्वी अमेरिका में हीटवेव का दौर था. टेक्सास में 13 लोगों की मौत हो गई थी.

Global Temperature Rising

जब बात आती है अल-नीनो की, तब उसे समुद्री गर्मी से जोड़ा जाता है. इस समय जो अल-नीनो चल रहा है, उसे वैज्ञानिक साल 2016 के अल-नीनो के बराबर पा रहे हैं. फिलहाल आंकड़े तो यही कह रहे हैं. इसकी वजह से समुद्री जीवों और कोरल रीफ पर आफत आती है. यानी मूंगा पत्थरों का रंग बदलने लगता है. 

Advertisement

किम कॉब कहते हैं कि तापमान के डेटा आते रहेंगे. लेकिन हमें उन्हें डराने वाला नहीं देखना है. हम नहीं चाहते कि ये आंकड़े हमें डराएं नहीं. क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो की वजह से वैश्विक स्तर पर तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. जो पेरिस एग्रीमेंट के खिलाफ चला जाएगा. यानी दुनिया धधकने लगेगी. 

ये कंटेंट वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है

Advertisement
Advertisement