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Explainer: क्या है कार्बन डेटिंग? जो बताएगी ज्ञानवापी में मिले 'शिवलिंग' की उम्र

वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में 'शिवलिंग' की सही उम्र पता करने के लिए कार्बन डेटिंग की मांग की जा रही है. इस पर कोर्ट 29 सितंबर को सुनवाई करेगी. पर इससे पहले यह जानना जरूरी है कि क्या कार्बन डेटिंग से सही उम्र का पता चलेगा? क्या ये तकनीक सही है? या किसी और तकनीक का उपयोग हो सकता है?

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ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले इस 'शिवलिंग' की उम्र पता करने के लिए कार्बन डेटिंग की मांग की गई है.
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले इस 'शिवलिंग' की उम्र पता करने के लिए कार्बन डेटिंग की मांग की गई है.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मौजूद ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के 'शिवलिंग' की असली उम्र पता करने की मांग की गई है. यह मांग हिंदू पक्ष की तरफ से हुई है. इस पर कोर्ट 29 सितंबर 2022 को सुनवाई करेगा. लेकिन उससे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर कार्बन डेटिंग क्या होती है? इससे कैसे उम्र पता करते हैं? क्या इस तकनीक से सही उम्र पता चल पाती है? या किसी और आधुनिक या नई तकनीक का उपयोग किया जा सकता है?

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वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पड़ोस में ही मौजूद है ज्ञानवापी मस्जिद. (फोटोः एपी)
वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पड़ोस में ही मौजूद है ज्ञानवापी मस्जिद. (फोटोः एपी)

कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) को रेडियो कार्बन डेटिंग (Radio Carbon Dating) भी कहते हैं. इस तकनीक को शिकागो यूनिवर्सिटी के विलियर्ड लिबी ने 1949 में खोजा था. उनके इस काम के लिए उन्हें 1960 में केमिस्ट्री का नोबेल दिया गया. उन्होंने अपनी तकनीक की मदद से एक प्राचीन लकड़ी की उम्र पता की थी. इसे एब्सोल्यूट डेटिंग (Absolute Dating) भी कहा जाता है. हालांकि यह सिर्फ एक अनुमानित उम्र ही बता सकता है. सटीकता पर आज भी विवाद होते आए हैं. 

वैज्ञानिकों के मुताबिक रेडियो कॉर्बन जितनी तेजी से खत्म होते हैं. उससे करीब 28 फीसदी तेजी से ये बनता है. इससे संतुलन की स्थिति को हासिल करना मुश्किल होता है. इसलिए माना जाता है कि जीव-जंतु मरने के बाद भी कार्बन का अवशोषण करते रहते हैं. इसलिए अस्थिर रेडियोएक्टिव तत्व बहुत ज्यादा समय में खत्म होता है. 

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अब समझते हैं कि कार्बन डेटिंग क्या होती है?

कार्बन डेटिंग क्या होती है? (What is Carbon Dating?). हमारे वायुमंडल में कार्बन के तीन आइसोटोप्स हैं. जो धरती के विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रियाओं का हिस्सा होते हैं. ये आइसोटोप्स हैं- पहला कार्बन 12 यानी कार्बन डाईऑक्साइड (Carbo Dioxide). दूसरा कार्बन 13 (Carbon 13) और कार्बन 14 (Carbon 14). कार्बन डेटिंग के लिए जरूरत होती है  कार्बन 14 की. क्योंकि बाकी दोनों आइसोटोप्स जमीन और वायुमंडल में आसानी से मिल जाते हैं. जबकि कार्बन 14 मुश्किल से मिलता है. उसकी जांच करनी पड़ती है. कार्बन 14 की मात्रा भी ईंधन जलने से बढ़ती है. लेकिन बेहद कम. कार्बन डेटिंग के जरिये कार्बन-12 और कार्बन-14 के बीच अनुपात निकाला जाता है. कार्बन-14 एक तरह से कार्बन का ही रेडियोधर्मी आइसोटोप है, इसका अर्धआयुकाल (Half life) 5730 साल का है. 

हिंदू पक्ष ने कार्बन डेटिंग की मांग की है, जिसकी सुनवाई कोर्ट 29 सितंबर 2022 को करेगा. (फोटोः एपी)च्छरों को नियंत्रित करने के लिए मेंढक और सैलामैंडर जैसे उभयचरी जीव बड़ा योगदान करते हैं. (फोटोः गेटी)
हिंदू पक्ष ने कार्बन डेटिंग की मांग की है, जिसकी सुनवाई कोर्ट 29 सितंबर 2022 को करेगा. (फोटोः एपी)

किन चीजों की कार्बन डेटिंग हो सकती है?

कार्बन डेटिंग लकड़ी, चारकोल, पुरातात्विक खोज, हड्डी, चमड़े, बाल और खून के अवशेष की उम्र, पीट या मिट्टी, शैल या कोरल, कार्बनिक अवशेषों वाले पुराने बर्तन. दीवारों पर चित्रकारी, फल, कीड़े या किसी भी प्रकार के कार्बनिक पदार्थ. इन सबकी उम्र पता चल सकती है कार्बन डेटिंग से लेकिन एक अनुमानित उम्र ही. सटीक उम्र का पता लगाना मुश्किल होता है. पत्थर और धातु की डेटिंग नहीं की जा सकती. लेकिन बर्तनों की डेटिंग हो सकती है. अगर उनमें खाने के अवशेष या बर्तन को सुंदर बनाने वाले रंग लगे हों. अगर पत्थर में किसी प्रकार का कार्बनिक पदार्थ मिलता है तो उससे एक अनुमानित उम्र का पता किया जा सकता है. 

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