हाल ही में एक शोध किया गया है जिसमें, पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन की संभावना के बारे में बताया गया है. शोध के मुताबिक, पृथ्वी जैसे ग्रह, जिनकी सतह का करीब 30% हिस्सा भूमि से ढका हुआ है, वे स्टार हैबिटेट ज़ोन में केवल 1% ही रहने योग्य हो सकते हैं. स्टार हैबिटेट ज़ोन वो इलाके होते हैं जहां किसी ग्रह की सतह पर पानी मौजूद हो सकता है. इन ग्रहों में करीब 80% पर भूमि है और करीब 20% पूरी तरह से समुद्र से ढके है.
शोधकर्ताओं ने प्लेट टेक्टोनिक्स के जरिए, ग्रह की महाद्वीपीय भूमि की रीसाइकिलिंग और ग्रह के मेंटल में पानी के बीच संबंधों की मॉडलिंग की है. स्विट्ज़रलैंड में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान के कार्यकारी निदेशक और शोध दल के सदस्य तिलमन स्पॉन (Tilman Spohn) का कहना है कि हम पृथ्वीवासी, भूमि और महासागरों के बीच संतुलन का आनंद लेते हैं. यह सोचकर तो अच्छा लगता है कि दूसरी पृथ्वी भी हमारी पृथ्वी की तरह होगी, लेकिन हमारी मॉडलिंग के नतीजे बताते हैं कि ऐसा है नहीं.
नतीजे बताते हैं कि पृथ्वी पर समुद्र और भूमि का अनुपात (1:3) अच्छी तरह से संतुलन में है. ज्यादातर ग्रहों के लिए, यह अनुपात ऊपर-नीचे हो सकता है- या तो भूमि ज्यादा या समुद्र. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि इस टिपिंग पॉइंट के होने की सबसे अधिक संभावना तब होती है, जब किसी ग्रह का आंतरिक भाग पृथ्वी के मेंटल के तापमान जितना ठंडा हो जाता है, जो 1,410 डिग्री सेल्सियस होता है. ज्यादा गहराई में यह 3,700 C तक गर्म होता है. इन्हीं तापमान के आधार पर तय होता है कि किसी ग्रह पर भूमि ज्यादा होगी या पानी.
पृथ्वी एक असाधारण ग्रह है
पृथ्वी करीब 2.5 अरब साल पहले, आर्कियन काल के अंत में इस स्थिति पर पहुंची थी और यहां पानी और भूमि का सही संतुलन हो पाया. स्पॉन कहते हैं कि पृथ्वी के प्लेट टेक्टोनिक्स इंजन में, अंदर की गर्मी से ही भूकंप, ज्वालामुखी और पहाड़ बनते हैं. और इसी के चलते महाद्वीपों का विकास होता है. दूसरी तरफ, भूमि का क्षरण (Land Erosion) साइकिल की एक सीरीज़ का हिस्सा है, जो वायुमंडल और अंदर के हिस्से के बीच पानी का आदान-प्रदान करता है. ये साइकिल किस तरह काम करती है, इसपर मॉडल बताते हैं कि आज हमारी पृथ्वी एक असाधारण ग्रह है.
Earth-like worlds with similar land-to-ocean ratios to our planet's may be exceedingly rare. https://t.co/JgoLPbvRIj pic.twitter.com/1LXMDtzaNb
— SPACE.com (@SPACEdotcom) October 8, 2022
शोधकर्ताओं ने कई और कारकों पर भी विचार किया, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कार्बन-सिलिकेट साइकिल पर किस तरह असर डालता है. उन्होंने पाया कि, भूमि और महासागर वाले ग्रह तभी रहने लायक हो सकते हैं, अगर वहां पृथ्वी जैसा तापमान और जलवायु हो. उनके जीव और वनस्पति पृथ्वी से काफी अलग हो सकते हैं.
मॉडल से पता चला कि 10% से कम भूमि वाले ग्रह नम वातावरण और उष्णकटिबंधीय जलवायु के साथ गर्म होंगे, जबकि ज़्यादा भूमि वाले ग्रह जिनकी सतह पर पानी 30% से कम है, वे बाकी ग्रहों की तुलना में ज्यादा ठंडे, शुष्क और कठोर होंगे. इन भू-प्रभुत्व वाले ग्रहों पर, ठंडे रेगिस्तान फैले होंगे और बड़े ग्लेशियर और बर्फ की चादरें होंगी.