साल 2023 के शुरूआती 9 महीनों में लगभग हर दिन देश में प्राकृतिक आपदाएं आई हैं. भयावह मौसम देखना पड़ा है. इन मौसमी बदलावों और आपदाओं की वजह से 2923 लोगों की जान चली गई. 20 लाख हेक्टेयर की फसल खराब हो गई. 80 हजार घर गिर गए. 92 हजार मवेशियों और जानवरों की मौत हो गई.
यह खुलासा हुआ है Center for Science and Environment (CSE) की नई रिपोर्ट 'इंडिया 2023: ऐन एसेसमेंट ऑफ एक्स्ट्रीम वेदर इवेंट्स' में. इसमें जनवरी से लेकर सितंबर तक के मौसमी बदलावों और आपदाओं की डिटेल्स हैं. इस तरह की घटनाओं को एक्स्ट्रीम वेदर इवेंट्स (Extreme Weather Events) कहते हैं.
CSE की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि साल 2023 में गर्म हो रही दुनिया में भारत भी लगातार असामान्य प्राकृतिक घटनाओं में घिरता चला जा रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इस तरह की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है जलवायु परिवर्तन (Climate Change).
सुनीता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की मुख्य वजह जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) यानी कोयला, तेल और गैस का अत्यधिक इस्तेमाल है. साल 2015 में पेरिस एग्रीमेंट के तहत देशों ने औसत तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस के नीचे रखने का फैसला किया था. प्री-इंडस्ट्रियल काल (1850-1900) के दौर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस कम रखना था.
तापमान बढ़ने से फेल हो रही है हमारी दुनिया
लेकिन दुनियाभर से आ रही वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के मुताबिक कोई भी देश में इसमें सफल होता नहीं दिख रहा है. पूरी दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस वाले टारगेट अचीव करने में फेल होती दिख रही है. इस टारगेट को हासिल करने के लिए पूरी दुनिया को जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल आधे से ज्यादा कम करना होगा. ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन रोकना होगा.
मध्यप्रदेश में आईं सबसे ज्यादा प्राकृतिक आपदाएं
यह काम पूरी दुनिया को 2030 तक कर ही लेना चाहिए. ताकि दुनिया को कार्बन डाईऑक्साइड से छुटकारा मिले. CSE की यह रिपोर्ट दुबई में हो रहे यूएन क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस के समय लॉन्च की गई. मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 138 एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स हुए. अगर एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स के दौरान हुई इंसानी मौतों की बात करें तो बिहार नंबर एक पर है.
बिहार में सबसे ज्यादा 642 लोगों की जान गई
बिहार में एक्सट्रीम वेदर की वजह से 642 लोगों की मौत हुई. इसके बाद हिमाचल प्रदेश में 365 और फिर उत्तर प्रदेश में 341 लोगों की मौत. अगर सबसे ज्यादा एक्सट्रीम वेदर वाले दिनों की बात करें तो दक्षिण भारत में केरल में सबसे ज्यादा दिन मौसम खराब रहा. वहां सबसे ज्यादा प्राकृतिक आपदाएं आईं. केरल में 67 दिन एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स दिखाई पड़े.
कर्नाटक में 11 हजार घर आपदाओं में गिरे
तेलंगाना में 62 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसलें खराब हो गईं. यहीं पर सबसे ज्यादा 645 मवेशी मारे गए. कर्नाटक में खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से 11 हजार घर गिर गए. उत्तरपश्चिम भारत के बात करें तो उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा खराब मौसम और आपदाएं देखने को मिलीं. कुल 113 दिन मौसम बिगड़ा रहा.
असम ने 102 दिनों तक एक्सट्रीम वेदर सहा
उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में भी मौसम बिगड़ा ही रहा. पूर्वी और उत्तरपूर्वी इलाकों में असम में सबसे ज्यादा 102 दिनों तक एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स देखने को मिले. इन घटनाओं में 159 मवेशी मारे गए. 48 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल खराब हो गई. नागालैंड में 1900 से ज्यादा घर बर्बाद हो गए.
फरवरी महीने ने गर्मी का 122 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
CSE की इस रिपोर्ट में बताया है कि जनवरी का महीना औसत से हल्का गर्म था. लेकिन फरवरी ने तो 122 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया था. यानी इतने सालों में छह बार फरवरी का महीना गर्म रहा. जबकि अगस्त के महीने में तो भयानक सूखे जैसे हालात थे. रिपोर्ट में लिखा है कि आकाशीय बिजली गिरने की वजह से भी काफी सारे लोग मारे गए.
176 दिन गिरी आकाशीय बिजली, 711 लोग मारे गए
आकाशीय बिजली गिरना एक सामान्य और अधिक होने वाली प्राकृतिक घटना है. इस साल की शुरूआत से सितंबर तक के 273 दिनों में से 176 दिन आकाशीय बिजली गिरती रही. जिसकी वजह से 711 लोगों की मौत हो गई. इनमें सबसे ज्यादा मौतें बिहार में हुई. बिजली गिरने से भी ज्यादा खतरनाक है तेज बारिश के बाद आई बाढ़.
पूरे देश में सबसे ज्यादा बड़ी आफत तेज बारिश, बाढ़ और भूस्खलन है. इसकी वजह से 1900 से ज्यादा लोग मारे गए. रिपोर्ट के मुताबिक 80 प्रतिशत भारतीय खराब मौसम, प्राकृतिक आपदाओं और एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स जैसे खतरों के बीच रह रहे हैं. उन्हें इस तरह के जलवायु संबंधी खतरों का सामना करना पड़ता है.