प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 से 16 जुलाई को फ्रांस की यात्रा पर जा रहे हैं. ये उम्मीद है कि इस दौरान भारत सरकार फ्रांस के साथ 26 राफेल-एम और तीन स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद को लेकर डील करे. यह डील करीब 96 हजार करोड़ रुपए की होगी. राफेल एम यानी राफेल मरीन फाइटर जेट.
26 राफेल-एम फाइटर जेट में से 22 फाइटर जेट सिंगल सीटर होंगे. जबकि चार डबल सीटर ट्रेनिंग फाइटर होंगे. इनकी डील 90 हजार करोड़ की होगी. इसके अलावा प्रोजेक्ट 75 के तहत तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन भारत लाई जाएंगी. राफेल-एम फाइटर जेट्स को भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट करियर्स पर तैनात किया जाएगा.
भारतीय नौसेना के पास अभी फाइटर जेट्स और पनडुब्बियों की कमी है. जिसे तत्काल पूरा करने में यह डील फायदेमंद होगी. राफेल-एम फाइटर जेट्स को आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात किया जाएगा. जहां पहले से MiG-29 फाइटर जेट्स तैनात हैं. फ्रांस में इस डील की घोषणा से पहले इसे भारत का डिफेंस एक्वेजिशन काउंसिल अगले कुछ दिन में हरी झंडी देगा.
क्या खासियत है राफेल मरीन की?
डैसो राफेल मरीन (Rafale Marine) की अधिकतम गति मैक 2 है. यानी 2469.6 किलोमीटर प्रतिघंटा. राफेल की रेंज 3700 किलोमीटर से ज्यादा है. राफेल मरीन आसमान में 55 हजार फीट की अधिकतम ऊंचाई पर उड़ सकता है.
राफेल मरीन में एक पायलट की जरुरत होती है. इसकी लंबाई 50.1 फीट है, जबकि विंग स्पैन 35.4 फीट है. इसका वजन 10,300 किलोग्राम है. फाइटर जेट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की कई रेटिंग्स से तुलना की जाती है. जिसमें से बीवीआर रेटिंग प्रमुख है. डैसो राफेल मरीन को BVR रेटिंग 100 में 90 फीसदी है.
राफेल पर लग सकते हैं MBDA मेटियोर बेयोंड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल लग सकती है. राफेल में 30 मिमी कैलिबर की GIAT 30M/719B तोप लगी है, वहीं पर हॉर्नेट में 20 मिमी कैलिबर की M61A1 वल्कैन तोप लगी है.
राफेल मरीन में कई बदलाव किए गए हैं
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए राफेल मरीन में कई बदलाव किए गए हैं. जैसे- रीनफोर्स्ड अंडर कैरिज, नोज व्हील, बड़ा अरेस्टर हुक, इंटीग्रेटेड सीढ़ी आदि. राफेल एम ने जनवरी 2022 में गोवा में INS हंसा पर मौजूद शोर बेस्ट टेस्ट फैसिलिटी में कई तरह के ट्रायल्स भी दिए थे. इसके अलावा फाइटर जेट को भारतीय जरूरतों के हिसाब से कई तरह की जांच प्रक्रियाओं से गुजारा जा चुका है. क्योंकि इसमें परमाणु हथियार भी लगेंगे. मीटियोर, स्कैल्प और हैमर मिसाइलों को लगाने की बात चल रही है.