दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र (World's Highest Battlefield) है सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier). फिलहाल सियाचिन में दिन का तापमान माइनस 21 डिग्री सेल्सियस है. जबकि रात में पारा माइनस 32 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच रहा है. ऐसे में हमारे वीर जवान मौसम से जंग लड़ते हुए सीमा की सुरक्षा में लगे हैं. राजपुताना राइफल्स ने एक ट्वीट किया है, जिसमें हमारे जवानों की एक टुकड़ी सियाचिन के पहाड़ों पर गश्त करती दिख रही है.
वीडियो में दिख रहा है कई मोटी बर्फ जिसमें पैर रखते ही जांघ तक बर्फ आ रही है. उसमें एक लाइन से जवान चल रहे हैं. ऊंचाई पर बर्फीली तेज हवा चल रही है. लेकिन हमारे जवानों के कदम को डिगा नहीं पा रही है. आप इस वीडियो में देखेंगे कि कैसे एकदूसरे का साथ देते हुए हमारे जवान चल रहे हैं. संतुलन बिगड़ता है लेकिन फिर चल उठते हैं.
Indian Army at the world's highest battlefield - The Siachen Glacier. Salute and respect to the brave soldiers of the Indian Army who protect us. Jai Hind🇮🇳 #IndianArmy #HeroesInUniform pic.twitter.com/2veKIxvRF3
— RAJPUTANA RIFLES (@rajrifofficial) December 23, 2022
सियाचिन को 1984 में मिलिट्री बेस बनाया गया था. तब से लेकर 2015 तक 873 सैनिक सिर्फ खराब मौसम के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं. सियाचिन देश के उन कुछ गिने-चुने इलाकों में से एक है जहां न तो आसानी से पहुंच सकते हैं. न ही दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध मैदान में जाना हर किसी के बस की बात नहीं.
सियाचिन ग्लेशियर पर स्थित भारतीय सीमा की रक्षा के लिए 3 हजार सैनिक हमेशा तैनात रहते हैं. इन तीन हजार जवानों की सुरक्षा भी बेहद जरूरी है. भारत सरकार सियाचिन पर मौजूद जवानों हर दिन करीब 5 करोड़ रुपये खर्च करती है. इसमें सैनिकों की वर्दी, जूते और स्लीपिंग बैग्स भी शामिल होते हैं.
साल 2021 में ही सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात जवानों को पर्सनल किट दी गई थी. ये किट उन्हें अत्यधिक सर्दी से बचाती है. हर एक किट की कीमत डेढ़ लाख रुपये है. आमतौर पर यहां मौसम इतना खराब रहता है कि सिर्फ गन शॉट फायर करने या मेटल का कुछ भी छूने से ठंड से उंगलियां अकड़ सकती हैं यानी फ्रॉस्ट बाइट तक हो सकती है. ज्यादा दिन रहने पर देखने और सुनने में दिक्कत आती है. याद्दाशत कमजोर होने लगती है. उंगलियां गल जाती हैं. कई बार काटने तक की नौबत आ जाती है.
किट का मकसद जवानों को सर्वाइवल में मदद करना है. सियाचिन पर तैनाती के वक्त 170-180 या इससे ज्यादा गति से हवा चलती है. जो बर्फ की वजह से बेहद ठंडी हो जाती है. इस किट में सबसे महंगा होता है उनकी यूनिफॉर्म. यह एक मल्टीलेयर्ड एक्स्ट्रीम विंटर क्लोदिंग है. इसकी कीमत करीब 28 हजार रुपए हैं. साथ ही स्लीपिंग बैग भी रहता है. इसकी 13 हजार रुपए है. डाउन जैकेट और स्पेशल दस्तानों की कीमत करीब 14 हजार रुपये हैं. जबकि, मल्टीपरपज जूतों की कीमत करीब 12,500 रुपए है.
इसके अलावा ऑक्सीजन सिलेंडर भी होता है, जिसकी कीमत करीब 50 हजार रुपए होती है. क्योंकि इतनी ऊंचाई पर हवा पतली हो जाती है. उसमें ऑक्सीजन की कमी होती है. हिमस्खलन (Avalanches) में दबे साथियों को खोजने के यंत्रों की कीमत करीब 8000 रुपए होती है. सियाचिन ग्लेशियर पर हिमस्खनल आते रहते हैं. भारत और पाकिस्तान दोनों देश के जितने सैनिक यहां आपसी लड़ाई के कारण नहीं मारे गए हैं, उससे भी कहीं ज्यादा सैनिक यहां ऑक्सीजन की कमी, हिमस्खलन और बर्फीले तूफान के कारण मारे गए हैं.
सियाचिन ग्लेशियर पर ज्यादातर समय शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान रहता है. एक अनुमान के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के कुल मिलाकर 2500 जवानों को यहां अपनी जान गंवानी पड़ी है. 2012 में पाकिस्तान के गयारी बेस कैंप में हिमस्खलन के कारण 124 सैनिक और 11 नागरिकों की मौत हो गई थी.