नासा (NASA) ने नया ऑफिस बनाया है. नाम है मून टू मार्स प्रोग्राम ऑफिस (Moon To Mars Program Office). ये ऑफिस चंद्रमा और मंगल ग्रह पर होने वाली इंसानी गतिविधियों की प्लानिंग, डिजाइनिंग और उन्हें पूरा करने के मिशन तैयार करेगा. अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने इसका प्रमुख एक भारतवंशी को बनाया है. जिनका नाम है अमित क्षत्रिय (Amit Kshatriya).
मून टू मार्स प्रोग्राम ऑफिस का दफ्तर एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट मिशन डायरेक्टोरेट में होगा. अमित नासा के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर जिम फ्री को रिपोर्ट करेंगे. नासा प्रमुख और एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा कि मून टू मार्स प्रोग्राम ऑफिस चांद पर होने वाले मिशन और मंगल पर इंसानों को उतारने के प्रोग्राम पर काम करेगा.
बिल ने कहा कि यह समय अंतरिक्ष में खोजबीन का गोल्डेन पीरियड यानी स्वर्णिम समय है. मुझे उम्मीद है कि नया दफ्तर नासा को लंबे समय के लूनर और मार्स मिशन के लिए तैयार करेगा. ताकि इंसानियत का विकास हो सके.
क्या क्या करेगा मून टू मार्स प्रोग्राम ऑफिस?
- यह हार्डवेयर डेवलपमेंट करेगा.
- मिशन इंटिग्रेशन तैयार करेगा.
- रिस्क मैनेजमेंट फंक्शन का एनालिसिस करेगा.
- अर्टेमिस मिशन के हर चरण पर नजर रखेगा.
- मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने की तैयारी करेगा.
- स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट की तैयारियां देखेगा.
- ओरियन स्पेसक्राफ्ट और ग्राउंड सिस्टम को तैयार कराएगा.
- ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम, स्पेससूट के विकास में मदद करेगा.
अब जानिए कि अमित क्षत्रिय कौन हैं?
अमित क्षत्रिय (Amit Kshatriya) नासा के सबसे बड़े अर्टेमिस मिशन (Artemis Mission) और मंगल ग्रह पर इंसानों को पहुंचाने के मिशन को लीड करेंगे. उसे निर्देशित करेंगे. इससे पहले अमित कॉमन एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट डिविजन में डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर थे.
इस पद पर रहते हुए ही उन्होंने नासा के सबसे बड़े मिशन अर्टेमिस के स्पेस लॉन्च सिस्टम यानी सबसे बड़े रॉकेट, ओरियन स्पेसक्राफ्ट और एक्सप्लोरेशन ग्राउंड सिस्टम्स प्रोग्राम्स को बना और निर्देशित कर चुके हैं. वो साथ ही अर्टेमिस कैंपेन डेवलपमेंट डिविजन से भी जुड़े थे.
20 साल पहले नासा से जुड़े थे अमित
अमित क्षत्रिय साल 2003 में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नासा से जुड़े. इसके बाद उन्होंने खासतौर से रोबोटिक्स इंजीनियर और स्पेसक्राफ्ट ऑपरेटर बनकर काम किया. उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर रोबोटिक असेंबली में प्रमुख किरदार निभाया. साल 2014 से 2017 तक अमित स्पेस स्टेशन फ्लाइट डायरेक्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोनॉट्स की टीम के ऑपरेशंस और फ्लाइट्स को संचालित किया.
स्पेस स्टेशन के बड़े मिशनों को अंजाम दिया
साल 2017 से 2021 तक वो ISS व्हीकल ऑफिस के डिप्टी और बाद में एक्टिंग मैनेजर बने. इस दौरान उन्होंने लगातार चल रही इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और हार्डवेयर प्रोग्राम मैनेजमेंट को संभाला. साल 2021 में उन्हें नासा मुख्यालय के एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स डेवलपमेंट मिशन डायरेक्टोरेट में असिसटेंट डिप्टी एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर बनाया गया.
चांद से सफलतापूर्वक वापस बुलाया यान को
अमित उस स्पेसक्राफ्ट यानी ओरियन को विकसित करने वाली टीम के प्रमुख सदस्य रहे हैं, जिसने अभी कुछ महीनों पहले अर्टेमिस-1 मिशन के रॉकेट से लॉन्च किए गए ओरियन स्पेसक्राफ्ट को चांद से सफलतापूर्वक वापस बुलाया है. अमित पासाडेना स्थित कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से BSc हैं.
तीन बच्चों के पिता, ब्रुकफील्ड में पैदा हुए
इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से गणित में पोस्ट ग्रैजुएशन किया. टेक्सास के केटी में अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहते हैं. अमित के माता-पिता भारत से अमेरिका गए थे. अमित का जन्म विस्कॉन्सिन के ब्रुकफील्ड में हुआ था. उन्हें नासा का आउटस्टैंडिंग लीडरशिप मेडल भी मिल चुका है.
अमित को सिल्वर स्नूपी अवॉर्ड भी मिला है. यह अवॉर्ड एस्ट्रोनॉट्स को सफलतापूर्वक स्पेस स्टेशन तक ले जाकर वापस सुरक्षित लाने के लिए मिलता है. इसके अलावा सिल्वर स्नूपी अवॉर्ड कॉमर्शियल ऑर्बिटल ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेस ड्रैगन की रोबोटिक इंजीनियरिंग के लिए मिला है.