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Hell Planet: नरक जैसा ग्रह मिला... पारा 2000 डिग्री सेल्सियस पर, हवाओं में पिघले हुए लोहे के कण

अपने सौर मंडल से बाहर एक ऐसा ग्रह खोजा गया है, जो किसी नरक से कम नहीं है. इसमें दिन का तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस है. हवाएं बेहद तेज चलती हैं. हवाओं में लोहे के सूक्ष्म कणों की मात्रा बहुत ज्यादा है. ये कण इस ग्रह के वायुमंडल में तेजी से ऊपर-नीचे होते रहते हैं. कुल मिलाकर यहां का मौसम बेहद खराब है.

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बाएं से... WASP-76b ग्रह का आर्टिस्टिक इंप्रेशन और उसपर चलने वाली हवा के साथ गिरते गर्म पिघले हुए लोहे के कण. (फोटोः ESA/Tanis Cunha)
बाएं से... WASP-76b ग्रह का आर्टिस्टिक इंप्रेशन और उसपर चलने वाली हवा के साथ गिरते गर्म पिघले हुए लोहे के कण. (फोटोः ESA/Tanis Cunha)

यूर्निवर्सिटी ऑफ जेनेवा के वैज्ञानिकों ने ऐसा नारकीय ग्रह खोजा है, जिसकी कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी. इस ग्रह का नाम है WASP-76B. यहां का मौसम अत्यधिक खराब है. हवा है लेकिन बहुत तेज गति में चलती हुई. हवा में लोहे के सूक्ष्म कणों की मात्रा बहुत ज्यादा है. दिन का तापमान 2000 डिग्री सेल्सियस रहता है. यानी गए और पिघले. 

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हैरानी इस बात की है ये ग्रह अपने तारे से टाइडली लॉक्ड है. यानी जुड़ा हुआ है. जैसे हमारा चांद. इसलिए इसके चारों तरफ तेज हवाएं चलती रहती हैं. इनमें लोहे के कणों की मात्रा भी ज्यादा है. ये लगातार वायुमंडल में कभी ऊपर तो कभी नीचे होती रहती हैं. यानी यहां लोहे के कणों की परतें हैं. जो ज्यादा तापमान की वजह से दिन में पिघल-पिघल कर इस ग्रह की सतह पर गिरते रहते हैं. 

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Hell Planet, Molten Iron Particles In Air
तेज चलती गर्म हवाओं से गिरते पिघले हुए लोहे के कण. 

यह एक एक्सोप्लैनेट है. यानी बाहरी ग्रह. बाहरी इसलिए क्योंकि ये हमारे सौर मंडल में नहीं है. 1990 से लेकर अब तक वैज्ञानिकों ने ऐसे 5200 बाहरी ग्रहों की खोज की है. इनमें से तो कई बृहस्पति और शनि जैसे बड़े हैं. कुछ चट्टानी तो कुछ पृथ्वी जैसे भी हैं. लेकिन उनमें रहने लायक स्थितियां हैं या नहीं ये अभी तक पता नहीं है. 

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हमारी पृथ्वी से करीब 640 प्रकाश वर्ष दूर

WASP-76b ने हाल ही में बहुत ध्यान आकर्षित किया है. यह एक अल्ट्रा-हॉट गैस प्लैनेट है, हमारी पृथ्वी से करीब 640 प्रकाश वर्ष दूर. पाइसेस नक्षत्र की ओर मौजूद इस ग्रह की खोज साल 2013 में हुई थी. तब से इसकी स्टडी हो रही है. इसकी कक्षा अपने मेजबान तारे के बहुत करीब है. यह अपने तारे का एक चक्कर सिर्फ 1.8 दिन में पूरा कर लेता है. 

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लोहे के कणों की खोज ने दी नई जानकारी

इसका एक हिस्सा हमेशा रोशनी में रहता है. दूसरा हिस्सा अंधेरे में. इसलिए दिन में पारा 2000 डिग्री सेल्सियस जाता है. लोहे के कण हवा में तैरने लगते हैं. लेकिन रात में ठंडा होने पर लोहे के कण हवा से गिरकर जमीन पर बैठ जाते हैं. हाल ही में जेनेवा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने लोहे के कणों की खोज की. इसे एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित कराया. 

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