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क्या सचमुच संभव है Telepathy? दूर देश में कैसे मेसेज पहुंचाती है Subconscious Mind की ताकत

बिना किसी आधार या यंत्र के अपने विचारों को दूसरे के पास पहुंचाना, दूसरों के विचार समझ लेना या किसी घटना का पहले से अहसास हो जाने को टेलीपैथी (हिंदी में दूरानुभूति ) कहा गया है. लेकिन अकसर ये सवाल उठाया जाता है कि क्या टेलीपैथी जैसी कोई चीज सचमुच संभव है? अगर हां तो कैसे? क्या सचमुच मन की शक्ति से किसी तक संदेश पहुंचाया जा सकता है?

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फोटो क्रेडिट: Getty Images
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अक्सर हमारे साथ कुछ ऐसा होता है जिसका हमें कुछ समय पहले ही अहसास हो चुका होता है. या कभी हम किसी को बहुत अधिक याद कर रहे होते हैं और अचानक उसी व्यक्ति का फोन आ जाता है. ऐसे में हम बस कुछ पल के लिए हैरान होकर इसे संयोग मानकर भूल जाते हैं. लेकिन हर बार ये केवल संयोग नहीं होता.

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बिना किसी आधार या यंत्र के अपने विचारों को दूसरे के पास पहुंचाना, दूसरों के विचार समझ लेना या किसी घटना का पहले से अहसास हो जाने को टेलीपैथी (हिंदी में दूरानुभूति ) कहा गया है. लेकिन अकसर ये सवाल उठाया जाता है कि क्या टेलीपैथी जैसी कोई चीज सचमुच संभव है? अगर हां तो कैसे? क्या सचमुच मन की शक्ति से किसी तक संदेश पहुंचाया जा सकता है?

क्या सचमुच संभव है टेलीपैथी?

इसका सीधा जवाब है - हां, और सबसे पहले विज्ञान ही इसकी पुष्टि करता है. दरअसल सामान्य तौर पर हम पांच ज्ञानेन्द्रियों (Senses) के जरिए किसी चीज या दृश्यों को समझ पाते हैं, लेकिन कभी-कभी किसी के भीतर छठी इन्द्रिय (Sixth Sense) जागृत हो जाती है. इस इन्द्रिय को विज्ञान ने अतीन्द्रिय ज्ञान (Extra Sensory Perception) का नाम देकर सेंसस में शामिल किया है. सभी लोगों में टेलीपैथी की थोड़ी बहुत क्षमता होती है, लेकिन कुछ लोगों में यह इतनी स्ट्रांग होती है कि वह अपनों तक मानसिक संवाद पहुंचा पाते हैं या भविष्य की किसी घटना को पहले ही भांप लेते हैं. इसमें हमारी पांच ज्ञानेंद्रियों का इस्तेमाल नहीं होता, यानी इसमें देखने, सुनने, सूंघने, छूने और चखने की शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाता. यह हमारे मन और मस्तिष्क की शक्ति होती है. 

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महाभारतकाल में  टेलीपैथी

महाभारतकाल में संजय के पास एक क्षमता थी, जिसके जरिए उन्होंने दूर चल रहे युद्ध का वर्णन धृतराष्ट्र को कह सुनाया था. वह कोई माया या जादुई शक्ति नहीं थी. बल्कि टेलीपैथी का एक उदाहरण था. प्राचीन काल में ऋषि मुनि इसी शक्ति से भूत भविष्य और दूसरों के मन की बात जान लेते थे. लेकिन उन दिनों इसे दिव्य दृष्टि और त्रिकालदर्शी शक्ति के नाम से जाना जाता था.

फोटो क्रेडिट- Getty Images

1882 में अस्तित्व में आया शब्द टेलीपैथी

गौरतलब है कि टेलीपैथी शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल 1882 में फैड्रिक डब्लू एच मायर्स ने किया था. कहते हैं कि जिस व्यक्ति में यह छठी ज्ञानेंद्रिय होती हैं या जागृत होती हैं वह जान लेता है कि दूसरों के मन में क्या चल रहा है. यह परामनोविज्ञान का विषय है जिसमें टेलीपैथी के कई प्रकार बताए जाते हैं.

आम संवाद से क्यों बेहतर है टेलीपैथी?

टेलीपैथी के कई फायदे हैं. जब कभी आप अपने विचारों को मौखिक रूप से समझाने में सक्षम नहीं होते हैं. ऐसे समय में टेलीपैथी काम आती है. ऑरा रीडर और पॉडकास्ट होस्ट मिस्टिक माइकेला कहते हैं, "हमेशा उन चीजों को कहना संभव नहीं होता है, जिनकी हमें जरूरत होती है या हम अपनी भौतिक दुनिया में किसी से कहना चाहते हैं. संबंध, दुख जाहिर करना और माफी तक को टेलीपैथिक कम्युनिकेशन में पूरा किया जा सकता है, जो हमेशा आमने-सामने की बातचीत में नहीं हो सकता है." टेलीपैथी बाहर से हासिल करने की चीज नहीं है बल्कि यह हमारे अंदर पहले से मौजूद है. यह सिर्फ इतना है कि ज्यादातर मामलों में लोग अपने भीतर के संपर्क में नहीं होते हैं, जिसने उन्हें अपनी आंतरिक शक्तियों और क्षमता से अनजान बना दिया है.

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मौखिक संचार की तुलना में टेलीपैथिक संचार में अधिक स्पष्टता होती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि मन में आप कुछ महसूस कर रहे होंगे लेकिन जरूरी नहीं कि विभिन्न कारणों से आपके विपरीत व्यक्ति को वही भावना व्यक्त की जाए. यह अक्सर गलत संचार या गलतफहमी का कारण बन सकता है. लेकिन टेलीपैथी में आप बिना किसी अस्पष्टता के ठीक वही संवाद करते हैं जो आप दूसरे व्यक्ति से चाहते हैं.
  
कैसे कर सकते हैं टेलीपैथी कम्युनिकेशन?

बात यह है कि हमारे दिमाग को इस तरह से अनुकूलित किया गया है कि हम अपने आसपास के लोगों के साथ संवाद करने के लिए विभिन्न गैजेट्स पर पूरी तरह से निर्भर हो गए हैं. लेकिन टेलीपैथी का उपयोग करने की क्षमता हासिल करना बहुत मुश्किल नहीं है क्योंकि यह पहले से ही हमारे अंदर है और हमें सिर्फ इसे जगाने की जरूरत है.  शुरू करने के लिए टेलीपैथी सबसे अच्छी तरह से उन लोगों के साथ की जा सकती है जिनके हम करीब हैं या जिनसे अधिक नियमित रूप से बातचीत करते हैं, जैसे कि आपका जीवनसाथी, सबसे अच्छा दोस्त आदि.  क्योंकि करीबी लोगों से आप पहले से ही किसी स्तर पर टेलीपैथिक रूप से संचार करने की अधिक संभावना रखते हैं (भले ही आपको इसका एहसास न हो!).  

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हालांकि ये प्रक्रिया लंबी है और इसे प्रैक्टिकली ज्यादा बेहतर समझा जा सकता है. लेकिन संक्षिप्त में बताएं तो ध्यान, प्राणायाम और कांसेंट्रेशन से छठी इंद्रिय को जगाया जा सकता है. इसके अलावा दूसरा तरीका है कि शवासन में लेट जाएं और आंखें बंद कर ध्यान करें. लगातार इसका अभ्यास करें और योग निद्रा में जाने का प्रयास करें. योग निद्रा अर्थात शरीर और कॉन्शियस माइंड इस अवस्था में सो जाता है लेकिन सबकॉन्शियस माइंड जाग्रत रहता है. इसकी मदद से मानसिक स्तर पर मेसेज ट्रांसफर किया जाता है.

 

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