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Iron Dome: छोटी सी चूक और हमास ने फेल कर दिया इजरायल का आयरन डोम... जानिए कैसे?

क्या है Iron Dome? जिसने पिछले 12 वर्षों से आतंकियों के रॉकेट से इजरायल की सुरक्षा कर रखी है. अगर ये एयर डिफेंस सिस्टम न होता तो न जाने कितने लोग मारे जाते. आयरन डोम की सटीकता 90 फीसदी है, लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने जब 20 मिनट में 5 हजार रॉकेट दागे, तब वह पूरी तरह से कारगर नहीं था. जानिए क्यों?

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ये है आयरन डोम की एक बैट्री जिससे इंटरसेप्टर तामीर मिसाइल छूट रही है. यही मिसाइल गाजा के रॉकेटों को ध्वस्त करती है. (फोटोः गेटी)
ये है आयरन डोम की एक बैट्री जिससे इंटरसेप्टर तामीर मिसाइल छूट रही है. यही मिसाइल गाजा के रॉकेटों को ध्वस्त करती है. (फोटोः गेटी)

Hamas आतंकियों ने इजरायल पर 20 मिनट में ताबड़तोड़ 3 से 5 हजार रॉकेट गिराए. इजरायल दंग रह गया. लोग डर गए. सैकड़ों लोग मारे गए. अमेरिका और चीन के नागरिक भी. और भी ज्यादा लोग मारे जाते पर Iron Dome ने बचा लिया. इजरायल का बनाया हुआ दुनिया का सबसे सटीक और कारगर एयर डिफेंस सिस्टम. 

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साल 2011 में इजरायल ने Iron Dome को अपने देश में तैनात किया. तब से यह हवाई रक्षा प्रणाली इजरायल के लोगों को हमास और अन्य फिलिस्तीनी आतंकी समूहों के रॉकेट हमले से बचा रहा है. अगर आयरन डोम अपनी तरफ 100 रॉकेट आता देखता है, तो वह 90 को हवा में ही नष्ट कर देता है. यानी 90 फीसदी सटीकता. 

Israels Iron Dome
इन्फोग्राफिक्सः राहुल गुप्ता/इंडिया टुडे

इसे बनाने की शुरूआत 2006 में हुई, जब हिजबुल्लाह आतंकियों ने इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे. नतीजा बहुत बुरा था. इजरायल में सैकड़ों लोग मारे गए. हजारों देश छोड़कर भाग गए. काफी ज्यादा नुकसान हुआ. इसके बाद इजरायल ने स्वदेशी मिसाइल डिफेंस शील्ड (Missile Defence Shield) बनाया. उसे नाम दिया आयरन डोम. 

कैसे काम करता है Iron Dome?

जैसे ही दुश्मन अपना रॉकेट दागता है. आयरन डोम में लगा राडार सिस्टम उसे पहचानता है. ट्रैक करता है. फिर कंट्रोल सिस्टम इम्पैक्ट प्वाइंट का पता करता है. यानी रॉकेट गिरा तो कितना नुकसान होगा. उसे हवा में मार गिराएं तो कितनी दूर फटेगा. ताकि नुकसान न हो. इसके बाद कंट्रोल सिस्टम से मिले कमांड पर लॉन्चर से मिसाइल दागी जाती है. जिसे इंटरसेप्टर कहते हैं. इजरायल के लोग उसे तामीर (Tamir) बुलाते हैं. मिसाइल दुश्मन के रॉकेट पास जाकर फट जाती है, इससे वह भी ध्वस्त हो जाता है. 

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Israels Iron Dome
इंफोग्राफिक्सः राहुल गुप्ता/इंडिया टुडे

क्या इस बार फेल हो गया आयरन डोम? 

साल 2011 में इसे पहली बार तैनात किया गया. तैनाती के 24 घंटे बाद ही इसने गाजा से दागे गए एक रॉकेट को हवा में ध्वस्त कर दिया. इसके बाद आयरन डोम बैटरी को पूरे देश में फैलान शुरू किया गया. मार्च 2012 में आयरन डोम ने गाजा की तरफ से दागे गए 99 रॉकेटों में से 25 को मार गिराया था. 2013 के अंत तक इसकी इंटरसेप्शन की ताकत 85 फीसदी बढ़ गई थी. 2014 के अंत तक यह बढ़कर 90 फीसदी हो गई. 2021 में भी इसने यही क्षमता दिखाई. 

7 सितंबर 2023 को हमास ने इजरायल पर 5000 रॉकेट दागे. वो भी सिर्फ 20 मिनट में. इतने कम समय में इतनी ज्यादा मात्रा में रॉकेट दागने की वजह से आयरन डोम उन्हें काउंटर नहीं कर पाया. हमास के रॉकेट की दिशा और गति तय नहीं रहती. इसलिए उनकी ट्रैजेक्टरी समझने में आयरन डोम को दिक्कत हुई.  

यानी हमास ने आयरन डोम पर इतनी ज्यादा मात्रा में रॉकेट दागे कि वह उनमें से कई को रोक नहीं पाया. उसकी क्षमता से ज्यादा रॉकेट उसकी तरफ बढ़ गए थे. इसलिए आयरन डोम सारे रॉकेट्स को रोक नहीं पाया. इसी वजह से इस बार हमास के हमले में इजरायल को ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा.

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Israels Iron Dome
गाजा के रॉकेट को हवा में ही ध्वस्त करता इजरायल के आयरन डोम से निकला तामीर इंटरसेप्टर मिसाइल. (फोटोः AFP)

इजरायल ने कब-कब इस्तेमाल किया इसे

गाजा के साथ हुए तीन संघर्षों में इजरायल ने आयरन डोम का इस्तेमाल किया है. ये युद्ध 2011, 2012 और 2021 में हुए थे. इसके अलावा इजरायल ने इस खास हथियार का इस्तेमाल ऑपरेशन पिलर ऑफ डिफेंस, ऑपरेशन प्रोटेक्टिव एज, सिनाई इंसर्जेंसी, 2021 इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष, ऑपरेशन ब्रेकिंग डॉन और ऑपरेशन शील्ड एंड ऐरो में किया है. 

आयरन डोम की रेंज अब 150 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 250 वर्ग किलोमीटर हो चुकी है. यह अब दो दिशाओं से आने वाले दुश्मन रॉकेटों पर हमला कर सकता है. मिसाइल फायरिंग यूनिट में तामीर इंटरसेप्टर मिसाइल होती है. जो इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सेंसर्स से लैस होती है. स्टीयरिंग फिन्स लगी होती है. एक बैट्री में तीन-चार लॉन्चर होते हैं. हर लॉन्चर में 20 मिसाइलें होती हैं. 

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