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Chandrayaan-3: ISRO ने जारी की मिशन की पहली तस्वीरें, अगस्त में हो सकता है लॉन्च

चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की पहली तस्वीरें आखिरकार हमारे सामने आ गई हैं. एक डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से ISRO ने इस मिशन की तस्वीरें साझा की हैं. इस मिशन के अगस्त में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है.

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चंद्रयान -3 मिशन (फोटो: इसरो)
चंद्रयान -3 मिशन (फोटो: इसरो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डॉक्यूमेंट्री 'स्पेस ऑन व्हील्स' में तस्वीरों को जारी किया
  • डॉक्यूमेंट्री में भारत द्वारा लॉन्च किए गए 75 सैटेलाइट को भी दिखाया

कोविड-19 महामारी की वजह से चंद्रयान -3 (Chandrayaan-3) मिशन में देरी हो रही थी. इस मिशन की पहली तस्वीरें आखिरकार हमारे सामने आ गई हैं. भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक डॉक्यूमेंट्री 'स्पेस ऑन व्हील्स' (Space on Wheels) में इन तस्वीरों को जारी किया है. इस डॉक्यूमेंट्री में भारत द्वारा लॉन्च किए गए 75 उपग्रहों (satellites) को भी दिखाया गया है.

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Chandrayaan-3 अगस्त में होगा लॉन्च

वीडियो में दिखाया गया है कि चंद्रमा की सतह को छूने वाला चंद्रयान-3 लैंडर कैसा दिखाई देता है. यह मिशन चंद्रयान-2 के बाद बनाया गया है, जो 2019 में चंद्रमा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. यह सतह से करीब 350 मीटर की ऊंचाई से तेजी से घूमते हुए जमीन पर गिरा था. 

he Chandrayaan-3 mission
कोविड-19 के चलते मिशन में हुई देरी (फोटो: इसरो)

इसरो का कहना है कि उनकी कोशिश है कि इस साल अगस्त तक इस मिशन को लॉन्च कर दिया जाए. हालांकि, यह फिलहाल मुश्किल लगता है, क्योंकि कई हार्डवेयर टेस्ट अभी भी बाकी हैं. इस साल फरवरी में, अंतरिक्ष विभाग ने एक लिखित जवाब में कहा था कि चंद्रयान-3 पर काम चल रहा है और इसे इस साल अगस्त में लॉन्च किया जाएगा.

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह का कहना था कि कोविड-19 के कारण इस मिशन में देरी हुई है. इसके अलावा, और भी चल रहे कई मिशन प्रभावित हुए हैं. 

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17 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में अन्य मिशन के बारे में भी बताया

चंद्रयान -3 के अलावा, 17 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री में देश के आने वाले आदित्य एल 1 मिशन (Aditya L1 Mission) और गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) के बारे में बताया गया है जो भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में लॉन्च करेगा. 

The Chandrayaan-3 mission
अगस्त में मिशन लॉन्च होने की संभावना (फोटो: इसरो)

आदित्य L1 मिशन को पृथ्वी-सूर्य प्रणाली के पहले लैग्रेंज बिंदु में रखा जाएगा यह सूर्य के कई गुणों जैसे, कोरोनल मास इजेक्शन के डायनैमिक्स और ऑरिजिन के बारे में पता लगाएगा. भारत पहले से ही यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर चंद्रमा और सौर मिशनों को ट्रैक करने के लिए, एक नेटवर्क बनाने के लिए काम कर रहा है.

ESA का कहना है कि उसके ग्लोबल डीप स्पेस कम्यूनिकेशन एंटेना, दोनों मिशनों के लिए हर संभव मदद करेंगे. वे अंतरिक्ष यान पर नज़र रखेंगे, महत्वपूर्ण जगहों पर उनकी लोकेशन को पिन प्वाइंट करेंगे, साथ ही कमांड भी देंगे.

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