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New SSLV Launch: भारत के नए रॉकेट की पहली लॉन्चिंग 7 को, जानिए क्यों बनाया इसे ISRO ने

ISRO Small Satellite Launch Vehicle: भारत के नए रॉकेट की लॉन्चिंग सात अगस्त 2022 को हो सकती है. इस नए रॉकेट को ISRO ने बनाया है. जब देश में PSLV, GSLV जैसे शानदार रॉकेट्स मौजूद है फिर इस रॉकेट की जरुरत क्यों पड़ी. आइए जानते हैं कि नए रॉकेट से इसरो को किस तरह का फायदा होने वाला है. क्या इससे लॉन्च की लागत कम हो जाएगी?

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ISRO SSLV on Launchpad: इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्चपैड एक पर खड़ा एसएसएलवी रॉकेट. (फोटोः ट्विटर/गरीबसाइंटिस्ट)
ISRO SSLV on Launchpad: इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्चपैड एक पर खड़ा एसएसएलवी रॉकेट. (फोटोः ट्विटर/गरीबसाइंटिस्ट)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • PSLV रॉकेट लॉन्च से 4-5 गुना सस्ता पड़ेगा
  • छोटे सैटेलाइट्स के बाजार में बढ़ेगा कब्जा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सात अगस्त 2022 को देश का नया रॉकेट लॉन्च करने जा रहा है. लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड एक से की जाएगी. इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट है पीएसएलवी (PSLV). इसके बाद नंबर आता है जीएसएलवी (GSLV) का. फिर एसएसएलवी (SSLV) की जरुरत क्यों आन पड़ी? क्या इस नए रॉकेट के जरिए ISRO कुछ नया करने की तैयारी कर रहा है. आइए जानते हैं इस नए रॉकेट के बारे में...

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क्या है एसएसएलवी (What is SSLV Rocket?)

एसएसएलवी का फुल फॉर्म है स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV). यानी छोटे सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग के लिए अब इस रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. यह एक स्मॉल-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल है. इसके जरिए धरती की निचली कक्षा (Lower Earth Orbit) में 500 किलोग्राम तक के सैटेलाइट्स को निचली कक्षा यानी 500 किलोमीटर से नीचे या फिर 300 किलोग्राम के सैटेलाइट्स को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में भेजा जाएगा. सब सिंक्रोनस ऑर्बिट की ऊंचाई 500 किलोमीटर के ऊपर होती है. 

छोटे सैटेलाइट्स के अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ेगा भारत और ISRO का दबदबा.
छोटे सैटेलाइट्स के अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ेगा भारत और ISRO का दबदबा. 

भविष्य में इसके लिए अलग लॉन्च पैड (Seperate Launch Pad for SSLV in Future)

फिलहाल SSLV को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड एक से छोड़ा जाएगा. लेकिन कुछ समय बाद यहां पर इस रॉकेट की लॉन्चिंग के लिए अलग से स्मॉल सैटेलाइल लॉन्च कॉम्प्लेक्स (SSLC) बना दिया जाएगा. इसके बाद तमिलनाडु के कुलाशेखरापट्नम में नया स्पेस पोर्ट बन रहा है. फिर वहां से एसएसएलवी की लॉन्चिंग होगी. 

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कितना लंबा-चौड़ा है नया SSLV रॉकेट (Size of SSLV Rocket)

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV) की लंबाई 34 मीटर यानी 112 फीट है. इसका व्यास 6.7 फीट है. कुल वजन 120 टन है. यह PSLV रॉकेट से आकार में काफी छोटा है. इसमें चार स्टेज हैं. इसके तीन स्टेज सॉलिड फ्यूल से चलेंगे. बल्कि चौथा स्टेज लिक्विड ईंधन से प्रोपेल होगा. पहला स्टेज 94.3 सेकेंड, दूसरा स्टेज 113.1 सेकेंड और तीसरा स्टेज 106.9 सेकेंड जलेगा. चौथे स्टेज के बारे में इसरो ने जानकारी नहीं दी है. 

इससे 500 किलोग्राम वजन तक के कई मिनी, माइक्रो और छोटे सैटेलाइट्स को धरती की निचली कक्षा में भेजा जा सकता है.
इससे 500 किलोग्राम वजन तक के कई मिनी, माइक्रो और छोटे सैटेलाइट्स को धरती की निचली कक्षा में भेजा जा सकता है. 

क्यों पड़ी SSLV रॉकेट की? (Why SSLV Rocket Needed)

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV) की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि छोटे-छोटे सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए इंतजार करना पड़ता था. उन्हें बड़े सैटेलाइट्स के साथ असेंबल करके एक स्पेसबस तैयार करके उसमें भेजना होता था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटे सैटेलाइट्स काफी ज्यादा मात्रा में आ रहे हैं. उनकी लॉन्चिंग का बाजार बढ़ रहा है. इसलिए ISRO ने इस रॉकेट को बनाने की तैयारी की. 

कितनी लागत आएगी SSLV की एक लॉन्च पर (Cost of SSLV per Unit)

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स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV) रॉकेट के एक यूनिट पर 30 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. जबकि PSLV पर 130 से 200 करोड़ रुपये आता है. यानी जितने में एक पीएसएलवी रॉकेट जाता था. अब उतनी कीमत में चार से पांच SSLV रॉकेट लॉन्च हो पाएंगे. इससे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े जा सकेंगे. 

कौन-कौन से सैटेलाइट्स जा रहे हैं पहले SSLV में (Satellites on First SSLV)

पहली बार सात अगस्त 2022 को लॉन्च हो रहे स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle - SSLV) में EOS02 और AzaadiSAT सैटेलाइट्स जा रहे हैं. EOS02 एक अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट हैं. जो 10 महीने के लिए अंतरिक्ष में काम करेगा. इसका वजन 142 किलोग्राम है. इसमें मिड और लॉन्ग वेवलेंथ इंफ्रारेड कैमरा लगा है. जिसका रेजोल्यूशन 6 मीटर है. यानी ये रात में भी निगरानी कर सकता है. इसके अलावा स्पेसकिड्ज इंडिया नाम की स्पेस एजेंसी का स्टूडेंट सैटेलाइट आजादीसैट लॉन्च किया जा रहा है. 

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