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Earthrise: जापान के मून लैंडर ने क्रैश होने से पहले ली पृथ्वी की शानदार तस्वीर

जापान का हाकुतो-आर लैंडर (Hakuto-R lander) भले ही चंद्रमा पर क्रैश हो गया हो, लेकिन क्रैश होने से पहले उसने ऐसी तस्वीरें भेजीं जो वैज्ञानिकों के बहुत काम आ सकती हैं. 25 अप्रैल को ये लैंडर चंद्रमा की सतह पर क्रैश हो गया था.

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क्रैश होने से पहले जापानी लैंडर ने पृथ्वी की ये खूबसूरत तस्वीर ली थी (Photo: iSpace)
क्रैश होने से पहले जापानी लैंडर ने पृथ्वी की ये खूबसूरत तस्वीर ली थी (Photo: iSpace)

जापानी निजी कंपनी आईस्पेस इंक (ispace inc.) पहली बार चांद की सतह पर अपना लैंडर उतारने जा रही थी, उनका ये मिशन सफल नहीं हो सका. लैंडर क्रैश हो गया. लैंडर का नाम था हाकुतो-आर लूनर लैंडर  (Hakuto-R lunar lander). 

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लेकिन, हाकुतो-आर लून 25 अप्रैल को क्रैश होने से पहलेर लैंडर ने चंद्रमा की सतह से पृथ्वी की काफी शानदार तस्वीरें भेजीं. इस तस्वीर में हमारी पृथ्वी नीले संगमरमर की तरह लग रही है, जो चंद्रमा के क्षितिज के ठीक ऊपर दिख रही है. यह तस्वीर अपोलो 8 (Apollo 8) की शानदार 'अर्थराइज' (Earthrise) तस्वीर की याद दिलाती है. तस्वीर में चंद्रमा की छाया को ऑस्ट्रेलिया के ऊपर से गुजरते हुए देखा जा सकता है, जहां उस समय (20 अप्रैल) पूर्ण सूर्य ग्रहण था.

ispace lander

हकोतो-आर को पिछले साल दिसंबर में, आईस्पेस के मिशन 1 के हिस्से के तौर पर स्पेस एक्स फाल्कन 9 रॉकेट (SpaceX Falcon 9 rocket) से लॉन्च किया गया था. अगर यह मिशन कामयाब होता, तो इतिहास में इसे चंद्रमा पर उतरने वाले पहले कमर्शियल क्राफ्ट के तौर पर जगह मिलती, हालांकि ऐसा नहीं हो सका. 

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हाकुतो-आर ने इस हफ्ते की शुरुआत में आखिरी बार चंद्रमा की सतह पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. चंद्रमा के ऑर्बिट में अपनी कक्षा तक पहुंचने के लिए हाकुतो-आर ने 14 लाख किलोमीटर का सफर तय किया था. लेकिन इस यान ने जैसे ही उतरना शुरू किया, पृथ्वी से इसका संपर्क टूट गया.  कुछ समय बाद मिशन से जुड़े एक्सपर्ट्स ने माना कि हाकुतो-आर उस तरह की लैंडिंग नहीं कर पाया जैसी कि उससे उम्मीद की जा रही थी.  

ispace lander

लैंडर के क्रैश होने के बाद, आईस्पेस के फाउंडर और सीईओ ताकेशी हाकामादा (Takeshi Hakamada) ने स्वीकार किया कि मिशन सफल नहीं हुआ. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मिशन 1 से उन्हें काफी कुछ हासिल हुआ है और वे आगे बढ़ते रहेंगे. बाद में जांच से पता चला कि लैंडिंग के दौरान जब यान की गति धीमी की गई तो प्रोपेलैंट ने काम करना बंद कर दिया था. 

हाकुतो-आर किसी निजी कंपनी का ऐसा पहला मिशन नहीं है जिसकी चंद्रमा पर क्रैश लैंडिंग हुई हो. साल 2019 में इज़राइली कंपनी स्पेसिल (SpaceIL) और इज़राइली एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज का ज्वाइंट वेंचर बेरेशीट प्रोब (Beresheet probe) लैंडिंग के दौरान चंद्रमा की सतह पर फिसल गया था. अब तक, केवल अमेरिका, रूस और चीन की सरकारी एजेंसियों के लैंडर ही चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग पूरी करने में सफल रहे हैं.

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क्रैश लैंडिंग को छोड़ दिया जाए तो हाकुतो-आर ने काफी शानदार काम किया है. इसने कुछ ऐसी तस्वीरें भी ली हैं जिससे काफी काम की जानकारी मिलने की उम्मीद है. इस साल के आखिर में भारत, रूस और स्पेसएक्स भी अपने मून मिशन लांच करने वाले हैं. इनके अलावा, आईस्पेस भी साल 2024 और 2025 में अपने दो और नए मून मिशन प्लान कर रहा है. 

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