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जटायु खोजेगा प्रदूषण का रावण, चेन्नई की स्पेस कंपनी लगी प्रयोग में

चेन्नई की स्पेस कंपनी ने प्रदूषण का स्तर मापने के लिए हाल ही में गुब्बारे में एक यंत्र बांधकर ऊपरी वायुमंडल में भेजा. इस यंत्र का नाम है जटायु (Jatayu). जटायु को हाई-एल्टीट्यूड बैलून में बांधकर स्पेस की तरफ रवाना किया गया था. 4 नवंबर और 5 नवंबर को दो बार जटायु को ऊपरी वायुमंडल में भेजा गया. जटायु को वायुमंडल भेजने वाली कंपनी का नाम है स्पेसकिड्ज इंडिया (SpaceKidz India).

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वायुमंडल की तरफ जटायु को लेकर जाता गुब्बारा. (फोटोः स्पेसकिड्ज इंडिया)
वायुमंडल की तरफ जटायु को लेकर जाता गुब्बारा. (फोटोः स्पेसकिड्ज इंडिया)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2 किलोग्राम का है जटायु लेकिन काम बड़े-बड़े.
  • 1200 ग्राम का गुब्बारा लेकर जाता है वायुमंडल में.
  • रियल टाइम Air Pollution नापने का सटीक तरीका.

चेन्नई की स्पेस कंपनी ने प्रदूषण का स्तर मापने के लिए हाल ही में गुब्बारे में एक यंत्र बांधकर ऊपरी वायुमंडल में भेजा. इस यंत्र का नाम है जटायु (Jatayu). जटायु को हाई-एल्टीट्यूड बैलून में बांधकर स्पेस की तरफ रवाना किया गया था. दिवाली की रात और उसके अगले दिन यानी 4 नवंबर और 5 नवंबर. दो बार जटायु को ऊपरी वायुमंडल में भेजा गया. जटायु को वायुमंडल की सैर कराने वाली कंपनी का नाम है स्पेसकिड्ज इंडिया (SpaceKidz India). 

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स्पेसकिड्ज इंडिया (SpaceKidz India) वहीं कंपनी है जिसने फरवरी 2021 को सतीश धवन नैनो सैटेलाइट भेजा था. जिसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी थी. यह कंपनी इसरो (ISRO) की मदद से अब तक दो सैटेलाइट धरती की कक्षा में पहुंचा चुकी है. लेकिन जटायु (Jatayu) धरती की कक्षा में नहीं जाता. वह सिर्फ ऊपरी वायुमंडल तक जाकर वायु प्रदूषण (Air Pollution) की जांच करता है.

जटायु के साथ डॉ. श्रीमती केसन और स्पेसकिड्ज इंडिया की टीम. (फोटोः स्पेसकिड्ज इंडिया)
जटायु के साथ डॉ. श्रीमती केसन और स्पेसकिड्ज इंडिया की टीम. (फोटोः स्पेसकिड्ज इंडिया)

बाकी राज्य अनुमति दें तो हम वहां भी परीक्षण कर सकते हैंः डॉ. केसन

कंपनी की सीईओ डॉ. श्रीमती केसन ने बताया कि जटायु (Jatayu) को 1 दिसंबर और 31 दिसंबर को फिर लॉन्च किया जाएगा. इसके बाद दिवाली की रात, उसके बाद की रात, 1 दिसंबर और 31 दिसंबर की रात के डेटा का विश्लेषण करके वायु गुणवत्ता की जांच की जाएगी. aajtak.in से खास बातचीत में डॉ. केसन ने बताया कि हम अभी यह प्रयोग चेन्नई में कर रहे हैं. अगर हमें दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश की सरकार प्रयोग करने की अनुमति दे तो हम वहां भी प्रदूषण के स्तरों की जांच के लिए जटायु (Jatayu) को लॉन्च कर सकते हैं. 

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चार लॉन्चिंग के बाद हर एक के डेटा का एनालिसिस होगा

डॉ. केसन ने बताया कि इससे यह पता चलेगा कि उस जगह पर किस ऊंचाई तक प्रदूषण की चादर है. किस तरह का प्रदूषण है. ये कैसे कम हो सकता है. एक बार डेटा हासिल होने के बाद हम उसका विश्लेषण करते हैं. उसके बाद हम इसे शोधकर्ताओं और स्टूडेंट्स को दे सकते हैं. दिवाली की रात हमने एक गुब्बारे में बांधकर जटायु (Jatayu) को 1.33 लाख फीट की ऊंचाई तक पहुंचाया था. इतनी ऊपर जाने के बाद गुब्बारा फट गया. लेकिन जटायु पैराशूट के जरिए सुरक्षित लौट आया. 

लैंडिंग के बाद अपने पैराशूट में लिपटा जटायु. (फोटोः स्पेसकिड्ज इंडिया)
लैंडिंग के बाद अपने पैराशूट में लिपटा जटायु. (फोटोः स्पेसकिड्ज इंडिया)

डॉ. केसन ने कहा कि हम जल्द ही दो और लॉन्च करते लेकिन दक्षिण भारत में हुई बारिश की वजह से इस प्लान को आगे टालना पड़ा. नवंबर के शुरुआत की तुलना में वायुमंडल साफ हो गया. हवा भी साफ हो गई. इसलिए अब बाकी के दो लॉन्च की तारीख 1 और 31 दिसंबर तय की गई है. जटायु (Jatayu) को स्पेस में ले जाने वाले गुब्बारे का वजन 1200 ग्राम है. इसका रंग सफेद या क्रीम रखा जाता है, ताकि ये दूर तक दिखाई दे. 

आसान नहीं है जटायु (Jatayu) का काम

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जटायु (Jatayu) का वजन मात्र 2 किलोग्राम है. इसमें तापमान नापने के लिए सेंसर्स, ह्यूमेडिटी सेंसर, एयर क्वालिट सेंसर, जीपीएस रेडियो सोंडे और एक ट्रैकिंग डिवाइस लगा है. जीपीएस रेडियो सोंडे ऊपरी वायुमंडल में जाकर सक्रिय होता है और वह वहां पर वायुमंडली हवा की गति और दिशा का पता लगाता है. ट्रैकिंग डिवाइस जटायु (Jatayu) की लैंडिंग के बाद उसे खोजने में मदद करता है. 

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