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बृहस्पति पर मिला विशालकाय तूफान... धरती को निगलने की ताकत, उगल रहा हरी रोशनी

बृहस्पति ग्रह पर एक नया तूफान आया है. हमारी पृथ्वी से कई गुना चौड़ा तूफान. इस तूफान से हरे रंग की रोशनी निकल रही है. गैस से भरे इस ग्रह पर नया तूफान देखकर वैज्ञानिक हैरान हैं. असल हैरानी हरे रंग की रोशनी देखकर है. वहां हरे रंग की बिजली कड़क रही है.

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इस तस्वीर में लाल घेरे में दिख रही है हरी रोशनी, जो विशालकाय घुमावदार तूफान के एक हिस्से में पैदा हो रही है. (फोटोः NASA)
इस तस्वीर में लाल घेरे में दिख रही है हरी रोशनी, जो विशालकाय घुमावदार तूफान के एक हिस्से में पैदा हो रही है. (फोटोः NASA)

ज्यूपिटर यानी बृहस्पति ग्रह पर एक भयानक सफेद रंग का तूफान उठा है. जिसकी चौड़ाई हमारी धरती से ज्यादा है. ये तूफान बृहस्पति के विशालकाय लाल-भूरे रंग की बेल्ट पर आया है. यह तूफान एक तरफा नहीं है. बल्कि ये घुमावदार है. जैसे धरती पर चक्रवाती तूफान आता है. ठीक वैसा ही. इसमें से हरे रंग की बिजली कड़क रही है. 

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बृहस्पति ग्रह पर गैसों के बादलों का जमावड़ा है. इनकी वजह से बृहस्पति ग्रह के बाहरी वायुमंडल का रंग हमेशा बदलता रहता है. कोई भी वस्तु एक जगह पर ठीक वैसे ही नहीं रहती, जैसी कुछ दिनों पहले दिख रही होती है. एस्ट्रोफोटोग्राफर माइकर कार्रेर ने बृहस्पति के तूफान की फोटो कैप्चर की. तभी उन्हें हरे रंग की रोशनी दिखी. 

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इनकी तस्वीरों में दो बड़े-बड़े सफेद धब्बे आगे-पीछे चलते दिख रहे हैं. ये बृहस्पति ग्रह के दक्षिणी इक्वेटोरियल बेल्ट के पास है. ये भूरे रंग की बेल्ट पर मौजूद है. ब्रिटिश एस्ट्रोनॉमिकल एसोसिएशन के एस्ट्रोनॉमर जॉन रॉजर्स ने कहा कि ये दोनों सफेद धब्बे असल में दो विशालकाय तूफान हैं. इससे पहले ऐसे तूफान 2016-17 में दिखे थे. 

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Jupiter Thunderstorm Green Lightning
ये लाल घेरे में है वो तूफान जिसे माइकल कार्रेर ने कैप्चर किया. जूम करने पर उन्हें हरे रंग की रोशनी दिखी. 

इतना बड़ा तूफान की पूरी पृथ्वी को निगल ले

संभावना है कि ये तूफान बेहद विशालकाय हो क्योंकि अभी तक इसका आकार नहीं नापा गया है. लेकिन इतना जरूर है कि ये तूफान आराम से पूरी पृथ्वी को निगल सकता है. इसके बावजूद उसमें जगह बच जाएगी. यह तूफान बहुत लंबे समय तक नहीं रहेगा. जैसा बृहस्पति पर मौजूद विशालकाय रेड जायंट है. ये टूट जाएगा. 

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जानिए हरे रंग की रोशनी का राज... 

जहां तक बात रही हरे रंग की रोशनी की तो जॉन रॉजर्स कहते हैं कि ये रोशनी अलग-अलग केमिकल और गैसों वाले बादलों टकराने से बन सकती है. इससे पहले भी यहां अलग-अलग रंग की बिजलियां देखी गई हैं. इसी बेल्ट पर एक तूफान 1973 में आया था, जो 1991 में खत्म हुआ था. इसके बाद वैसा तूफान 2010 में कुछ समय के लिए आया. इससे बेल्ट के रंग में थोड़ा बदलाव आता है. लेकिन ज्यादा समय के लिए नहीं. 

धरती की बिजली नीली क्यों दिखती है?

जब बृहस्पति के वायुमंडल गैसों के बादल टकराते, रगड़ते या घूमते हैं तो इस तरह की बिजलियां पैदा होती हैं. धरती पर बिजली कड़कती है तो उसमें नीले रंग का प्रभाव ज्यादा होता है. क्योंकि धरती पर पानी की बूंदें मौजूद होती हैं. लेकिन ज्यूपिटर पर बिजलियां हरे रंग में कड़कती हैं. क्योंकि वायुमंडल में अमोनिया ज्यादा है. 

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