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मछलियों में भी सरोगेसी, दूसरी मछलियों के अंडों को अपने मुंह में रखकर पालती है ये नर मछली

क्या आप जानते हैं कि मछलियों की ऐसी कई प्रजातियां हैं, जिनमें नर मछलियां अंडो को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अपने मुंह में रख लेती हैं. जानते हैं मछलियों की इन प्रजातियों के बारे में.

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हफ्तों तक मुंह में अंडो को सेती हैं ये नर मछलियां (Photo: Getty)
हफ्तों तक मुंह में अंडो को सेती हैं ये नर मछलियां (Photo: Getty)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हफ्तों तक बिना खाए रहती हैं नर मछलियां
  • अपने ही नहीं औरों के अंडों को भी मुंह में सेती हैं

मां की ममता पर बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन पिता के समर्पण को भी नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता. फिर चाहे, वे इंसान हों, या जानवर. आज बात करेंगे मछलियों की उन प्रजातियों की, जिनमें नर मछली पेरेंटिंग (Parenting) और समर्पण की अनोखी मिसाल पेश कर रही हैं. 

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जब मछलियां अंडे देती हैं, तो नर मछली उन अंडों को अपने मुंह में सुरक्षित रख लेती हैं, और मुंह में ही उन अंडो को सेती (Hatching) हैं. ज़ाहिर तौर पर, जब तक मुंह में अंडे रहेंगे, ये मछलियां कुछ खा भी नहीं सकतीं. कई हफ्तों तक ये बिना खाए रहती हैं, ताकि अंडे सुरक्षित रहें. इस प्रक्रिया को माउथब्रूडिंग (Mouthbrooding) कहा जाता है.
 
आपको यह जानकर और आश्चर्य होगा कि ये नर मछलियां सिर्फ अपने ही अंडो के लिए इतना कुछ नहीं करतीं, बल्कि और मछलियों के अंडों को भी इसी तरह अपने मुंह में सुरक्षित रखती हैं. जैसे इंसानों में सरोगेसी के माध्यम से किसी दूसरे के बच्चे को अपनी कोख में रखा जाता है, उसी तरह नर मछली भी औरों के अंडो को मछलियां बनने तक अपने मुंह में सेती हैं. वे ऐसा क्यों करती हैं, इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है. 

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male fish hatch eggs in mouth
अपने ही नहीं औरों के अंडों को भी रखती हैं सुरक्षित (Photo: Getty)

जो जानवर आक्रामक नहीं होते, उनके लिए अपने अंडो या बच्चों को बचाना थोड़ा मुश्किल होता है, खासकर पानी में. अंडों को कोई खा न ले, इसीलिए मछलियों की कई प्रजातियों ने माउथब्रूडिंग शुरू की. ऐसा इसलिए, क्योंकि इस जगह किसी शिकारी की नजर नहीं पड़ती.

चार्ल्स डार्विन यूनिवर्सिटी (Charles Darwin University) के शोधकर्ताओं ने उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली दो मछलियों में माउथब्रूडिंग की प्रक्रिया का पता लगाया. अंडे की सुरक्षा करने वाली ये दो मछलियां हैं- नर नेओरियस ग्रेफी (Neoarius graeffei) और ग्लोसामिया एप्रियन (Glossamia aprion). इस शोध के नतीजों को बायोलॉजी लेटर्स (Biology Letters) में प्रकाशित किया गया है. 

शोध की लेखक, पीएचडी छात्र जेनाइन एबेशिया (Janine Abecia) का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह नर मछलियों का मादा मछलियों को इंप्रेस करने का तरीका है. इससे उन्हें मेटिंग के ज़्यादा मौके मिलते हैं. 

 

ये दोनों मछलियां कीचड़ भरी नदियों में रहती हैं, जिससे उनके व्यवहार का अध्ययन करना थोड़ा मुश्किल है. इसलिए जो भी नतीजे मिल हैं वे एक्वैरियम (aquarium) से आए हैं. शोधकर्ताओं ने हर प्रजाति के सैकड़ों सदस्यों का परीक्षण किया, ताकि इस बात का पता चल सके कि जिन अंडे की देखभाल ब्रूडर करते हैं, वे उन्हीं की संतान हैं या नहीं.

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शोध के नतीजों से पता चला कि नेओरियस ग्रेफी मछली अपने ही बच्चों की देखभाल करती है. जबकि, ग्लोसामिया एप्रियन जिसका सामान्य नाम माउथ ऑलमाइटी (Mouth Almighty) है, वह अक्सर अपने अलावा दूसरों के बच्चों की भी देखभाल करती है. माउथ ऑलमाइटी के अंडों को सेने में 4-5 सप्ताह लगते हैं. कुछ मामलों में, नर मछली अलग-अलग पेरेंट के अंडों को एक साथ मुंह में रखती है.  

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