मास्टरबेट करना एक सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन स्विट्जरलैंड के डॉक्टरों के सामने एक विचित्र मामला आया. एक व्यक्ति ने चरमसुख पाने के लिए मास्टरबेट किया, लेकिन ऐसा करते समय उसका एक फेफड़ा फट गया और चेहरा सूज गया. इसके बाद 20 साल के युवक को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. सीने में तेज दर्द था. उसे तत्काल इमरजेंसी में एडमिट किया गया. जैसे-जैसे वह सांस ले रहा था, उसके निचले जबड़े, गर्दन और छाती के नीचे और उसकी दोनों कोहनियों से चटखने की तेज़ आवाज़ें आ रही थीं.
Center for Intensive Care के डॉक्टर निकोला रैजिक ने अपनी रेडियोलॉजी केस रिपोर्ट में कहा है कि लड़के को ICU में ले जाया गया. उसे ऑक्सीजन दी गई. उसे दर्द से राहत मिली. सीटी स्कैन करने पर पता चला कि यह Profound Pneumomediastinum का मामला था. यानी छाती और फेफड़ों के बीच हवा आ गई थी. हवा शरीर में कहीं भी अपना रास्ता बना सकती है. ऐसा होने पर छाती, बाहों और गर्दन पर त्वचा के नीचे हवा के बुलबुले महसूस होते हैं.
फेफड़ों के चारों तरफ कैविटी में बना था दबाव
यह स्थिति फेफड़ों में आघात (Trauma) की वजह से हो सकती है. ऐसे फेफड़ों के चारों तरफ मौजूद कैविटी यानी ढांचे में दबाव बढ़ने से हो सकता है. इस कैविटी को Pleural Cavity कहते हैं जो दो झिल्लियों के बीच की जगह होती है, यह फेफड़े को घेरे रहती है. इसे सहज न्यूमोमेडियास्टिनम (Spontaneous Pneumomediastinum) कहते हैं.
Man Masturbated So Hard He Tore A Lung And Required Intensive Hospital Carehttps://t.co/mHSWGjJHLS pic.twitter.com/4J1bAFAmgs
— IFLScience (@IFLScience) April 18, 2022
डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक दुर्लभ स्थिति है. आमतौर पर युवाओं को उनके दूसरे दशक में होती है. यह तेज अस्थमा, ज़्यादा व्यायाम, ज़्यादा उल्टी या खांसी की वजह से हो सकती है. हालांकि युवक को ऐसी कोई परेशानी नहीं थी जो इस स्थिति का कारण बनती. तो वजह जानने के लिए उस समय के बारे में जानना था जब ये समस्या हुई.
यौन गतिविधि से जुड़ी यह समस्या कम होती है
डॉक्टरों के मुताबिक, 'युवक जब बेड पर मास्टरबेट कर रहा था, तो उसे अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और सांस लेने में तकलीफ होने लगी.' डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें यौन गतिविधि से जुड़ी न्यूमोमेडियास्टिनम की बेहद कम रिपोर्ट मिली हैं. गंभीर या जटिल मामलों को छोड़कर यह स्थिति खुद ब खुद ठीक हो सकती है. युवक को कुछ दिन अस्पताल में रखकर मॉनिटर किया गया. धीरे-धीरे उसकी परेशानी खत्म हो गई और एक सप्ताह में ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.