सूरज में बहुत बड़ा विस्फोट हुआ है. यह धमाका एक सनस्पॉट में हुआ. जिसकी वजह से इस वीकेंड पर भयानक सौर तूफान आया. सूरज में अब भी धमाका हो रहा है. वैज्ञानिक हैरान-परेशान हैं, क्योंकि ये सौर तूफान पिछले 20 वर्षों का सबसे खतरनाक तूफान है.
NOAA स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर के मुताबिक 10 मई 2024 को सूरज में एक एक्टिव धब्बा दिखा. इसे AR3664 नाम दिया गया. फिर इसमें तेज विस्फोट हुआ. सूरज की एक लहर धरती की ओर तेजी से बढ़ी. यह X5.8 क्लास की सौर लहर थी. इसे काफी खतरनाक लहर माना जाता है.
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इस तीव्र सौर लहर की वजह से सूरज की तरफ वाले धरती के हिस्से में हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो सिग्नल खत्म हो गए थे. वैज्ञानिकों को आशंका है कि सूरज अभी शांत नहीं हुआ है. अभी यह X1.5 तीव्रता का सौर लहर फेंकेगा. यह एक्स क्लास की सबसे ज्यादा खतरनाक सौर लहर होती है. इसका असर कुछ मिनट से कुछ घंटे तक रह सकता है.
जो धब्बा बना है वो पृथ्वी से 17 गुना ज्यादा चौड़ा
इस समय सूरज पर जिस जगह बड़ा सनस्पॉट बना है, वो धरती की चौड़ाई से 17 गुना ज्यादा है. सूरज की तीव्र सौर लहरों की वजह से धरती के उत्तरी ध्रुव वाले इलाके में वायुमंडल सुपरचार्ज हो गया. जिससे पूरे उत्तरी गोलार्ध पर कई जगहों पर नॉर्दन लाइट्स देखने को मिलीं. आसमान में अलग-अलग रंगों की रोशनी तैरती हुई दिखाई दी. ये लहरें उत्तरी ध्रुव से लंदन तक दिखाई दीं. जो कि एक दुर्लभ घटना है.
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कितने प्रकार की होती हैं अरोरा लाइट्स?
गुलाबी रोशनी... ये अरोरा लाइट्स धरती से करीब 241.4 किलोमीटर की ऊंचाई पर दिखती है. ये तभी दिखती हैं जब तीव्र सौर लहर आती है. इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है.
हरी रोशनी... ये अरोरा लाइट्स भी 241.4 किलोमीटर की ऊंचाई पर दिखती हैं. लेकिन यहां पर हरा रंग ऑक्सीजन की ज्यादा मात्रा की वजह दिखता है. इसे एक्साइटेड एटॉमिक ऑक्सीजन एट लोअर एल्टीट्यूड कहते हैं.
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नीली रोशनी... इसमें दो तरह का नीला होता है. हल्का और गाढ़ा. दोनों की ऊंचाई 96.6 किलोमीटर के आसपास होती है. यहां पर आयोनाइज्ड मॉलीक्यूलर नाइट्रोजन दिखता है. यहां पर एटॉमिक ऑक्सीजन कम मिलता है. लेकिन नाइट्रोजन की मात्रा की वजह से रंग नीला हो जाता है.
क्या होते हैं सौर तूफान के क्लास?
इन दिनों सूरज काफी सक्रिय है. इससे जियोमैग्रेटिक तूफान आ रहे हैं. जिसे वैज्ञानिक भाषा में (M class) एम-क्लास और (X class) एक्स-क्लास के फ्लेयर्स यानी सौर लहर बोलते हैं. सूरज अगले 8 सालों तक इतना ही सक्रिय रहेगा. इस वजह से सौर तूफानों के आने की आशंका बनी रहेगी.
लाखों km/hr की गति से आता सौर तूफान
सूरज पर बने धब्बे से कोरोनल मास इजेक्शन होता है. यानी सूर्य की सतह पर एक तरह का विस्फोट. इससे अंतरिक्ष में कई लाख किलोमीटर प्रति घंटे की गति से एक अरब टन आवेषित कण (Charged Particles) फैलते हैं. ये कण जब धरती से टकराते हैं तब कई सैटेलाइट नेटवर्क, जीपीएस सिस्टम, सैटेलाइट टीवी और रेडियो संचार को बाधित करते हैं.
क्या होते हैं सूरज के धब्बे... कैसे बनते हैं ये?
जब सूरज के किसी हिस्से में दूसरे हिस्से की तुलना में गर्मी कम होती है, तब वहां पर धब्बे बन जाते हैं. ये दूर से छोटे-बड़े काले और भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं. एक धब्बा कुछ घंटों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकता है. धब्बों अंदर के अधिक काले भाग को अम्ब्रा (Umbra) और कम काले वाले बाहरी हिस्से को पेन अम्ब्रा (Pen Umbra) कहते हैं.
नासा ने इसके लिए क्या किया?
आमतौर पर, सीएमई ज्यादा हानिकारक नहीं होते हैं. लेकिन नासा (NASA) हर समय सूर्य की निगरानी करता हैं. इसके अतिरिक्त, नासा का पार्कर सोलर प्रोब मिशन समय-समय पर सूर्य का चक्कर लगाते हुए उसकी सेहत की जानकारी देता रहता है. साथ ही सूर्य द्वारा बनाए गए धब्बों और अंतरिक्ष मौसम को बेहतर ढंग से समझ सकें.