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बिल्ली पालने वाले पुरुष ध्यान दें, ये खतरनाक हो सकता है!

बहुत से लोगों को जानवारों से बहुत प्यार होता है. लोग कुत्ते और बिल्लियों को पालते भी हैं. लेकिन हालिया शोध से पता चला है कि जिन पुरुषों ने अपने बचपन में बिल्लियां पाली थीं, उन्हें आगे चलकर इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़े थे.

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बचपन में बिल्ली पालना, आगे चलकर परेशान कर सकता है (फोटो: unsplash)
बचपन में बिल्ली पालना, आगे चलकर परेशान कर सकता है (फोटो: unsplash)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिल्लियों में एक सामान्य परजीवी पाया जाता है
  • यह परिजीवी पुरुषों में ट्रांसमिट हो जाता है

एनिमल लवर्स (Animal Lovers) कहते हैं कि घर में जानवरों को पालना सुखद तो है ही, इससे वे स्ट्रेस फ्री रहते हैं. लेकिन बिल्लियों के मामले में एक नए शोध से मिले नतीजे कुछ लोगों का दिल तोड़ सकते हैं. 

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बिल्ली पालने से, आगे जाकर मानसिक परेशानियों (psychotic episode) का खतरा बढ़ सकता है. खास बात यह है कि ऐसा सिर्फ पुरुषों के साथ है. हाल ही में हुए एक शोध से पता चलता है कि एक पैरासाइट की वजह से आगे जाकर मानसिक बीमारी होने की संभावना होती है. बिल्लियों में टोक्सोप्लाज़मोसिज़ गोंडी (Toxoplasmosis gondii) नाम का एक सामान्य परजीवी (Parasite) पाया जाता है. यह बिल्ली के मल (poop) के संपर्क में आने वाले पुरुषों में ट्रांसमिट हो सकता है.

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पुरुषों को सावधान रहने की ज़रूरतत (फोटो: Unsplash)

टी. गोंडी और मनोविकृति (Psychosis) के बीच के संबंध पर दशकों से बहस हो रही है. कुछ अध्ययनों में इस पैरासाइट से संक्रमित लोगों को सिज़ोफ्रेनिया (schizophrenia) होने की बात भी कही गई है. कभी-कभी कच्चे मांस या दूषित पानी में मौजूद यह छोटा प्रोटोजोआ सभी गर्म रक्त वाले जानवरों (warm-blooded animals) को संक्रमित कर सकता है और यह मनुष्यों में बहुत प्रचलित है.

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ज्यादातर संक्रमित व्यक्तियों में ऐसे कोई लक्षण नहीं दिखते और वे तो यह भी नहीं जानते कि उनमें कोई पैरासाइट मौजूद भी है. जबकि, कुछ लोगों में मध्यम से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. जैसे, बुखार या सांस लेने में तकलीफ. पिछले अध्ययनों से यह भी पता चला है कि जो बच्चे घर में बिल्ली के साथ बड़े होते हैं, उनमें बड़े होने पर मानसिक विकार होने की संभावना ज़्यादा होती है.

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बचपन में बिल्ली पालना, आगे चलकर परेशानी दे सकता है (फोटो: Unsplash)

यह नई स्टडी जर्नल ऑफ साइकियाट्रिक रिसर्च (Journal of Psychiatric Research) में प्रकाशित की गई है. इसमें मॉन्ट्रियल शहर के 2,206 वयस्कों से बातचीत की गई, जिन्होंने बचपन में बिल्लियां पाली थीं. इसके साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी बात की गई. शोध में हिस्सा लेने वालों से मनोविकृति के बाकी रिस्क फैक्टर्स के बारे में भी पूछा गया, जैसे- सिर का आघात, धूम्रपान, और एक बच्चे के रूप में वे कितनी बार घर छोड़कर गए.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, बचपन में बिल्ली पालना बड़े होने पर मनोविकृति से जुड़ा था, लेकिन केवल कुछ ही फैक्टर्स की वजह से. खासकर मनोविकृति का खतरा उन पुरुषों में ज्यादा दिखा जिनके पास बचपन में बाहरी बिल्लियां थीं. लेकिन महिलाओं और ऐसे वयस्कों में ऐसा कोई लिंक नहीं मिला, जिनके पास बचनपन में घरेलू बिल्लियां या हाउसकैट्स थीं. 

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शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि अकेले बिल्ली पालने से मनोविकृति का खतरा नहीं बढ़ सकता. यह संभावना उनमें सबसे ज्यादा दिखी जिन्हें हेड ट्रॉमा था, जो बचपन में कई बार घर से चले गए थे और जिन्हेंने जंगली बिल्लियां पाली थीं. इसके साथ ही, शोधकर्ता यह समझाने में अससफल रहे हैं कि इससे सिर्फ पुरुष ही क्यों प्रभावित होते हैं.

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