1969 में, नासा (NASA) के अपोलो मिशन ने चंद्रमा पर रिफ्लेक्टिव पैनल इंस्टाल किए थे. इनसे पता चला है कि चंद्रमा हर साल पृथ्वी से 3.8 सेमी (1.5 इंच) दूर जा रहा है. आपको बता दें कि चंद्रमा करीब 450 करोड़ साल पहले बना था, लेकिन 150 करोड़ साल पहले पृथ्वी और चंद्रमा के बीच टक्कर हुई थी. इस टक्कर के बाद से ही चंद्रमा धीरे-धीरे पृथ्वी से दूर जा रहा है.
वैज्ञानिकों ने हाल ही में घटते हुए चंद्रमा के प्राचीन रहस्य खोलने के लिए एक जगह खोजी है. यह जगह चांद पर नहीं, बल्कि पृथ्वी पर ही है. वैज्ञानिक प्राचीन चट्टान की परतों से चांद को समझने की कोशिश कर रहे हैं. चांद असल में पृथ्वी का ही तो अंश है.
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में खूबसूरत करिजिनी नेशनल पार्क (Karijini National Park) में, 250 करोड़ साल पुरानी लयबद्ध तलछट चट्टानें हैं. ये तलछट लोहे की संरचनाएं हैं, इनमें लोहे और सिलिका युक्त खनिजों की परतें हैं, जो कभी समुद्र तल पर जमा थीं और अब पृथ्वी के क्रस्ट के सबसे पुराने हिस्से में पाई जाती हैं.
जोफ्रे फॉल्स (Joffre Falls) में क्लिफ एक्सपोजर दिखाता है कि लाल-भूरे रंग के लोहे के गठानों की परतें साफ तौर पर देखी जा सकती हैं. यहां गहरे रंग के अंतराल भी दिखाई देते हैं, जो असल में नरम तरह की चट्टान से बने होते हैं जो आसानी से कट सकते हैं. चट्टान की सतहें, लगातार पानी बहने की वजह पॉलिश की हुई लगती हैं. इनमें सफेद, लाल और नीले-भूरे रंग की परतों का एक पैटर्न नजर आता है.
1972 में, ऑस्ट्रेलियाई भूविज्ञानी ए.एफ. ट्रेंडल ने इन प्राचीन चट्टान की परतों में दिखाई देने वाले पैटर्न के बारे में कहा था कि ये पैटर्न 'मिलांकोविच चक्र'(Milankovitch cycles) से प्रेरित, जो जलवायु में हुए बदलावों से जुड़े हो सकते हैं. फिलहाल, मिलनकोविच साइकल हर 4 लाख साल, 1 लाख, 41 हजार और 21 हजार साल में बदलती हैं. मिलनकोविच साइकल से होने वाले बदलावों को ज्यादा ठंडे, गीले या शुष्क जलवायु परिस्थितियों के तैर पर देखा जा सकता है.
पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी सीधे मिलनकोविच साइकल में से एक की फ्रीक्वेंसी से जुड़ी है और यह है क्लाइमेटिक प्रीसेशन साइकल. ऑस्ट्रेलियाई चट्टानों में अलग अलग साइकल बेहतर तरीके से दिखाई देती हैं. इसका अध्ययन करने पर पाया गया कि चट्टानों में देखे गए 11,000 साइकल शायद क्लाइमैटिक प्रीसेशन साइकल से जुड़ी हैं, जिसकी अवधि अभी 21,000 साल की तुलना में बहुत कम है. इस संकेत का इस्तेमाल 246 करोड़ साल पहले, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का पता लगाने के लिए किया गया. नतीजों में पाया गया कि तब चंद्रमा, पृथ्वी से 60,000 किलोमीटर करीब था. तब दिन अभी की तुलना में छोटा था, 24 घंटों के बजाय करीब 17 घंटे.
पर क्या हो अगर चांद पृथ्वी से दूर चला जाए
ये सोचना थोड़ा काल्पनिक हो सकता है कि चांद पृथ्वी से दूर चला जाएगा. लेकिन यह सच है. अगर चांद पृथ्वी से दूर चला गया, तो चांद से जुड़े सभी त्योहार खत्म हो जाएंगे. चंद्र ग्रहण भी नहीं होगा क्योंकि चांद इतना छोटा होगा कि सूरज को ढक ही नहीं पाएगा.
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (NASA's Goddard Space Flight Center) के लूनर साइंटिस्ट रिचर्ड वोंड्रक (Richard Vondrak) ने 2017 में कहा था कि समय के साथ, पूर्ण सूर्य ग्रहण की संख्या और आवृत्ति कम हो जाएगी. अब से करीब 60 करोड़ साल बाद, पृथ्वी से पूर्ण सूर्य ग्रहण आखिरी बार दिखेगा.
चांद की चमक उसे सूर्य की रोशनी से मिलती है. चांद दूर हो गया तो रात और अंधेरी हो जाएंगी. चांद के दूर जाते ही समुद्री की लहरें भी खत्म हो जाएंगी या उनकी ऊंचाई कम हो जाएगी. इससे धरती के दिन और रात के समय में भी बदलाव आएगा और इसी वजह से मौसम में तेजी से बदलाव होंगे.