फ्लोरिडा के तट से थोड़ी दूर अटलांटिक महासागर में गोताखोर कुछ खोज रहे थे. लेकिन उन्हें तभी ऐसी चीज मिली, जिसने अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास का सबसे दुखद पल याद दिला दिया. गोताखोर द्वितीय विश्व युद्ध में मार गिराए गए फाइटर जेट्स के अवशेष खोजने के लिए समुद्र के अंदर गए थे. लेकिन उन्हें जो मिला वो हैरान करने वाला था. यह एक बेहद आधुनिक दिखने वाला धातु का टुकड़ा था. जब उसकी जांच की तो पता चला कि 20 फीट लंबा यह टुकड़ा 28 जनवरी 1986 को उड़ान भरने के 73 सेकेंड बाद फट जाने वाले स्पेस शटल चैलेंजर का हिस्सा है.
गोताखोरों ने जब यह जानकारी नासा को दी तो वो हैरान रह गए. इसके बाद नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने कहा कि इस खोज ने हमें एक बार थोड़ा रुकने का मौका दिया है. अपने सात बेहतरीन एस्ट्रोनॉट्स को याद करने का. उनकी लीगेसी को आगे बढ़ाने का. इस हादसे ने नासा को पूरी तरह बदल दिया. हमने कई तरह के बदलाव किए.
असल में ये गोताखोर हिस्ट्री चैनल की डॉक्यूमेंट्री 'द बरमूडा ट्राएंगल: इंटू कर्स्ड वाटर्स' के लिए अटलांटिक महासागर में गायब हुए विमानों और जहाजों को खोज रहे थे. वो पीबीएम मार्टिन मरीनर रेसक्यू प्लेन की खोज में थे. जो 5 दिसंबर 1945 को बिना किसी जानकारी के लापता हो गया था. यह समय द्वितीय विश्व युद्ध का था. इसके अलावा ये अमेरिका के पांच टॉरपीडो बॉम्बर्स को भी खोज रहे थे. जो उसी दिन गायब हुए थे.
What they uncover off the coast of Florida, outside of the Triangle, marks the first discovery of wreckage from the 1986 Space Shuttle Challenger in more than 25 years. Don’t miss the premiere of The Bermuda Triangle: Into Cursed Waters on Tuesday, November 22 at 10/9C. pic.twitter.com/LWUoFXxEnK
— HISTORY (@HISTORY) November 10, 2022
बाहर निकाला जाएगा चैलेंजर का टुकड़ा
घटना को 36 साल हो गए हैं. लेकिन चैलेंजर की खोज 25 साल पहले बंद कर दी गई थी. इतने सालों बाद इस अंतरिक्षयान का टुकड़ा मिलना किसी हैरानी से कम नहीं है. बिल नेल्सन ने कहा कि हम उस टुकड़े को समुद्र से बाहर निकालकर म्यूजियम में लगाने की कोशिश कर रहे हैं. ताकि हमनें जिन बहादुर और शानदार एस्ट्रोनॉट्स को खो दिया है. उन्हें और उनके परिवारों को श्रद्धांजलि दे सकें.
कब और कैसे हुए था चैलेंजर हादसा
28 जनवरी 1986 को फ्लोरिडा स्थित केप केनवरल से चैलेंजर स्पेस शटल ने उड़ान भरी. सिर्फ 73 सेकेंड्स बीते थे. आसमान में तेज धमाका हुआ. इसमें बैठे सातों एस्ट्रोनॉट्स हवा में ही खत्म हो गए. अमेरिका के अंतरिक्ष उड़ान की पहली ऐसी घटना थी. जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था. यह स्पेस शटल प्रोग्राम की 25वीं उड़ान थी. इससे पहले 24 सफल उड़ानें पूरी हो चुकी थीं.
इन सात एस्ट्रोनॉट्स की मौत हुई थी
हादसे में जिन सात एस्ट्रोनॉट्स की मौत हुई थी, वो थे- मिशन कमांडर एफ. रिचर्ड स्कूबी, पायलट माइकल जे स्मिथ, मिशन स्पेशलिस्ट रोनैल्ड मैक्नायर, एलिसन ओनिजुका, जुडिथ रेसनिक, पेलोड स्पेशलिस्ट ग्रेगरी जारविस और क्रिस्टा मैक्ऑलिफ. इन सातों में क्रिस्टा एक स्कूल टीचर भी थीं.
क्यों हुआ था हादसा, जिसने दुनिया को हिला दिया
हादसे के बाद चैलेंजर स्पेस शटल के टुकड़ों को खोजा गया. जांच में पता चला कि O रिंग नाम की चीज रॉकेट बूस्टर से टूट गई थी. जिसकी वजह से ईंधन में लीकेज हुआ और विस्फोट हो गया. विस्फोट होते ही एस्ट्रोनॉट्स जिस केबिन में थे, वो शटल से अलग हो गया. हादसा 14 किलोमीटर की ऊंचाई पर हुआ. लेकिन केबिन अलग होते ही तेजी से 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर चला गया.
इस ऊंचाई पर जाते समय केबिन की जी फोर्स (G Force) सामान्य से 20 गुना ज्यादा था. दो सेकेंड बाद ही केबिन तेजी से नीचे गिरने लगा. तब जी फोर्स सिर्फ 4 जी था. आजतक सातों एस्ट्रोनॉट्स की मौत की वजह कभी पता नहीं चल पाई. क्योंकि जी फोर्स में आने वाला तेज बदलाव सहने के लिए उन्हें ट्रेंड किया गया था.
Divers from a documentary crew looking for the wreckage of a World War Two aircraft off the coast of Florida found a 20-foot section of the space shuttle Challenger, which exploded and broke apart shortly after its launch in 1986, NASA said on Thursday. https://t.co/HwCDVDpsUZ
— Reuters Science News (@ReutersScience) November 10, 2022
केबिन जब आसमान से समुद्र में गिरा तब उसकी गति 333 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. उस समय जी फोर्स 200 जी था. यहां पर मौत होने की पूरी आशंका बनती है. इस फोर्स को इंसान द्वारा बनाया गया कोई ढांचा या इंसान खुद नहीं सकता. हादसे के बाद अंतरिक्षयान के टुकड़े 881 जगहों पर गिरे थे. कुछ तो समुद्र में 70 फीट से लेकर 1200 फीट गहराई तक पहुंच गए थे.