नासा ने एक शोध किया था कि आर्टिफिशियल ग्रैविटी मानव शरीर पर क्या असर डालती है. इसके लिए कुछ लोगों की भर्तियां की गई थीं, जिनका काम सिर्फ बिस्तर पर लेटे रहने का था. दो महीने के लिए ये लोग नासा की निगरानी में रहे और इसके लिए प्रतिभागियों को 18,500 अमेरिकी डॉलर यानी 14.8 लाख रुपए दिए गए थे.
लेकिन ये इतना भी आसान नहीं था जैसा सुनने में लगता है. चुने गए 24 लोगों ने 60 दिन लेटकर बिताए थे. सभी एक्सपेरिमेंट्स, खाना और आराम की जो भी गतिविधियां थी, वह लेटे हुए ही की गई थीं.
इस तरह के कई रास्ते हैं जिनसे वैज्ञानिक रिसर्च में मदद की जा सकती है और इसके बदले पैसे भी कमाए जा सकते हैं. ये तरीके थोड़े अलग हैं लेकिन आकर्षक लग सकते हैं. यहां कुछ तरीके दिए गए हैं, लेकिन इन्हें पैसा कमाने का आसान तरीका मत समझिएगा.
NASA का शोध- 60 दिनों तक बिस्तर पर सीधे लेटना
नासा इसके लिए 18,500 डॉलर देता है. लेकिन आपको दो महीने तक बेड पर लेटे रहना होगा. नासा के साथ आपको दो महीने तक चौबीसों घंटे रहना होगा. इस शोध से वैज्ञानिक उन बदलावों को देख पाएंगे जो अंतरिक्ष उड़ान के दौरान, भारहीनता की वजह से एस्ट्रोनॉट्स के शरीर में होते हैं. इस शोध के लिए प्रतिभागियों को पहले ही चुन लिया गया है. लेकिन लोगों को चुनते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उनके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षण एस्ट्रोनॉट्स से मिलते जुलते हों.
दो महीने में लाखों कमाना भले ही आसान लगता हो, लेकिन लेटते समय आपको अपना सिर छह डिग्री नीचे झुका कर रखना होगा. ऐसा तब भी करना होगा जब आप खा रहे हों या टॉयलेट इस्तेमाल कर रहे हों. नासा के लिए बेड रेस्ट स्टडी करने वाले सीनियर साइंटिस्ट रोनी क्रॉमवेल का कहना है कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम ऐसे लोगों को चुनें, जो दो महीने बिस्तर पर बिताने के लिए मानसिक रूप से तैयार हों. इसके लिए हर कोई कंफर्टेबल नहीं होता. हर व्यक्ति बिस्तर में लंबा समय नहीं गुजार सकता.
ब्लड प्लाज्मा बेचा जा सकता है
आप अपना ब्लड प्लाज़्मा भी बेच सकते हैं, जिसके लिए करीब 50 डॉलर (4000 रु.) दिए जाते हैं. प्लाज्मा इंसान के खून का सबसे बड़ा कंपोनेंट होताहै. ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर, ऑटोइम्यून बीमारियों और जल गए लोगों के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है. DonatingPlasma.org के मुताबिक, प्लाज्मा दान को 'Gift Of Life' भी कहा जाता है.
एग्स डोनेट किए जा सकते हैं
आप अपने एग्स भी डोनेट (Egg donation) कर सकते हैं, इसके लिए करीब 8,000 से 14,000 डॉलर (6.4 -11.2 लाख रु.) तक दिए जाते हैं. इससे उन महिलाओं को मदद मिलती है जिनके अंडाशय से स्वस्थ एग का अत्पादन नहीं होता, जिस वजह से वे गर्भवती नहीं हो पातीं.
डोनेशन साइकल के दौरान, डोनर को फर्टिलिटी दवाओं के इंजेक्शन दिए जाते हैं, ताकि उनके अंडाशय अधिक अंडे बना सकें. इसके लिए आम तौर पर 21 और 35 साल की महिलाएं डोनेट कर सकती हैं. लेकिन डोनेट करने से पहले इसके साइड इफैक्ट जान लेना बेहतर होता है. कई गंभीर मामलों में गर्भाशय के बाहर लंबे समय तक टिश्यू ग्रोथ (एंडोमेट्रियोसिस), इनफेक्शन, किडनी डैमेज जैसी स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हो सकती हैं. इतना ही नहीं, कॉम्प्लिकेशन हों तो जान जाने का भी खतरा होता है.
स्पर्म डोनेट किए जा सकते हैं
अपना शुक्राणु या स्पर्म दान (Sperm donation) किए जा सकते हैं, जिसके लिए 35-125 डॉलर (2800- 10,000 रु.) तक दिए जाते हैं. स्पर्म डोनेट करना एग डोनेशन से ज्यादा आसान और कम खतरे वाला है. स्पर्म बैंक डोनर्स को लेकर थोड़े चूज़ी होते हैं. आमतौर पर वे ऐसे पुरुषों से डोनेशन की उम्मीद रखते हैं जो स्वस्थ, लंबे, युवा (40 साल से कम) और शिक्षित हों.
पेड क्लिनिकल ट्रायल के लिए साइनअप किया जा सकता है
आप नैदानिक परीक्षणों यानी क्लिनिकल ट्रायल (Clincal Trial) के लिए साइन अप कर सकते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ, दुनिया भर में ह्यूमन क्लिनिकल स्टडी के लिए एक सर्चेबल डेटाबेस, ClincalTrials.gov चलाता है. प्रतिभागी नए चिकित्सा उत्पादों के लिए गिनी पिग (Guinea pigs) की तरह काम करेंगे. इसमें कई चीजों पर स्टडी की जाती है जैसे हाई ब्लड प्रेशर का इलाज ढूंढना हो या फिर ये पता लगाना हो कि अलग-अलग जीवन शैली का दिल पर क्या असर होता है. विषय कोई भी हो सकता है, और उसी हिसाब से पैसा दिया जाता है. जितना बड़ा जोखिम होगा, उतना ही ज्यादा पैसा मिलेगा. लेकिन इसके लिए सोच समझकर ही साइनअप करना चाहिए.
मनोवैज्ञानिक स्टडी में इनरॉल किया जा सकता है
आप किसी साइकोलॉजिकल स्टडी का हिस्सा बनने के लिए खुद को नामांकित कर सकते हैं. ये भी स्टडी पर ही निर्भर करता है कि इसके लिए किना पैसा दिया जाएगा. मनोवैज्ञानिक स्टडी में मानव व्यवहार और ब्रेन फंक्शन की जांच की जाती है. इसमें क्लिनिकल ट्रायल से कम पैसा मिलता है, क्योंकि इसमें जोखिम भी कम होता है और समय भी ज्यादा नहीं देना होता. ज्यादातर रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ स्टडी के लिए ऑनलाइन डेटाबेस रखती हैं, ताकि लोग आसानी से साइन अप कर सकें.
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— ScienceAlert (@ScienceAlert) December 28, 2022
बोन मैरो डोनेट की जा सकती है
आप अपनी बोन मैरो (Bone marrow) डोनेट कर सकते हैं. ये ब्लड प्लाज़्मा डोनेशन जैसा ही होता है. इससे बोन मैरो ट्रांसप्लांट के ज़रूरतमंद लोगों की मदद की जा सकती है, जिन्हें इसके लिए बहुत लंबा इंतज़ार करना होता है. बोन मैरो ट्रांस्पेलांट में सही मैच मिलना ही सबसे बड़ी बात होती है. मरीज़ के हिसाब से एक मैच खोजने की संभावना 29 से 79 प्रतिशत होती है.
मृत शरीर विज्ञान को दान किया जा सकता है
जीते जी साइंस की मदद करने के अलावा, मौत के बाद भी योगदान दिया जा सकता है. मृत शरीर का इस्तेमाल तरह-तरह की रिसर्च और शिक्षा में किया जाता है. ऐसी कई संस्थाएं हैं जो ये काम करती हैं और इसके लिए अंतिम संस्कार का खर्च उठाती हैं.