NASA-SpaceX का एक्पेडिशन-72 यानी क्रू-9 (Crew-9) मिशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station - ISS) पर पहुंच गया है. स्पेसएक्स के ड्रैगन क्रू स्पेसक्राफ्ट से अमेरिकी एस्ट्रोनॉट निक हेग और रूसी कॉस्मोनॉट एलेक्जेंडर गोरबुनोव स्पेस स्टेशन पर पहुंचे. उनका स्वागत खुद सुनीता विलियम्स ने किया.
इस समय स्पेस स्टेशन पर 11 एस्ट्रोनॉट्स मौजूद हैं. निक और गोरबुनोव फरवरी 2025 में धरती पर ड्रैगन कैप्सूल से ही वापस आएंगे. उनके साथ बुच विलमोर और सुनीता विलियम्स भी आएंगी. तब तक ये लोग स्पेस स्टेशन पर ही रहेंगे. स्पेस स्टेशन पर पहले से ही 9 लोग थे, अब निक और गोरबुनोव के जाने के बाद 9+2=11 हो गए हैं.
यह भी पढ़ें: मुंबई-चेन्नई को डूबने से बचाएगा NASA का Ice Robot प्रोजेक्ट, जानिए कैसे?
यहां देखिए Sunita Williams का वीडियो
पहले क्रू-9 मिशन में चार लोग जा रहे थे. मिशन कमांडर जेना कार्डमैन, पायलट निक हेग, मिशन स्पेशलिस्ट स्टेफनी विल्सन और मिशन स्पेशलिस्ट एलेक्जेंडर गोरबुनोव. लेकिन सुनीता-बुच को वापस लाने के लिए जेना कार्डमैन और स्टेफनी विल्सन को रोक दिया गया. उन्हें अगले मिशन पर स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा.
यह भी पढ़ें: क्या है 2 अक्टूबर को दिखने वाला Ring Of Fire सूर्यग्रहण? जानिए इसकी खासियत
28 सितंबर को हुई थी लॉन्चिंग
Crew-9 मिशन को ड्रैगन कैप्सूल के जरिए केप केनवरल से 28 सितंबर को स्पेसएक्स फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया था. इस मिशन में सिर्फ दो पुरुष एस्ट्रोनॉट्स एलेक्जेंडर गोरबुनोव और पायलट निक हेग स्पेस स्टेशन भेजे गए थे. जो अब स्पेस स्टेशन पर हैं. सिर्फ इस मिशन के लिए निक हेग को मिशन कमांडर बनाया गया था. पहले वो सिर्फ पायलट थे. जबकि एलेक्जेंडर के प्रोफाइल में कोई बदलाव नहीं किया गया था.
यह भी पढ़ें: Bunker-Buster Bomb: वो बम जिसने बेरूत में खोद दी नसरल्लाह की कब्र, जमीन में कर दिया 30 फीट गहरा गड्ढा
ड्रैगन के लिए हटाया गया था स्टारलाइनर
क्रू-9 मिशन के ड्रैगन कैप्सूल को स्पेस स्टेशन से डॉक करने के लिए पहले वहां जगह बनाई गई. ड्रैगन कैप्सूल को स्पेस स्टेशन पर जोड़ने के लिए स्टारलाइनर को पहले ही धरती पर भेज दिया गया. अब उसी जगह पर ड्रैगन कैप्सूल डॉक हुआ है.
क्या है Crew-9 स्पेस मिशन?
यह NASA के कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम का हिस्सा है. SpaceX के साथ मिलकर स्पेस स्टेशन का 9 रोटेशनल मिशन है. ताकि स्पेस स्टेशन पर लगातार रिसर्च होती रहे. दुनिया को मौसम की सही जानकारी मिलती रहे. दो दशकों से ज्यादा समय से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर हर समय कोई न कोई एस्ट्रोनॉट रहा है. वह कभी खाली नहीं रहा. इसलिए वहां पर लगातार एस्ट्रोनॉट्स को भेजा जाता रहा है.