हम लाखों साल पहले ऐसे नहीं दिखते थे, जैसे आज दिखते हैं. हम अब बदल गए हैं. एक नए अध्ययन से पता चलता है कि इंसान लगातार विकसित होता रहता है और विकसित होने के इन तरीकों की हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
बायोमेडिकल साइंसेज रिसर्च सेंटर 'अलेक्जेंडर फ्लेमिंग' (BSRC Flemming), ग्रीस और ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन के शोधकर्ताओं ने हमारे जीनोम में 155 जीनों की पहचान की है, जो DNA के छोटे और नॉन-कोडिंग सेक्शन से निकले हैं. इनमें से कई जीन हमारे जीव विज्ञान में अहम भूमिका निभाते हैं और बताते हैं कि नोवल जीन्स किस तरह विकसित हो रहे हैं.
नए जीन आमतौर पर दोहराव की घटनाओं जैसे मैकेनिज़्म के ज़रिए बनते हैं, जहां हमारी आनुवंशिक मशीनरी गलती से पहले से मौजूद जीनों की कॉपियां बनाती है जो समय के साथ अलग-अलग काम कर सकती हैं. लेकिन इस शोध में पहचाने गए 155 माइक्रोजीन, डीएनए के हिस्सों में से बने प्रतीत होते हैं. ये नए जीन, जिन प्रोटीन को एनकोड करते हैं, वो बहुत छोटे होते हैं. इसलिए इन डीएनए सीकिवेंस को खोजना और इसकी स्टडी करना मुश्किल है. इसी वजह से अक्सर शोध में ये अनदेखे रह जाते हैं.
ग्रीस में BSRC फ्लेमिंग के विकासवादी आनुवंशिकीविद् निकोलाओस वैकिर्लिस (Nikolaos Vakirlis) कहते हैं कि यह प्रोजेक्ट 2017 में शुरू हुआ था, लेकिन कुछ साल ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. इसके बाद जब एक और स्टडी पब्लिश हुई तो उसमें बहुत ही दिलचस्प डेटा था जिससे हमने वापस इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया. वो स्टडी कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने 2020 में पब्लिश की थी. इस स्टडी में उन माइक्रोप्रोटीन्स के बारे में बताया गया था, जो गैर-कोडिंग रिजन से बने होते हैं जिन्हें 'जंक डीएनए' के रूप में वर्णित किया गया है.
नए शोध को करने वाली टीम ने एक अनुवांशिक जेनेटिक ट्री बनाया, ताकि हमारे जीनोम के उन छोटे सीक्वेंस की तुलना 99 अन्य कशेरुक प्रजातियों से करने पर, समय के साथ जीन के विकास को ट्रैक किया जा सके. शोध में पहचाने गए कुछ नए 'माइक्रोजीन' से स्तनधारियों के शुरुआती दिनों को ट्रैक किया जा सकता है, जबकि बाकी हाल ही में जुड़े हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि अशोध में पहचाने गए दो जीन मानव-चिंपैंजी के विभाजन के बाद उभरे हैं.
Tiny New Genes Appearing in Human DNA Show How We're Still Evolving https://t.co/pa3jIDfJMf
— ScienceAlert (@ScienceAlert) December 23, 2022
हमारी हार्ट टिश्यू बनाने में अहम भूमिका निभाने वाला एक जीन तब उभरा, जब मनुष्य और चिंपाजी के पूर्वज, गोरिल्ला के वंश से अलग हो गए. अगर वास्तव में यह माइक्रोजीन पिछले कुछ लाख सालों में उभरा है, तो यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हमारे डीएनए के ये विकसित होने वाले हिस्से, शरीर के लिए जल्द ज़रूरी हो सकते हैं.
सेल रिपोर्ट्स (Cell Reports) में प्रकाशित शोध के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने तब लैब में विकसित कोशिकाओं में जीन को एक-एक करके हटाकर सीक्वेंस फंक्शन की जांच की. 44 सेल क्लचर में ग्रोथ डिफेक्ट दिखे, जो पुष्टि करता है कि डीएनए से गायब सेक्शन, हमें गतिशील रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. अन्य तुलनात्मक विश्लेषणों में, शोधकर्ताओं ने बीमारी से जुड़े तीन नए जीन वेरिएंट की भी पहचान की.
आधुनिक तकनीक और चिकित्सा की दृष्टि से देखें, तो जैविक परिवर्तन के पैमाने पर मानव ने एक प्रजाति के तौर पर अनुभव किया है, जो चुनौतीपूर्ण हो सकता है. लेकिन हजारों सालों में हमारे आहार और बीमारी की वजह से हमारी फिटनेस काफी बदली है. और ज़ाहिर है कि तकनीकी रूप से एडवांस दुनिया में भई यह बदलाव जारी रहेगा. हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है नॉन-कोडिंग रिजन में नए जीन कैसे बनते हैं, लेकिन इन जीनों को ट्रैक करने की हमारी नई क्षमता के साथ, हम जल्द इसका पता लगा सकते हैं.