फ्लोरिडा में कछुओं का एक अस्पताल है, जहां पर वैज्ञानिक परेशान हैं. क्योंकि पिछले चार साल से इस इलाके में सिर्फ मादा समुद्री कछुए ही पैदा हो रहे हैं. अगर दुनिया में किसी भी प्रजाति का सिर्फ मादा जीव ही पैदा हो तो क्या होगा? ये बेहद चिंताजनक स्थिति है. प्राकृतिक तौर पर नर और मादा एक दूसरे के लिए बनाए गए हैं. ये अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने का काम करते हैं. लेकिन सिर्फ मादा हो या सिर्फ नर हो तो प्रजाति के विलुप्त होने की स्थिति बन सकती है.
वैज्ञानिकों ने बताया कि इसकी वजह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और बढ़ता हुआ तापमान (Rising Temperature) है. अगर इसी तरह सिर्फ मादा बेबी सी टर्टल (Baby Sea Turtle) पैदा होते रहेंगे तो इनकी प्रजाति का आगे बढ़ना रुक जाएगा. वैज्ञानिकों को लग रहा है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की वजह से अंडे में लिंग परिवर्तन हो जा रहा है.
सिर्फ मादा ही पैदा होंगी तो खत्म हो जाएगी प्रजाति
समुद्री कछुओं में वैसे भी नरों की संख्या कम होती है. यानी 10 कछुए पैदा होते हैं तो उनमें सिर्फ एक नर कछुआ पैदा होता है. अब अगर रेत गर्म होने लगेगी और इसकी वजह से अंडों में लिंग बदलना शुरू हो जाएगा. तो अंडे से नर कछुए बाहर ही नहीं आएंगे. नर कछुओं का विकास ही रुक जाएगा. नर होंगे नहीं तो सिर्फ मादा कछुए अपनी प्रजाति को बचा ही नहीं पाएंगी. धीरे-धीरे वो भी खत्म हो जाएंगी. न वो बचेंगी न उनकी प्रजाति बचेगी.
Every Baby Sea Turtle in Florida Seems to Be Female. We Warned You, Scientists Say https://t.co/V8cM1thii4
— ScienceAlert (@ScienceAlert) August 9, 2022
तापमान बढ़ते ही पैदा होते हैं ज्यादा मादा कछुए
हर कोई इस सिद्धांत से सहमत नहीं है कि बढ़ते तापमान की वजह से कछुओं का लिंग परिवर्तन हो रहा है. लेकिन ये बात सही है कि जलवायु परिवर्तन का नुकसान कछुओं समेत कई जीवों को बर्दाश्त करना पड़ रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ एक्स्टर की इकोलॉजिस्ट लूसी हॉक्स ने बताया कि समुद्री कछुओं की सात प्रजातियां हैं, जो तापमान बढ़ते ही ज्यादा मादा कछुए पैदा करने लगते हैं. लूसी इस बात की स्टडी साल 2007 से कर रही हैं.
कछुओं की कुछ प्रजातियां लिंग पक्षपाती होती हैं
लूसी ने बताया कि ये सातों प्रजातियां लिंग पक्षपाती (Female Biased) हैं. गर्मी बढ़ी नहीं कि ये तुरंत मादा कछुओं को ज्यादा पैदा करने लगती हैं. यूएस नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के मुताबिक समुद्री कछुओं के अंडे 31 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा गर्म रेत में पैदा हुए तो अंडों से मादा का निकलना तय माना जाता है.
पूरी दुनिया में चल रही है ये खतरनाक प्रक्रिया
फ्लोरिडा के मैराथॉन शहर के टर्टल हॉस्पीटल की मैनेजर बीट जर्किलबैश ने कहा कि पिछली चार गर्मियों से तापमान बढ़ा हुआ है. हमें पिछले चार साल से सिर्फ मादा समुद्री कछुए ही मिल रहे हैं. यह प्रक्रिया सिर्फ यहीं नहीं है. यह पूरी दुनिया में देखने को मिल रही है. साल 2018 में एक स्टडी आई थी जिसमें कहा गया था पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में 99 फीसदी कछुए सिर्फ मादा ही हैं.
कछुओं में हो रही नरों की कमी, ये एक बड़ी समस्या है
कॉलेज ऑफ चार्ल्स्टन के प्रोफेसर एमेरिटस और बायोलॉजिस्ट डेविड ओवेंस कहते हैं कि अगले कुछ दशकों में समुद्री कछुओं की प्रजातियों में से नरों की संख्या खत्म हो जाएगी. वो न के बराबर बचेंगे. अगर नर नहीं होंगे तो कछुओं में जेनेटिक वैरिएशन नहीं आएगा. जेनेटिक विभिन्नता के लिए जरूरी है कि नर कछुए रहें. वैज्ञानिकों ने कहा कि लैंगिक संतुलन बनाना बेहद जरूरी है. अगर 90 फीसदी मादाओं से भरे घोंसले में प्रजनन की प्रक्रिया शुरू होती है, तो सिर्फ कुछ ही नर चाहिए. लेकिन चाहिए तो. अगर होंगे ही नहीं प्रजाति का प्रजनन कैसे होगा.