इंसान के दिमाग का बायां और दायां हिस्सा शब्दों और चेहरों को पहचानने के लिए जाना जाता है. एक नए शोध से पता चला है कि लोगों के दिमाग का ये आधा हिस्सा न भी हो, तो भी वे शब्द और चेहरे अच्छी तरह पहचान सकते हैं.
यह शोध अभी प्रकाशित नहीं हुआ है. लेकिन शोध के लेखकों का कहना है कि इस खोज से मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी के बारे में नई जानकारी मिल सकती है. इस शोध में कहा गया है कि सर्जरी के बाद, अतिरिक्त कामों को करने के लिए एक हिस्सा खुद को फिर से रीवायर कर सकता है.
यह पता लगाने के लिए कि क्या एक ही हिस्सा चेहरों और शब्दों की पहचान करने में सक्षम होता है, शोधकर्ताओं ने 40 ऐसे वयस्क वॉलेंटियर की मदद ली, जिनके दिमाग के आधे हिस्से को बचपन में ही निकाल (Hemispherectomy) दिया गया था. मिर्गी के गहन मामलों और दिमाग के एक हिस्से में पड़ने वाले दौरों पर काबू पाने के लिए ऐसा करना आखिरी विकल्प होता है.
इन लोगों को महज सेकंड के तीन-चौथाई हिस्से के लिए, चार-अक्षर वाला शब्द और एक चेहरा दिखाया गया था. इससे पहले उन्हें केवल 150 मिलीसेकंड के लिए कोई और शब्द या चेहरा दिखाया गया था. फिर उसे पूछा गया था कि उन्हें दिखाए गए शब्द और चेहरे एक ही थे या अलग-अलग.
हालांकि मरीजों ने सामान्य लोगों से बेहतर परफॉर्म नहीं किया लेकिन उनमें चेहरे और शब्द पहचाने की औसत सटीकता दर 80 प्रतिशत से ज्यादा थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि मरीजों के दिमाग का जो हिस्सा निकाल दिया गया था, ये सटीकता उस हिस्से पर निर्भर नहीं थी.
एक दूसरे प्रयोग में, शोधकर्ताओं ने सभी प्रतिभागियों को उन शब्दों और चेहरों को पहचानने को कहा जो स्क्रीन के किनारे पर दिखाई देते हैं, न कि बीच में. जो चीजें दृश्य के बाएं हिस्से में देखी जाती हैं, वे आम तौर पर दिमाग के दाएं हिस्से से कंट्रोल होती हैं. और दाईं तरफ की चीजें दिमाग के बाएं हिस्से से.
Though the left and right hemispheres of the human brain are known to process words and faces respectively, new research reveals that people lacking one half of their brain are still pretty good at recognizing both.https://t.co/QXEcMlZS4F
— IFLScience (@IFLScience) August 16, 2022
सामान्य लोगों ने इस बार भी बेहतर प्रदर्शन किया. लेकिन ये आश्चर्य की बात थी कि दिमाग के केवल एक हिस्से वाले लोगों के प्रदर्शन में बहुत अंतर नहीं था. कुल मिलाकर, नतीजे बताते हैं कि विकसित हो रहा दिमाग का एक हिस्सा, वो चाहे बायां हो या दायां, चेहरे और शब्दों की पहचान के लिए खुद को ढाल लेता है. हालांकि इस तरह की प्लास्टिसिटी उम्र पर भी निर्भर करती है.