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मंगल पर दो महीने में पहुंच जाएंगे एस्ट्रोनॉट, NASA की प्लाज्मा रॉकेट बनाने की प्लानिंग

NASA ऐसा रॉकेट बनाने जा रहा है, जो सिर्फ दो महीने में ही एस्ट्रोनॉट्स को मंगल ग्रह तक पहुंचा देगा. इस रॉकेट का नाम होगा पल्स्ड प्लाज्मा रॉकेट (Pulsed Plasma Rocket). इसके बनने के बाद गहरे अंतरिक्ष में किसी भी तरह का मिशन करना ज्यादा आसान हो पाएगा. एस्ट्रोनॉट्स आसानी से और जल्दी-जल्दी ग्रहों पर यात्रा कर पाएंगे.

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ये है नासा के प्लाज्मा रॉकेट का डिजाइन. (फोटोः होवे इंडस्ट्रीज)
ये है नासा के प्लाज्मा रॉकेट का डिजाइन. (फोटोः होवे इंडस्ट्रीज)

मंगल ग्रह पर इंसानों को पहुंचाने का प्लान बेहद मुश्किल और समय लेने वाला है. ऐसे ट्रांसपोर्ट की जरूरत है, जो कम समय में इतनी ज्यादा दूरी तय कर सके. क्योंकि धरती और मंगल ग्रह के बीच की दूरी बदलती रहती है. आज की तकनीक के हिसाब से पृथ्वी से लाल ग्रह पर जाकर आने में 22 से 24 महीने लग सकते हैं. 

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NASA ने भविष्य के एक रॉकेट का प्लान तैयार किया है, जिसकी बदौलत एस्ट्रोनॉट्स मंगल ग्रह पर दो महीने में ही पहुंच जाएंगे. इस रॉकेट का नाम है पल्स्ड प्लाज्मा रॉकेट (Pulsed Plasma Rocket - PPR). नासा ने इस रॉकेट पर काम करने के लिए Howe Industries को फंडिंग दी है. 

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नासा के मुताबिक इस रॉकेट का प्रोपल्शन सिस्टम बेहद खास और अत्याधुनिक है. यह हाई स्पेसिफिक इंपल्स या lsp पर उड़ान भरेगा. इससे इसके इंजन को ताकत मिलेगी. नासा ने बताया कि इसके जरिए मंगल ग्रह पर कार्गो और एस्ट्रोनॉट्स दो महीने में भेजे जा सकेंगे. फिलहाल इस कॉन्सेप्ट पर काम किया जा रहा है. 

PPR में न्यूक्लियर फिजन पावर सिस्टम लगा होगा. जिसके जरिए रॉकेट को ऊर्जा मिलेगी. इसमें एटम को तोड़ा जाएगा. एटम को तोड़ने पर भारी एनर्जी पैदा होगी, जिससे रॉकेट तेजी से आगे की ओर बढ़ेगा. लेकिन PPR छोटा होगा, सिंपल होगा और कई तरह के रॉकेट्स की तुलना में किफायती होगा. 

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इतना ही नहीं छोटा होने के बावजूद यह रॉकेट भारी स्पेसक्राफ्ट्स को गहरे अंतरिक्ष में भेज सकेगा. इसमें ऐसी टेक्नोलॉजी होगी, जिससे एस्ट्रोनॉट्स को गैलेक्टिक कॉस्मिक किरणों से बचने का मौका भी मिलेगा. इससे एस्ट्रोनॉट्स लंबे समय तक अंतरिक्ष में यात्रा कर पाएंगे. 

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