पिछले साल बने एक स्टार्टअप ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने एक बड़ी फर्म एक्लिप्स (Eclipse) के साथ, अब तक 3 करोड़ डॉलर जुटाए हैं. कंपनी का नाम है ट्रू एनोमली (True Anomaly), जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए स्पेसक्राफ्ट बना रही है, जिसे जल्द ही पृथ्वी की कक्षा में तैनात किया जाएगा.
इस कंपनी में 57 लोग काम करते हैं. डेनवर में इनकी 35,000 वर्ग फुट की फाक्ट्री है और इन्होंने एक स्पेसक्राफ्ट डिज़ाइन किया है, जिसे जैकाल ऑटोनॉमस ऑर्बिटल व्हीकल (Jackal Autonomous Orbital Vehicle) नाम दिया गया है. कंपनी का कहना है कि इस साल अक्टूबर में कंपनी अपने पहले दो जैकाल्स को स्पेसएक्स रॉकेट (SpaceX rocket) के ज़रिए, पृथ्वी की ऑर्बिट में ले जाने की योजना बना रही है.
यह काम रूस और चीन जैसे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते, अमेरिका को दुनिया की मुख्य अंतरिक्ष शक्ति बने रहने में मदद कर रहा है. एक्लिप्स के एक पार्टनर सेथ विंटररोथ का कहना है कि अंतरिक्ष क्षेत्र की बेहतर क्षमताओं से अमेरिकी सेना को मज़बूत करने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि ट्रू एनोमली अंतरिक्ष में हमारे सैन्य लाभों को फिर से हासिल करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ज़रूरी क्षमताओं को विकसित करने का काम कर रही है.
ट्रू एनोमली जो काम कर रही है उससे देश को बेहतर स्पेस सिस्टम्स तैनात करने और पृथ्वी की ऑर्बिट में बढ़ती गतिविधियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी. ट्रू एनोमली की वेबसाइट बताती है कि जैकाल को LEO, GEO और दूसरी ऑर्बिट्स में सबसे चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष डोमेन जागरूकता मिशन के लिए डिज़ाइन किया गया है. LEO यानी लो अर्थ ऑर्बिट और GEO का मतलब है जियोस्टेशनरी ऑर्बिट.
Private 'Jackal' inspector satellites to get 1st in-space test this year https://t.co/om3nM6CsoT pic.twitter.com/4wplbEHy9a
— SPACE.com (@SPACEdotcom) April 6, 2023
जैकाल किसी भी ऑर्बिट में मौजूद किसी भी स्पेस ऑब्जेक्ट के मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेज, फुल-मोशन वीडियो और मीट्रिक ऑब्ज़रवेशन इकट्ठा कर सकता है. इस अक्टूबर, स्पेसक्राफ्ट को LEO तक लॉन्च करने के बाद दोनों जैकाल्स किसी भी स्पेस जंक या संभावित विरोधी स्पेसक्राफ्ट का निरीक्षण नहीं करेंगे, बल्कि वे अपने सिस्टम को टेस्ट करने के लिए एक दूसरे को ट्रैक और टेस्ट करेंगे.
अगर टेस्ट मिशन अच्छी तरह से हो जाता है, तो ट्रू एनोमली अमेरिकी सेना की स्पेस क्षमताओं को बढ़ाने के लिए, ऐसे हजारों सैटेलाइट कक्षा में तैनात कर सकती है.