एलियन (Aliens) से संपर्क करने की कोशिशें सालों से जारी हैं, हालांकि हमें अभी तक एलियन जीवन के कोई सबूत नहीं मिले हैं. लेकिन अब शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक ऐसा गणितीय मॉडल तैयार किया है जिसमें दिखाया गया है कि शायद एलियंस क्वांटम फिज़िक्स (Quantum physics) की मदद से अंतरिक्ष में संचार करते हों. यानी क्वांटम कम्यूनिकेशन (Quantum communication) के जरिए एलियन से संपर्क किया जा सकता है.
पृथ्वी पर वैज्ञानिक क्वांटम कम्यूनिकेशन पर काम कर रहे हैं. क्वांटम फिज़िक्स में कुछ ऐसे गुण हैं जो सामान्य कम्यूनिकेशन सिस्टम की तुलना में सूचनाओं को काफी तेजी से और ज्यादा सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर कर सकते हैं. क्वांटम नेटवर्क बहुत नाजुक और संवेदनशील होता है. हाल ही में किए गए शोध के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क बिना टूटे अंतरिक्ष में काम कर सकते हैं.
ब्रिटेन में एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी (University of Edinburgh) के भौतिक विज्ञानी और शोध के मुख्य लेखक अर्जुन बेरेरा और उनके सहयोगी जैम काल्डेरोन-फिगुएरोआ (Jaime Calderón-Figueroa) ने अंतरिक्ष में एक्स-रे की गति की गणना की, ताकि संभावित डीकोहोरेंस की जांच की जा सके.
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर प्रकाश के कण यानी फोटॉन (Photon) का इस्तेमाल क्वांटम कणों के तौर पर किया जाता है, तो उन्हें हजारों प्रकाश-वर्ष दूर प्रसारित किया जा सकता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि अंतरिक्ष में पदार्थ का औसत घनत्व पृथ्वी की तुलना में बहुत कम होता है. साथ ही, इस साफ वातावरण में रुकावट की संभावना भी नहीं होती. यहां तक कि गुरुत्वाकर्षण बल भी क्वांटम कम्यूनिकेशन नेटवर्क को प्रभावित नहीं कर सकता.
फिजिकल रिव्यू डी (Physical Review D.) में प्रकाशित शोध के मुताबिक, हो सकता है कि एलियन एक दूसरे से बात करने के लिए क्वांटम नेटवर्क का इसतामल कर रहे हों या इसी के जरिए हमसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हों. हालांकि ये सिर्फ अटकलें हैं, लेकिन इससे खगोलविदों को एलियन जीवन की खोज दूसरे तरीके से करने के संकेत तो मिलते ही हैं.
Aliens Could Be Using Quantum Communications to Talk Across Interstellar Space https://t.co/eyF3mi07TY
— ScienceAlert (@ScienceAlert) July 8, 2022
शोधकर्ताओं का कहना है कि क्वांटम सिग्नल को डीकोड करने के लिए,अच्छे क्वांटम कंप्यूटर की जरूरत होगी. हालांकि, क्वांटम कम्यूनिकेशन भी कोई जादू नहीं है. सूचना अभी भी प्रकाश की गति से तेज नहीं चल सकती. इसलिए प्रसारण को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई साल लग सकते हैं.