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Alien Contact Protocol: अगर दूसरी दुनिया से संदेश आए तो क्या प्रतिक्रिया देंगे हम? जवाब ढूंढने में जुटे वैज्ञानिक

करीब एक सदी से वैज्ञानिक दूसरी दुनिया से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सफल नहीं हुए. लेकिन अगर सफल हो गए तो? अगर एलियन ग्रह से कोई संदेश आए तो हमारी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए, इसपर अभी कोई नहीं जानता. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एलियन संपर्क की घटना के लिए तैयारी शुरू कर दी है.

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एलियन से संपर्क पर क्या होगी इंसानों की प्रतिक्रिया, इसपर काम शुरू (Photo: Getty)
एलियन से संपर्क पर क्या होगी इंसानों की प्रतिक्रिया, इसपर काम शुरू (Photo: Getty)

वैज्ञानिक दूसरी दुनिया और वहां से आने वाले यूएफओ (UFO) को लेकर गंभीर हैं. वे इसपर स्टडी कर रहे हैं. सालों से एलियन संपर्क की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन सवाल है कि अगर कल किसी दूसरी दुनिया से हमें कोई संदेश आए, तो हम उसपर क्या प्रतिक्रिया देंगे? जवाब है- हमे पता ही नहीं. और ये कहना है शोधकर्ताओं का, जिनके मुताबकि ये वाकई एक समस्या है. क्योंकि हम नहीं जानते कि एलियन के संदेश पर हम जवाब क्या देंगे.

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इस समस्या का समाधान खोजने के लिए 35 सालों में पहली बार, नीति विशेषज्ञ और वैज्ञानिकों की एक टीम एकसाथ आकर, पूरी दुनिया के लिए एलियन कॉन्टैक्ट प्रोटोकॉल (Alien Contact Protocol) बनाने पर काम कर रही है, ताकि दूसरी दुनिया से संपर्क होने पर उनका अनुसरण किया जा सके.

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एलियन से संपर्जक करने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं (Photo: Getty)

स्कॉटलैंड में सेंट एंड्रयूज यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंटिस्ट जॉन इलियट (John Elliot), नए बने SETI डिटेक्शन हब के कॉर्डिनेटर हैं. यह संगठन ही नया एलियन कॉन्टैक्ट प्रोटोकॉल बनाएगा. इलियट के मुताबिक, नया रिसर्च ग्रुप एक संभावित एलियन एनकाउंटर से मानवता पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोचेगा और इस पर फोकस करेगा कि अगर एलियन संपर्क होता है, तो हमें कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए.

फिलहाल, हमारे पास केवल एक ही एलियन कॉन्टैक्ट प्रोटोकॉल है, जिसे सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस इंस्टीट्यूट (SETI)  ने 1989 में बनाया था. इस प्रोटोकॉल को आखिरी बार एक दशक से भी पहले संशोधित किया गया था. दूसरी दुनिया से संपर्क पर जब अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की बात आती है, तो इस प्रोटोकॉल में अस्पष्टता दिखती है. अगर कोई एलियन संपर्क की घटना होती है, तो  प्रोटोकॉल में वैज्ञानिकों को संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य प्रशासन से निर्देश लेने की बात कही गई है. 

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एलियंस को संदेश भेजने पर फोकस करने के बजाय नया SETI डिटेक्शन हब, एलियन लाइफफॉर्म से भेजे गए संभावित संदेशों के लिए संकेतों को स्कैन करेगा और उन संकेतों को अर्थ जोड़ने के लिए एक रूपरेखा बनाएगा. इसके साथ ही, प्रभावों का आकलन भी तैयार किया जाएगा.

 

मंगल पर पानी के निशान खोजने से लेकर, पृथ्वी जैसे एक्सोप्लैनेट की खोज तक, हाल के दशकों में अंतरिक्ष को समझने की दिशा में हुई प्रगति ने दूसरी दुनिया पर जीवन के विचार को और पुख्ता कर दिया है. इन संभावनाओं के साथ, वैज्ञानिक एक सदी से भी ज्यादा समय से एलियन से संपर्क करने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सफल नहीं हो सके हैं. 

इलियट का कहना है कि हम नहीं जानते कि हमें दूसरी दुनिया से कभी कोई संदेश आएगा भी या नहीं. हम यह भी नहीं जानते कि यह कब होगा. लेकिन हम यह जरूर जानते हैं कि हमें वैज्ञानिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर तैयार रहने की ज़रूरत है. क्योंकि ये एक ऐसी घटना है जो कल ही सच हो सकती है.

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