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इंसानों की विलुप्त हो चुकी प्रजाति के 5 लाख साल पुराने सबूत पोलैंड में मिले

पोलैंड की ट्यूनल वील्की गुफा (Tunel Wielki cave) से सालों पहले हड्डियां और प्रागैतिहासिक पत्थर के औजार मिले थे. इसकी नए सिरे से जांच करने पर पाया गया है कि ये औजार करीब 4.5- से 5.5 लाख साल पुराने हैं. इससे वैज्ञानिकों को औजार बनाने वाले लोगों के बारे में और भी जानकारी मिलने की उम्मीद है.

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 ट्यूनल वील्की गुफा से मिले औजार 4.5 से 5.5 लाख साल पुराने हैं. (Photo:Miron BogackiUniversity of Warsaw)
ट्यूनल वील्की गुफा से मिले औजार 4.5 से 5.5 लाख साल पुराने हैं. (Photo:Miron BogackiUniversity of Warsaw)

50 साल पहले पोलैंड (Poland) की एक गुफा में प्रागैतिहासिक पत्थर के औजार मिले थे. अब नए शोध के नतीजे कहते हैं कि ये औजार इस इलाके में अब तक खोजे गए सबसे पुराने औजार थे. मालोपोल्स्का (Małopolska) में ट्यूनल वील्की गुफा (Tunel Wielki cave) से मिले औजार करीब 4.5 लाख से 5.5 लाख साल पुराने हैं. इस डेटिंग से वैज्ञानिकों को इन औजारों को बनाने वाले लोगों के बारे में और भी जानकारी मिलने की उम्मीद है, कि वे कहां और कैसे रहते थे. 

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उदाहरण के लिए, अनुमान है कि ये औजार विलुप्त हो चुकी मानव प्रजाति होमो हीडलबर्जेंसिस (Homo heidelbergensis) द्वारा बनाए गए थे. इन्हें आमतौर पर निएंडरथल (Neanderthals) और आधुनिक मनुष्यों (होमोसेपियंस) दोनों का आखिरी पूर्वज माना जाता है.  

tunel wielki cave
2018 में ट्यूनल वील्की गुफा की फिर से जांच की गई (Photo: M. Bogacki/Polish Academy of Sciences)

पोलैंड में वारसॉ यूनिवर्सिटी (University of Warsaw) के पुरातत्वविद् माल्गोरज़ाटा कोट (Małgorzata Kot) का कहना है कि यह हमारे लिए विश्लेषण का एक बेहद अहम और दिलचस्प पहलू है. हम होमो हीडलबर्जेंसिस के जीवित रहने की संभावनाओं की सीमाओं का पता लगा सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि उन्होंने इन प्रतिकूल परिस्थितियों को किस तरह अपनाया होगा.

साइंटिफिक रिपोर्ट्स ( Scientific Reports) में प्रकाशित शोध के मुताबिक, ट्यूनल वील्की गुफा की खुदाई 1960 के दशक में की गई थी. 2016 में पुरातत्वविद एक बार फिर इस साइट पर लौटे. वहां पाए गए मैटीरियल की परतें होलोसीन काल की बताई गई थीं, यानी करीब 11,700 साल पहले की. लेकिन वारसॉ यूनवर्सिटी के पुरातत्वविद् क्लाउडियो बर्टो (Claudio Berto) के हिसाब से यह डेटिंग सही नहीं थी. उनहोंने दावा किया कि साइट से मिली जानवरों की हड्डियां करीब 40,000 साल से ज्यादा पुरानी थीं. 

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गुफा में पाई गई हड्डियां और औजार 5 लाख साल पुराने थे (Photo: M. Bogacki/Polish Academy of Sciences)

इसलिए 2018 में, माल्गोरज़ाटा कोट और उनकी टीम गुफा में लौटी और उन्होंने साइट की बारीकी से जांच की. उन्होंने विश्लेषण करने के लिए वहां से और हड्डियां इकट्ठा कीं. जांच के बाद, उन्होंने पाया कि ऊपरी परतों में जानवरों की हड्डियां प्लीस्टोसिन काल के अंत (Late Pleistocene) और होलोसीन (Holocene) काल की थीं. लेकिन नीचे की परत उससे भी ज्यादा पुरानी थी. इसमें पाई गई जानवरों की हड्डियां करीब 5 लाख साल पुरानी थीं. 

जिस परत से ये हड्डियां निकलीं, उसमें चकमक पत्थर के टुकड़े भी मिले. साथ ही इन पत्थरों पर वो निशान भी पाए गए जिनसे इन्होंने औजारों को आकार दिया होगा. वहां से कुछ तैयार औजार भी मिले, जैसे चाकू. कोट का कहना है कि चूंकि ये चीजें और हड्डियों एक ही परत में मिलीं, इसका मतलब है कि वह एक ही काल की थीं. 

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 उस दौर के लोग गुफाओं में खुद को सुरक्षित महसूस करते थे (Photo: M. Bogacki/Polish Academy of Sciences)

कोट के मुताबिक, गुफा में उस समय की कलाकृतियों को खोजना उम्मीद से परे है. ये हैरानी वाली बात थी कि पांच लाख साल पहले इस इलाके के लोग, गुफाओं में रहते थे. शिविर बनाने के लिए यह जगह ठीक नहीं थी. क्योंकि वहां नमी थी और तापमान भी कम था. साथ ही, गुफाएं प्राकृतिक आश्रय होती हैं, बंद होती हैं और सुरक्षा की भावना देती हैं.

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वहां ऐसे निशान भी मिले हैं जो ये संकेत दे सकते हैं कि वहां रहने वाले लोग आग का इस्तेमाल करते थे, जो शायद इन अंधेरी और नम जगह के लिए मददगार थी. टीम को उम्मीद है कि वे फिर से गुफाओं में जाएंगे और होमो हीडलबर्जेंसिस की हड्डियों की खोज करेंगे. 

 

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