ये बात साल साल 2017 की है. जब SpaceX के रॉकेट फॉल्कन-9 (Falcon-9) ने 16 मार्च को इकोस्टार-23 सैटेलाइट (Echostar 23 Satellite) को अंतरिक्ष में स्थापित किया था. स्पेसएक्स के हिसाब से यह दुर्लभ लॉन्च था, क्योंकि इसमें रॉकेट के पहले हिस्से की रिकवरी नहीं होनी थी. यानी रॉकेट का पहला स्टेज दोबारा उपयोग के लायक नहीं था. इसकी लॉन्चिंग फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से किया गया था.
लॉन्च के 34 मिनट बाद इकोस्टार-23 कम्यूनिकेशन सैटेलाइट फॉल्कन-9 रॉकेट से अलग हो गया. सैटेलाइट तो अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंच गया. लेकिन फॉल्कन-9 रॉकेट अंतरिक्ष में अनंत यात्रा पर निकल गया. तब इसकी ऊंचाई धरती से करीब 36 हजार किलोमीटर दूर थी. इसके बाद से यह रॉकेट धरती की कक्षा में लगातार चक्कर लगा रहा था. 6 सालों से चक्कर लगाने के बाद 24 घंटे पहले यह अमेरिका के बाजा कैलिफोर्निया के ऊपर आसमान में जलता हुआ दिखाई दिया. इसके वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे थे.
She’s breaking up, she’s breaking up!
— Steve Jurvetson (@FutureJurvetson) February 7, 2022
Around 1am, Gen saw this incredible spectacle streak across the Cabo sky for over a minute. It is a spacecraft breaking at 17,500 MPH. Various parts break off the bright main mass, and separate from differential drag in the upper atmosphere. pic.twitter.com/B53sHz1axM
यह रॉकेट धरती ऊपरी वायुमंडल में आते ही घर्षण की वजह से जलने लगा. टुकड़े होने लगे. सारे टुकड़े जल रहे थे. इस दौरान इस रॉकेट की गति करीब 28,156 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. इसे देखने वाले लोगों ने सोचा कि कोई उल्कापिंड है, जो धरती की तरफ तेजी से आ रहा है. लेकिन बाद में पता चला कि यह तो इंसानों द्वारा निर्मित 'उल्कापिंड' था, जो धरती के ऊपर आतिशबाजी करते हुए आ रहा था.
इकोस्टार-23 को 15 साल काम करना था. जिसमें से 6 साल बीत चुके हैं. यह अब भी काम कर रहा है. पर फॉल्कन-9 रॉकेट 6 साल के बाद धरती पर आखिरकार आ ही गया. लेकिन सही सलामत नहीं, जल भुनकर. किसी को यह नहीं पता चला कि यह कहां गिरा. लेकिन एक्सपर्ट्स की माने तो यह कैलिफोर्निया में दिखा जरूर है लेकिन यह गिरा होगा प्रशांत महासागर में जाकर. इसलिए अभी तक कहीं से किसी तरह के हादसे की कोई खबर नहीं आई है.
फॉल्कन-9 (Falcon-9) SpaceX का सबसे भरोसेमंद रॉकेट है. यह धरती की निचली कक्षा यानी लोअर अर्थ ऑर्बिट में 22,800 किलोग्राम का सैटेलाइट ले जा सकता है. जबकि जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में 8300 किलोग्राम तक और मंगल ग्रह पर जाने वाले रोवर-लैंडर-ऑर्बिटर का 4020 किलोग्राम वजन उठा सकता है. यह रॉकेट अब तक 139 बार लॉन्च किया जा चुका है. जिसमें 99 बार इसने वापस सफल लैंडिंग की है. वापस आने वाले 99 रॉकेटों में से 79 रॉकेटों को दोबारा अंतरिक्ष में भेजा जा चुका है.