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आकाशीय बिजली धरती पर गिरा रही है अनोखा खनिज, पहली बार वैज्ञानिकों ने खोजा

आसमान से बिजली गिरने और चीज़ों के खाक होने के बारे में आपने कई बार सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आकाशीय बिजली में इतनी ऊर्जा है कि ये कोई नया खनिज भी बना सकती है. वैज्ञानिक बता रहे हैं कि बिजली की वजह से पृथ्वी पर एक अलग तरह का फॉस्फोरस बना है.

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पेड़ पर गिरी थी बिजली और बना अनोखा खनिज (Photo: Getty)
पेड़ पर गिरी थी बिजली और बना अनोखा खनिज (Photo: Getty)

फ्लोरिडा (Florida) के पश्चिमी तट पर एक पेड़ पर बिजली गिरी, जिससे एक अलग तरह का फॉस्फोरस (phosphorus) मैटीरियल बन गया. इस मैटीरियल को पृथ्वी पर पहले कभी देखा नहीं गया. यह पूरे खनिज समूह का प्रतिनिधित्व कर सकता है.

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ये मैटीरियल जो कैल्शियम फास्फाइट (CaHPO3) से काफी मिलता जुलता है, एक फुल्गुराइट (Fulgurite) के अंदर फंसा हुआ पाया गया था. फुल्गुराइट एक तरह का "मेटल ग्लोब" होता है. जब तेज आकाशीय बिजली किसी तरह की रेत, सिलिका और चट्टान से टकराती है, तो उस प्रतिक्रिया से फुल्गुराइट्स बनते हैं. इन्हें 'fossilized lightning' fulgurites भी कहा जाता है. लेकिन इनके अंदर छिपी किसी अनोखी चीज़ को खोजना वाकई सामान्य नहीं है. 

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इसी फुल्गुराइट से मिला था मैटीरियल (Photo: Matthew Pasek)

दक्षिण फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी भूवैज्ञानिक मैथ्यू पासेक (Matthew Pasek) का कहना है कि हमने इस मैटीरियल को पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से कभी नहीं देखा है. हालांकि इसके जैसे खनिज उल्कापिंडों और अंतरिक्ष में पाए जा सकते हैं, लेकिन हमने कभी यहां ऐसा कुछ भी कहीं भी नहीं देखा है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि पेड़ पर बिजली गिरने से उसमें कार्बन जला, साथ ही उसकी जड़ों के चारों ओर बना लोहा भी जल गया. इस तरह का कैल्शियम फास्फाइट बाकी हाई-एनर्जी सिनेरिये में अच्छी तरह से बन सकता है, और फॉस्फोरस चक्र में अहम  भूमिका निभा सकता है.

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lightning
फ्लोरिडा को दुनिया की लाइटनिंग कैपिटल कहा जाता है (Photo: Getty)

कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट (Communications Earth & Environment.) में प्रकाशित शोध के मुताबिक, लैब में इस CaHPO3 को फिर से बनाने की कोशिश की गई जो असफल रही. इससे ये पता चला कि इस तरह के दुर्लभ मैटीरियल को बनने के लिए बहुत ही खास परिस्थितियों और समय की ज़रूरत होती है. इसे फिर से देखने के लिए हमें एक बार फिर बिजली गिरने का इंतजार करना पड़ सकता है.

इस नए फॉस्फोरस मौटीरियल से वैज्ञानिक यह भी जान पाएंगे कि फॉस्फोरस को कैसे रिड्यूस किया जाता है. यानी, अलग-अलग तापमान पर किसी कैमिकल रिएक्श के ज़रिए इसे बाकी अवस्थाओं में कैसे बदला जा सकता है. साथ ही, इस रिसर्च से बिजली के रूप और उसकी शक्ति के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलती है. 

 

ऐसा पहली बार नहीं है कि इस घटना से कोई मैटीरियल बना हो जिसमें वैज्ञानिकों ने काफी रुचि दिखाई हो. पासेक कहते हैं कि यह समझना ज़रूरी है कि बिजली में कितनी ऊर्जा होती है, क्योंकि तभी हम जान पएंगे कि बिजली गिरने से औसतन कितना नुकसान हो सकता है और यह कितना खतरनाक होता है.

उन्होंने कहा कि फ्लोरिडा को दुनिया की लाइटनिंग कैपिटल कहा जाता है, यानी यहीं सबसे ज़्यादा बिजली गिरने की घटनाएं होती हैं. और बिजली से सुरक्षा ज़रूरी है. अगर बिजली चट्टान को पिघला सकती है तो वो लोगों को भी पिघला सकती है.

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