न्यूजीलैंड के नॉर्थ आइलैंड में मौजूद कऊरीटूथी स्ट्रीम के पास 3500 से ज्यादा ईल मछलियां मरी मिली हैं. इस साल यह दूसरी बार हुआ है. पहली घटना करीब एक महीने पहले न्यूजीलैंड के दूसरे छोर पर हुई थी. पिछली बार मारी गई मछलियों की जांच करने पर पता चला था कि वहां कुछ जहरीला पदार्थ था. भारी मात्रा में प्रदूषण था.
अभी जो मछलियां मारी गई हैं, उनके मौत की वजह फिलहाल पता नहीं चल पाई है. ये मछलियां एक स्ट्रीम में मरी मिली. इस स्ट्रीम की देखभाल करने वाले स्थानीय ग्रुप की सदस्य होना एडवर्ड कहती हैं कि स्ट्रीम के पानी की गुणवत्ता में लगातार कमी आ रही है. ईल मछलियों की मौत के बाद पानी के अप और डाउनस्ट्रीम की जांच की गई.
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पानी में घुले ऑक्सीजन की भी जांच की गई. पता चला कि स्ट्रीम में एल्गी यानी काई की मात्रा तेजी से बढ़ रही है. जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है. स्ट्रीम के ज्यादातर हिस्से में या तो पानी में बहाव है. या है ही नहीं. बहाव के नहीं होने का मतलब है ऑक्सीजन की कमी. अन्य कारणों की भी जांच चल रही है.
पिछले दो साल में मछलियों के सामूहिक मौत के मामले बढ़े
एडवर्ड का कहना है कि पानी में जहर, प्रदूषण आदि से इनकार नहीं किया जा सकता. लेकिन इसी तरह ये मछलियां मरती रहेंगी, तो स्ट्रीम से पानी समंदर तक जाएगा. आसपास का ईकोसिस्टम खराब हो जाएगा. पिछले साल दिसंबर में जापान में करीब 1300 टन सार्डीन्स और मैकेरेल मछलियां तट के पास मरी मिली थीं.
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इससे पहले टेक्सास के गल्फ कोस्ट के पास हजारों मछलियां जून महीने में मरी मिली थीं. पिछले साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया की सबसे लंबी नदीं में लाखों मछलियों के शव देखने को मिले थे. साल 2022 में पोलैंड और जर्मनी के बीच बहने वाली ओडर नदी में 300 टन मछलियों के शव मिले थे.
सही स्थिति में ये मछलियां 52 वर्षों तक जीवित रह सकती हैं
2022 में एक स्टडी हुई. पता चला कि मिनिसोटा और विस्कॉन्सिन की झीलों में मछलियों की मौत पिछले दस साल में बढ़ गई है. इसके अलावा अलग-अलग जगहों से मछलियों के सामूहिक मौत की खबर ज्यादा आने लगी. होना एडवर्ड ने बताया कि स्ट्रीम में नई जन्मी ईल मछिलयों के जिंदा रहने की उम्मीद वैसे भी कम होती है. लेकिन इतनी मात्रा में मौत होना चिंता का विषय है.
क्योंकि ये मछलियां पूरी स्ट्रीम पार करके समंदर के किनारे पहुंच कर मरी हैं. क्योंकि साफ पानी की ईल मछलियां अगर सही स्थिति में रहें तो ये 52 वर्षों तक जीवित रह सकती हैं. इन मछलियों के मौत के पीछे बढ़ता हुआ तापमान भी वजह हो सकती है. क्योंकि आजकल मरीन हीटवेव के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.