पृथ्वी के तीन टेलिस्कोप को मंगल ग्रह से एलियन संदेश मिला. अब वैज्ञानिक इन संदेशों को डिकोड करने में लगे हैं. संदेश जटिल हैं, इसलिए उन्हें डिकोड करने में समय लग रहा है. एलियन के इन संदेशों को मंगल ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगा रहे एक्सोमार्स स्पेसक्राफ्ट ने रिसीव किया था. उसके बाद उसने संदेश को पृथ्वी पर भेजा.
एक्सोमार्स स्पेसक्राफ्ट यूरोपियन स्पेस एजेंसी का अंतरिक्षयान है, जो मंगल ग्रह की स्टडी करने के लिए लाल ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है. असल में यह प्रोजेक्ट है, जिसे आर्टिस्ट डैनिएला डे पॉलिस ने बनाया है. इसका नाम है अ साइन इन स्पेस. इनके लिए एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर से एक संदेश 24 मई को धरती पर भेजा गया. ब
16 मिनट बाद यह संदेश सेटी इंस्टीट्यूट के एलेन टेलिस्कोप एरे, ग्रीन बैंक ऑब्जरवेटरी के रॉब्टर सी. बायर्ड ग्रीन बैंक टेलिस्कोप और मेडिसिना रेडियो एस्ट्रोनॉमिकल स्टेशन ऑब्जरवेटरी को मिला. हर टेलिस्कोप को मिले संदेश को फाइलकॉयन सर्वर पर डाला गया. जल्द ही इन संदेशों को आम जनता के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा.
बेहद जटिल है संदेश, आसानी से नहीं होगा डिकोड
असल में ये संदेश बेहद जटिल और रॉ हैं. शुरुआत में आप इन संदेशों को सुनेंगे तो आपको लगेगा कि क्या ही बकवास आवाज सुन रहे हैं. लेकिन वैज्ञानिक इन जटिल संदेशों को डिकोड करने का सिमुलेशन कर रहे हैं. ताकि भविष्य में कभी एलियन के संदेश आएं तो उन्हें डिकोड करने की प्रैक्टिस रहे. उनका मतलब समझने का सटीक प्रयास हो सके.
संदेशों को पढ़ने की प्रैक्टिस की जा रही है अभी से
वैज्ञानिक इसे जब जनता के लिए सार्वजनिक करेंगे, तब वह यह भी बताएंगे कि इन संदेशों को डिकोड कैसे करना है. वैज्ञानिकों का मानना है कि जब कभी भी एलियन संदेश आएंगे, तब वह उत्साह वाला पल होगा. ऐसे संदेशों को सार्वजनिक करने में ही भलाई होगी. ताकि लोग जान सकें कि दूसरी दुनिया के लोग हमसे क्या चाहते हैं.
एक और प्रोजेक्ट है रेडियो सिग्नल पढ़ने का
इस प्रोजेक्ट के अलावा एक और प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसका नाम है डिसकॉर्ड सर्वर. वहां भी लोग इसी तरह से एलियन संदेशों को समझने का सिमुलेशन कर रहे हैं. वो रेडियो सिग्नल को समझने का प्रयास कर रहे हैं. ये बात तो तय है कि कुछ ही दिनों में कोई न कोई जटिल एलियन संदेशों को डिकोड करने का आसान तरीका निकाल लेगा.