अंतरिक्ष के अल्ट्राफास्ट बादल (Ultrafast Cloud) हमेशा से एस्ट्रोनॉमर्स के लिए अनसुलझे सवाल की तरह रहे हैं. ये बादल, गैस के बाकी बादलों से काफी अलग हैं, क्योंकि इनकी गति बहुत तेज है. इन्हें HVC (High-Velocity Clouds) के तौर पर जाना जाता है.
अंतरिक्ष विशेषज्ञों को ये बादल हैरान करते हैं, क्योंकि इन बादलों में अजीब तरह का वेग है, जो आकाशगंगा की गति के साथ मेल नहीं खाते. हाल ही में एक शोध किया गया है, जिससे पता चलता है कि ये अल्ट्राफास्ट स्पेस क्लाउड कैसे बने होंगे.
शोध के मुताबिक, अल्ट्राफास्ट स्पेस क्लाउड किसी तारे की मौत का नतीजा हो सकता है, जिसने करीब 532 प्रकाश वर्ष दूर, 1 लाख साल पहले एक न्यूट्रॉन तारे को जन्म दिया था. उच्च-वेग वाले बादल (HVC) हाइड्रोजन गैस की सांद्रता होते हैं जो अक्सर बड़े कॉम्प्लेक्स में रहते हैं.
यूनिवर्सिटी स्पेस रिसर्च एसोसिएशन के एक खगोलशास्त्री और शोध के मुख्य लेखक जोआन श्मेल्ज़ (Joan Schmelz) का कहना है कि एचवीसी को समझने का एक ही सुराग है, वो है दूरी. अगर हम यह जान लें कि ये बादल कितनी दूर हैं, तो कई रहस्य सुलझ जाएंगे.
MI नामक एक एचवीसी पर फोकस करते हुए, श्मेल्ज़ और उनके सहयोगियों ने एचवीसी की संरचना के अंदर एक कैविटी की खोज की. माना जा रहा है कि यह कैविटी एक सुपरनोवा की वजह से बनी होगी. सुपरनोवा उस विस्फोट होता है जो किसी तारे के मरने पर होता है.
एमआई में कैविटी के केंद्र के पास एक विशाल तारा 56 Ursae Majoris है, जो एक बाइनरी सिस्टम का हिस्सा है. इसमें एक और तारा है जो मुश्किल से दिखता है. इसे न्यूट्रॉन स्टार के तौर पर जाना जाता है. यह एक बेहद घना तारकीय अवशेष है जो तब बनता है जब एक बड़ा तारा मरने वाला होता है और सुपरनोवा विस्फोट करता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस सुपरनोवा से ही MI तेजी से निकला होगा.
अब तक ये माना गया है कि सुपरनोवा में इतनी शक्ति नहीं होती कि उससे एचवीसी इतनी गति मिले. लेकिन MI इसका अपवाद हो सकता है.
एचवीसी एक्सपर्ट विशेषज्ञ और शोध के सह लेखक गेरिट वर्चुर (Gerrit Verschuur) का कहना है कि MI के लिए हम ऐसा इसलिए कह सकते हैं क्योंकि हाई वेलोसिटी वाले बादलों की दिशा में लो-वेलोसिटी वाली गैस की खोज कर रहे थे.अगर यह सुपरनोवा मॉडल सही है, तो हमें MI की सटीक दूरी का पता चल सकता है.
Mysterious high-speed gas cloud might be the result of an explosive stellar death https://t.co/e89RPqFAJA pic.twitter.com/PPM4VEZ5x8
— SPACE.com (@SPACEdotcom) October 6, 2022
शोध जल्द ही एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित होगा.