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16 बार पृथ्वी का चक्कर लगाने वाले रूसी एस्ट्रोनॉट की जमीन छूने से पहले ऐसी मौत... दुनिया रह गई थी हैरान

रूसी अंतरिक्ष यात्री व्लादिमीर अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मरने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे. उनका विमान 7 किमी. की ऊंचाई से धरती पर गिरा था. यहां हम आपको बता रहे है कि स्पेस मिशन पर मरने वाले पहले शख्स के साथ आखिर क्या हुआ था.

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फोटो- Getty Images
फोटो- Getty Images

अंतरिक्ष यात्रा और अंतरिक्ष यात्रियों से जुड़े कई किस्से इतिहास में दर्ज हैं. इन महान अंतरिक्ष यात्रियों में एक नाम व्लादिमीर मिखाइलोविच कोमारोव (Vladimir Mikhaylovich Komarov) का भी है. रूसी अंतरिक्ष यात्री व्लादिमीर अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मरने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति थे. साल 1967 के 24 अप्रैल को अंतरिक्ष की अपनी दूसरी यात्रा से वापसी में स्पेसक्राफ्ट के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से  उनकी मौत हो गई थी. 

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16 बार पृथ्वी के चारों ओर उड़ाया था विमान

एक सोवियत परीक्षण पायलट, एयरोस्पेस इंजीनियर और कॉस्मोनॉट व्लादिमीर ने  1964 में एक से अधिक चालक दल के सदस्यों को ले जाने वाले पहले अंतरिक्ष यान Voskhod 1 की कमान संभाली. कोमारोव ने तीन सदस्यीय अंतरिक्ष यान Voskhod को 16 बार पृथ्वी के चारों ओर उड़ाया था. जब उन्हें सोयुज 1 के एकल पायलट के रूप में चुना गया तब वह वह दो बार अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए . 12 अक्टूबर, 1964 को, द्वितीय विश्व युद्ध के अनुभवी और अंतरिक्ष यात्री के रूप में ट्रेनिंग के लिए चुने गए 18 लोगों में से एक कोमरोव ने साल 1967 में कोमारोव ने अंतरिक्ष यात्रा के दौरान गंभीर दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवा दी. 

मिशन पूरा हो गया था लेकिन...

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रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, जब दुर्घटना हुई तब तक सोयुज-1 का उड़ान कार्यक्रम, जिसमें कक्षीय युद्धाभ्यास और सिस्टम परीक्षण शामिल था, सफलतापूर्वक पूरा हो गया था. इसके बाद 24 अप्रैल 1967 को इस अंतरिक्ष यान को सामान्य रूप से पृथ्वी पर वापस लाया जा रहा था. जब सोयुज-I 23,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचा, तो एक पैराशूट तैनात किया जाना था, जो कोमारोव को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लाता लेकिन इस बीच पैराशूट की लाइन्स उलझ गई और कोई बैकअप पैराशूट नहीं था. पैराशूट खुलने में विफल रहा और विमान 4.5 मील (7.24 किलोमीटर) नीचे धरती पर आ गिरा.

7 किलोमीटर की ऊंचाई से गिरा विमान

द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार घटना को लेकर रूस "प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जब पैराशूट का मुख्य गुंबद सात किलोमीटर की ऊंचाई पर खुला, तो पैराशूट की पट्टियां मुड़ गईं, और अंतरिक्ष यान बहुत तेज़ गति से नीचे धरती पर गिरा, जिसके परिणामस्वरूप कोमारोव की मृत्यु हो गई." यह माना जाता है कि सोयुज-1 का वजन पहले के रूसी यान की तुलना में काफी अधिक था, और इसमें सामान्य से कम सुरक्षा मार्जिन रहा होगा. लेकिन अंतरिक्ष यान की लैंडिंग अब अक्सर होने लगी है और कठिनाइयों की कोई रिपोर्ट नहीं आई है.

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फोटो- Getty Images

अलविदा तक नहीं कह सकी पत्नी

history.com की रिपोर्ट के अनुसार मॉस्को में कोमारोव के लिए व्यापक सार्वजनिक शोक मनाया गया और उनकी राख को क्रेमलिन की दीवार में दफना दिया गया. उनके परिवार के लिए स्थिति और भी दुखद थी क्योंकि कोमारोव की पत्नी को सोयुज I लॉन्च के बारे में तब तक नहीं बताया गया जब तक कि कोमारोव ऑर्बिट में पहुंच नहीं गए थे. ऐसे में उसे अपने पति को अलविदा कहने का मौका नहीं मिला था.

ठीक दो साल बाद चांद पर उतारा इंसान

दुर्घटना की घोषणा के कुछ ही मिनटों के भीतर, सरकार ने वरिष्ठ राजनेताओं और वैज्ञानिकों द्वारा हस्ताक्षरित कर्नल कोमारोव का एक मृत्युलेख जारी किया. मृत्युलेख में कहा गया है: "हम हमेशा अपनी मातृभूमि के वफादार बेटे, अद्भुत कम्युनिस्ट, अंतरिक्ष के साहसी खोजकर्ता, और दोस्त की याद को संजोकर रखेंगे. वह हमेशा, साहस और वीरता का एक उदाहरण रहेंगे." उनका नाम हमारे महान समाजवादी देश के गौरव को नई उपलब्धियों के लिए प्रेरित करेगा." इसके बाद सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम जारी रखे और ठीक दो साल बाद अमेरिका ने चंद्रमा पर मानव को उतारा. 

मरणोपरांत सम्मान

कोमारोव को अंतरिक्ष कार्यक्रम में उनके योगदान के लिए कई अलग-अलग देशों के स्मारक प्रथम दिवस कवर और टिकटों पर चित्रित किया गया है. एक डाक टिकट यूएसएसआर द्वारा भी 1964 में उनके सम्मान में जारी किया गया था. इसके अलावा चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर एक क्रेटर (विविर) का नाम भी उनके नाम पर रखा गया है.

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