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क्या एवरेस्ट पर सबसे पहले पहुंचने वाला शख्स कोई और ही था? 75 साल बाद चोटी के करीब मिली एक लाश ने उलझा दी गुत्थी

अब तक हम जानते रहे कि दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ एवरेस्ट पर सबसे पहले सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे ने फतह पाई थी. लेकिन जीत की ये कहानी थोड़ी उलझी हुई है. कई एक्सपर्ट मानते हैं कि इससे 30 साल पहले ही दो ब्रिटिश पर्वतारोही एवरेस्ट चढ़ चुके. लौटते हुए दोनों गायब हो गए. साल 1999 में इनमें से एक पर्वतारोही की लाश बर्फ की दरार में दबी मिली.

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एवरेस्ट पर हर साल बहुत से लोग चढ़ने की कोशिश करते हैं. सांकेतिक फोटो (AFP)
एवरेस्ट पर हर साल बहुत से लोग चढ़ने की कोशिश करते हैं. सांकेतिक फोटो (AFP)

हर साल, सैकड़ों एडवेंचर प्रेमी एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करते हैं. हजारों लोग बेस कैंप पहुंचकर लौट चुके होते हैं. जो बाकी रहते हैं, वे किसी न किसी पड़ाव से लौटते हैं. कई लोग रास्ते में किसी हादसे का शिकार होकर जान गंवा देते हैं. इसके बाद भी पहाड़ उन्हें बख्शते नहीं. अक्सर ये लाशें अपने घर, अपने शहर पहुंचने की बजाए बर्फ में गुम हो जाती हैं और सालों बाद मिलती हैं, जब कोई उसे पहचानता भी न हो. ऐसी ही एक लाश 1999 में मिली, लेकिन उसे पहचान लिया गया. ये ब्रिटिश पर्वतारोही जॉर्ज मैलोरी थे. 

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ब्रिटेन के चेशायर में जन्मे मैलोरी ब्रिटिश आर्मी में लेफ्टिनेंट थे, जब पहला विश्व युद्ध छिड़ा. युद्ध खत्म होने के बाद वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी की तरह काम करने लगे. लेकिन जल्द ही उनका मन इससे भी भर गया, और वे एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी में जुट गए.

इस काम में उनके साथ थे एंड्र्यू इर्विन. पहली बार इस पर्वतारोही जोड़े ने बिना ऑक्सीजन चढ़ने की ठानी. यहां तक कि बर्फ के तूफानों को पार करते हुए वे लगभग 27 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच भी गए. ये अपने-आप में एक रिकॉर्ड था. 

was george mallory the first to climb everest instead of edmund hillary
ब्रिटिश पर्वतारोही जॉर्ज मैलोरी. फोटो (Getty Images)

इसके बाद पहाड़ चढ़ना मुश्किल होने लगा. हवा में ऑक्सीजन लगातार कम हो रही थी. सांस लेना दूभर होने पर उन्हें नीचे आना पड़ा. इसके बाद ऑक्सीजन लेकर वे ऊपर गए, लेकिन साथियों की लगातार मौत की वजह से एक के बाद एक तीन बार वे चोटी के करीब पहुंचकर लौट गए. मैलोरी अब 37 साल के हो चुके थे. इस बार उन्होंने आर-पार का तय कर लिया. एक बड़ी टीम साथ चली, जिसमें डॉक्टर और शेरपा भी थे, लेकिन मौसम लगातार बिगड़ता गया और लोग एक-एक करके पीछे हटते गए. 

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अब सिर्फ मैलोरी और इर्विन बाकी थे. 8 जून को वे 6वें कैंप से निकले. वे 28 हजार फीट से भी ऊपर जा चुके थे. उनके पीछे एक और पर्वतारोही नोएल ऑडेल थे. वे देख पा रहे थे कि कुछ ही देर में दोनों शिखर पर होंगे. इसके बाद ऑडेल बर्फ की आंधी में पिछड़ गए और वापस लौट गए. यही आखिरी बार था, जब मैलोरी और इर्विन को देखा गया. इसके बाद उनकी कोई खबर नहीं मिली. 

नीचे लौटे हुए ऑडेल ने इस बारे में खबर की. खोजबीन भी हुई लेकिन दोनों का कुछ पता नहीं लगा. अंदाजा लगाया जाता रहा कि वे बर्फ में ही खत्म हो गए होंगे. इस बीच कइयों ने दावा किया कि अगर इतनी ऊंचाई तक पहुंचे थे, तो वही लोग एवरेस्ट चढ़ने वाले सबसे पहले पर्वतारोही कहलाएंगे, लेकिन ज्यादातर ने इस दावे को खारिज कर दिया. 

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हर साल सैकड़ों एडवेंचर प्रेमी एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करते हैं. सांकेतिक फोटो (Getty Images)

लगभग 75 साल बाद 1999 में मैलोरी की लाश एक बर्फ की दरार में मिली. वे तब लगभग 27 हजार फीट की ऊंचाई पर थे. इसके बाद फिर एक बार पहले एवरेस्ट चढ़ने वाले दावे पर बात होने लगी. बर्फ की दरार में दबा होना, यानी इससे ऊंचाई से वे गिरे होंगे. हालांकि मैलोरी ने जो कैमरा साथ रखा था, वो उनके पास नहीं था. इससे ये बात फिर रहस्य बनकर रह गई कि क्या वे एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने के बाद खत्म हुए थे.

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एवरेस्ट पर चढ़ने की चाह ने कितनों की जान ली, इसका कोई हिसाब-किताब नेपाल के पास नहीं है. बहुत से पर्वतारोही, यहां अक्सर आने वाले बर्फीले तूफ़ान का शिकार होते हैं. बीच-बीच में कोई डेटा आता है, जो बताता है कि पहाड़ पर नीचे से ऊपर तक लाशों का ढेर लगा हुआ है. चूंकि मौसम काफी प्रतिकूल होता है, ऐसे में लाशों को ढोकर लाना मुमकिन नहीं.

बर्फ में दबा होने की वजह से बॉडी दशकों तक खराब हुए बगैर वैसे ही पड़ी रहती है. तब हालात ये हो जाते हैं कि नए आ रहे पर्वतारोहियों को लाशों पर पैर रखते हुए ऊपर की तरफ जाना पड़ता है. कई बार जीत हासिल करके लौटे हुए लोग भी तूफानी मौसम में फंसकर जान गंवा बैठते हैं. 

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