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चंद्रमा के खनिजों का बना रहे थे नक्शा.. वैज्ञानिकों को मिला पानी और ऑक्सीजन का खजाना

चंद्रमा पर खनिजों का नक्शा बनाने के बाद वैज्ञानिकों को पूरी सतह पर पानी मिला है. इसके साथ ही मिला है हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बनने वाला हाइड्रोक्सिल. ये वहां भी मिला है, जहां पर सूरज की रोशनी काफी तेज है. यानी बहुत तेज रोशनी और गर्मी में भी पानी के ये कण खत्म नहीं हो रहे हैं.

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बाएं.. चंद्रमा की ऊबड़-खाबड़ सतह. दाहिने खनिजों का नक्शा, जिसमें पानी की मौजूदगी का पता चला है. (सभी फोटोः NASA)
बाएं.. चंद्रमा की ऊबड़-खाबड़ सतह. दाहिने खनिजों का नक्शा, जिसमें पानी की मौजूदगी का पता चला है. (सभी फोटोः NASA)

चंद्रमा की सतह पर चारों तरफ पानी और उसके अलग रूप हाइड्रोक्सिल (Hydroxyl) की भारी मात्रा मिली है. यह खुलासा तब हुआ, जब वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर मौजूद खनिजों का नक्शा बनाया. इससे भविष्य में चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति, इतिहास और अभी जो भी कुछ भी वहां घट रहा है, उसे समझने का बेहतर मौका मिलेगा. 

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भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों की उड़ान को एक नया मकसद मिलेगा. प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट रोजर क्लार्क कहते हैं कि भविष्य के एस्ट्रोनॉट्स चंद्रमा के इक्वेटर यानी भूमध्यरेखा के पास पानी का इस्तेमाल करें. क्योंकि वो सतह से उसे निकालने की तकनीक ले जाएंगे. या फिर ध्रुवीय इलाकों में मौजूद क्रेटर्स से पानी निकाल लें. 

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Water Discovery on Moon

क्लार्क ने कहा कि सिर्फ यह जान लेने से की चंद्रमा पर पानी कहां है, हम उसके बारे में सबकुछ नहीं जान पाएंगे. साथ ही चंद्रमा की सतह और अंदरूनी परतों का इतिहास जानना होगा. ताकि एस्ट्रोनॉट्स यह भी पता कर सकें कि और कहां पानी मिल सकता है. जबकि, चंद्रमा देखने में बेहद सूखा, नमी की कमी वाला पथरीला ग्रह है. 

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सतह के नीचे भारी मात्रा ऑक्सीजन, हाइड्रोजन 

क्लार्क ने कहा कि चांद पर न तो तालाब हैं, न झील, न ही नदियां. लेकिन हर बार स्टडी में ये पता चलता है कि वहां पर भारी मात्रा में पानी मौजूद है. जो सतह में फंसा हुआ है. हमें अभी पूरी तरह से नहीं पता है लेकिन चंद्रमा के अन्य हिस्सों में भी पानी छिपा हो सकता है. ये भी हो सकता है कि भारी मात्रा में ऑक्सीजन भी हो. क्योंकि हाइड्रोक्सिल मिला है. 

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Water Discovery on Moon

खनिजों से निकाल सकते हैं पानी और ऑक्सीजन

हाइड्रोक्सिलन एक कण ऑक्सीजन और एक कण हाइड्रोजन से मिलकर बनता है. चंद्रमा के खनिज के साथ हाइड्रोक्सिल बंध कर सतह के नीचे भारी मात्रा में मौजूद है. जरूरत है तो खनिजों के साथ इन्हें निकालकर अलग करने की. फिर आप इससे पानी और ऑक्सीजन बना सकते हैं. ये सबकुछ चांद की सतह में है. 

पत्थरों में भी छिपे हैं ऑक्सीजन और पानी

इतना ही नहीं वैज्ञानिकों ने चंद्रमा की सतह पर इग्नीयस पत्थर पाइरोक्सीन (Pyroxene)  भी खोजा है, इसमें भी पानी के संकेत मिले हैं. लेकिन यह निर्भर करता है सूरज की पड़ने वाली रोशनी पर. जिधर ज्यादा रोशनी होगी, उधर कण कम मिलेंगे, अधेंरे वाले हिस्से में ज्यादा मिलेंगे. 

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