बेशक... ब्लैक पाउडर (Black Powder) खतरनाक होता है. सामान्य भाषा में कहें तो यह एक देसी बारूद होता है. जिससे बम, पटाखे, विस्फोटक आदि तैयार होते हैं. इसे ही गन पाउडर (Gun Powder) कहते हैं. यह एक तरह का रसायनिक विस्फोटक (Chemical Explosive) है. इसे बनाने के लिए सल्फर (Sulfur), कार्बन (Carbon) या चारकोल (Charcoal) और पोटाश यानी पोटैशियम नाइट्रेट (Potassium Nitrate) की जरुरत होती है.
इसका इस्तेमाल फायरआर्म्स, तोप के गोले, रॉकेटरी और पाइरोटेक्नीक में सामान्य तौर पर इस्तेमाल होता है. कुछ जगहों पर इसका उपयोग खनन और सड़क निर्माण के समय विस्फोट के लिए होता है. वैसे तो इसे कम तीव्रता का विस्फोटक मानते हैं, लेकिन तीव्रता बढ़ाने के लिए अन्य रसायनों का इस्तेमाल होता है. 19वीं सदी के मध्य तक इसका इस्तेमाल काफी ज्यादा होता था.
इसके साथ एक ही दिक्कत थी कि जब यह फटता था तब धुआं बहुत आता था. इसलिए आजकल इसका बेहद हल्का स्वरूप पटाखों और आतिशबाजी में इस्तेमाल होता है. अब कम धुएं वाले विस्फोटक आ गए हैं. कुछ तो बिना धुएं के ही फट जाते हैं. इसके बाद जो विस्फोटक आए उनमें सबसे ज्यादा फेमस हुआ डायनामाइट (Dynamite) और अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate).
ब्लैक पाउडर का कई जगहों पर होता है इस्तेमाल
असल में ब्लैक पाउडर (Black Powder) तेजी से जलता है. किसी भी तरह के प्रोपेलेंट की तरह उपयोग किया जा सकता है. इसलिए दिवाली के रॉकेट को देखिए... जब तक उसमें भरा बारूद जलता रहता है, वह तेजी से ऊपर जाता रहता है. लेकिन इसी बारूद को किसी बंद धातु या डिब्बे में खतरनाक चीजों के साथ रखकर विस्फोट किया जाए तो यह घातक सिद्ध हो सकता है. जैसे- कूकर बम, रस्सी बम या पाइप बम. आमतौर पर ऐसे देसी बमों का उपयोग नक्सली करते हैं.
चीन ने बनाया था सबसे पहले ब्लैक पाउडर
आजकल इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल प्रैक्टिस के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गोलियों में होता है. सिग्नल फ्लेयर में होता है. कहते हैं गन पाउडर यानी ब्लैक पाउडर (Black Powder) को सबसे पहले चीन (China) में बनाया गया था. 9वीं सदी में तांग साम्राज्य के समय इसे बनाया गया था. उसके बाद से लगातार इसमें बदलाव आता चला गया. 11वीं सदी में सॉन्ग साम्राज्य ने इसे और ज्यादा बेहतर बनाया. इसमें लहसुन (Garlic) और शहद (Honey) भी मिलाया गया. ताकि आग की तेज लपटें निकल सकें.
फिर मंगोलों ने शुरू किया बनाना...107 तरीके ईजाद किए
साल 1240 से 1280 के बीच मंगोलियाई घुसपैठियों ने इस्लामिक देशों में ब्लैक पाउडर (Black Powder) का इस्तेमाल किया. मंगोल इस बात से हमेशा इंकार करते रहे कि उन्होंने चीन से इसका आइडिया लिया है. सीरिया के हसन अल-रामाह ने ब्लैक पाउडर बनाने के 107 तरीके ईजाद किए. उन्होंने इसका जिक्र अपनी किताब al-Furusiyyah wa al-Manasib al-Harbiyya (The Book of Military Horsemanship and Ingenious War Devices) में किया है.
इसमें 22 तरह के तरीके तो सिर्फ रॉकेट्स के लिए थे. जिनका इस्तेमाल जंग के समय किया जाता था. इस किताब में फ्यूज, देसी बम, नफ्था पॉट्स, फायर लांसर्स और टॉरपीडो का भी जिक्र था. ब्लैक पाउडर का सबसे पहला इस्तेमाल 1260 में ऐन जलूत के जंग (Battle of Ain Jalut) में तोप में हुआ था. जिसमें मामलुक लोगों ने इसका इस्तेमाल मंगोलियाई योद्धाओं के खिलाफ किया था. पहली बार तोप में इस्तेमाल.
यूरोपीय सेनाओं ने भी किया था भरपूर इस्तेमाल
यूरोप में 1267 के आसपास ब्लैक पाउडर (Black Powder) की खोज हो चुकी थी. कहते हैं कि 1241 में मंगोल और यूरोपीय सेनाओं में हुए मोही के युद्ध में इसका उपयोग हुआ था. मंगोलों ने इस्तेमाल किया था. इस्तेमाल होता रहा. ब्लैक पाउडर विकसित होता रहा. भारत में जब मंगोल आए तो दिल्ली में बैठे शासक अलाउद्दीन खिलजी ने उन्हें भगाया. जो मंगोल बच गए उनमें से कुछ यही रुक गए. उन्होंने भारत में ब्लैक पाउडर का इस्तेमाल शुरू कराया. ये 16वीं सदी की बात थी. 19वीं सदी में पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में इसका इस्तेमाल काफी किया गया.
ब्लैक पाउडर जलता है तो क्या होता है?
ब्लैक पाउडर (Black Powder) जब जलता है तब उसमें सिर्फ एक केमिकल रिएक्शन नहीं होता. इसमें से कई बाई प्रोडक्ट निकलते हैं. जैसे- पोटैशियम कार्बोनेट, पोटैशियम सल्फेट, पोटैशियम सल्फाइड, सल्फर, पोटैशियम नाइट्रेट, पोटैशियम थायोसाइनेट, कार्बन, अमोनियम कार्बोनेट, कार्बन डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, हाइड्रोजन और मीथेन.
क्या ब्लैक पाउडर रखना गैर-कानूनी है?
ब्लैक पाउडर (Black Powder) दुनिया के ज्यादातर देशों में रखना गैर-कानूनी है. इसे बनाने, इस्तेमाल, खरीद-फरोख्त, परिवहन करना गैर-कानूनी है. अलग-अलग देश में अलग-अलग स्तर का कानून है. जिसके तहत आपको सजा, जुर्मान या दोनों हो सकते हैं.