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Wallace Line: प्रकृति ने भी बनाई है लक्ष्मण रेखा, इसके दोनों तरफ की दुनिया एकदम अलग!

क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने धरती पर एक ऐसी लक्ष्मण रेखा बनाई है, जो दिखाई तो नहीं देती, लेकिन अपने अस्तित्व का अहसास ज़रूर करवा देती है. इस रेखा को कोई पक्षी लांघता है और न कोई जानवर. इस रेखा के दोनों तरफ की दुनिया एक दूसरे से बिल्कुल अलग है. आइए जानते हैं कि ये रहस्यमयी अदृश्य रेखा कहां है और इसके अस्तित्व के पीछे की कहानी क्या है?

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वालेस लाइन एक अदृश्य प्राकृतिक लक्ष्मण रेखा है, जो इंडोनेशिया के पास मौजूद है.
वालेस लाइन एक अदृश्य प्राकृतिक लक्ष्मण रेखा है, जो इंडोनेशिया के पास मौजूद है.

जब-जब हमें लगता है कि हम प्रकृति को समझ गए हैं, तभी प्रकृति हमें समझा देती है कि इसके रहस्य, इंसान की सोच से कहीं गहरे हैं. आपने रामायण में लक्ष्मण रेखा के बारे में सुना होगा. इस रेखा को लक्ष्मण जी ने सीता जी की रक्षा के लिए बनाया था, और इसे कोई लांघ नहीं सकता था. 

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क्या आप जानते हैं एक ऐसी ही लक्ष्मण रेखा धरती पर बनी हुई है, जो दिखाई तो नहीं देती, लेकिन अपने अस्तित्व का अहसास ज़रूर करवा देती है. इस रेखा को लांघने की गलती न आकाश में उड़ता कोई पक्षी करता है और ना समुद्र में तैरने वाली मछलियां. 

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यहां तक कि जमीन पर रहने वाले जानवर भी इस लकीर को पार नहीं करते. इस रेखा के दोनों तरफ की दुनिया बिल्कुल अलग है. आइए जानते हैं कि ये रहस्यमयी अदृश्य रेखा कहां है और कैसी है इसके आस-पास की दुनिया?

Wallace Line, Mystery of Wallace Line, What is Wallace Line?

Wallace Line

इंडोनेशिया के दो द्वीपों के बीच, एक ऐसी रेखा है, जो रियल भी है और वर्चुअल भी. रियल इसलिए क्योंकि इसका होना इसके आसपास की दुनिया में साफ दिखता है. और वर्चुअल इसलिए, क्योंकि ये रेखा दिखाई ही नहीं देती. इस रेखा का नाम है वालेस लाइन (Wallace Line), जिसे आप प्रकृति की लक्ष्मण रेखा कह सकते हैं. ये वालेस लाइन बाली (Bali) और लोम्बोक(Lombok) के बीच है. इन दोनों आइलैंड के बीच, करीब 35 किलोमीटर की दूरी है और बीच में है समंदर. ये रेखा इसी जगह है.

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दोनों द्वीपों पर अलग-अलग दुनिया

वालेस लाइन मलय द्वीपसमूह (Malay Archipelago) और इंडो-ऑस्ट्रेलियाई द्वीपसमूह (indo-australian archipelago) में रहने वाले जीवों को अलग करती है. मलय द्वीपसमूह पृथ्वी पर द्विपों का सबसे बड़ा समूह है. पश्चिमी तरफ जो जीव हैं वो एशियाई हैं, जैसे गेंडा, हाथी, टाइगर और कठफोड़वा जैसे पक्षी. लेकिन रेखा के दूसरी तरफ, इनमें से कोई भी नजर नहीं आता. यानी, यहां के जानवर दूसरी तरफ से एकदम अलग हैं. यहां की परिस्थितिकी, यानी ecology एकदम अलग है.

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यहां आपको दिखेंगे marsupial mammals, komodo dragons, cockatoos जैसे जानवर. वैज्ञानिक इसे biogeographic boundary कहते हैं. यानी जैव विविधता के दो ऐसे इलाकों का मिलन, जो एकदम अलग और बेहद अनोखे हैं. इस वालेस लाइन को यहां बहुत ही बारीकी से महसूस किया जाता है.

अब सवाल आता है कि ये लाइन कैसे बनी और यहां की प्रजातियां एक दूसरे से इतनी अलग कैसे हैं.

किसने खोजी Wallace Line?

इस लाइन को सबसे पहले 1859 में British naturalist Alfred Russel Wallace ने समझा था, जिन्होंने चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin) के साथ ही स्वतंत्र रूप से प्राकृतिक चयन द्वारा Theory of Evolution पेश किया था. हालांकि इस रेखा को ये नाम अंग्रेजी जीवविज्ञानी और मानवविज्ञानी T.H. Huxley ने दिया था. इस खोज ने उन्हें Father of biogeography के रूप में स्थापित किया.

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वालेस जब मलय द्वीपसमूह की यात्रा कर रहे थे, तो वह यहां के सभी द्वीपों पर घूमे और उन्होंने यहां मौजूद हर तरह की प्रजातियों को समझा और उन्हें कलेक्ट किया. जब वो बाली से लोम्बोक की तरफ गए, तो उन्होंने कुछ अजीब महसूस किया. दोनों द्वीपों को भले ही एक पतली जलधारा अलग करती हो, लेकिन दोनों तरफ के जानवर एकदम अलग थे.

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पक्षियों ने उनका ज़्यादा ध्यान खींचा. जावा और बाली में पक्षियों की जो प्रजातियां थीं, जैसे yellow headweaver, coppersmith barbet, और Japanese three toed woodpecker , वो लामबोक से गायब थे. और यही अजीब बात स्तनधारियों और कीड़े-मकोड़ों में भी थी.

मान भी लें कि द्वीप दूर-दूर हैं इसलिए जानवर और पक्षी एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं जाते, लेकिन पानी में मौजूद मछलियाों का क्या. जो मछलियां लोमबोक आइलैंड के किनारों पर पाई जाती हैं, वो बाली में पाई जाने वाली मछलियों से एकदम अलग हैं. यानी महज 35 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद द्वीपों में अंतर महाद्वीपों जैसा था. वालेस ने ही यहां के बायो ज्योग्राफिक डिस्ट्रिब्यूशन को समझा था.

कैसे बनी ये रहस्यमयी रेखा?

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वालेस के मुताबिक, बाली और लोम्बोक आइलैंड की लोकेशन या ज्योग्राफी पहले ऐसी नहीं थी. बाली आइलैंड पहले एशिया से जुड़ा रहा होगा और लोम्बाक आइलैंड ऑस्ट्रेलिया से. इसीलिए अब यहां बायो ज्योग्राफिक डिस्ट्रिब्यूशन देखने को मिल रहा है. अब सवाल है पानी में मौजूद जीवों का. इस रहस्य से भी उन्होंने पर्दा उठाया.

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उनके मुताबिक, बाली और लोम्बोक के बीच जो 35 किलोमीटर की इलाका था, वहां बहुत तेज जेट स्ट्रीम बहा करती थी, जिसे पास करना मछलियों के बस में नहीं था. बात करें पक्षियों की, तो उन्होंने जब दोनों जगह पाए जाने वाले पक्षियों की पहचान की, तो उन्हें पता चला कि दोनों द्वीपों पर पाए जाने वाले पक्षी non migratory birds थे, यानी वे लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर सकते थे.

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लेकिन वालेस की इस थ्योरी को तब किसी ने नहीं माना. उनकी मौत के बाद, 1960 में जब प्लेट tectonics को मान्यता मिली, तब पाया गया कि वालेस की बात सही थी. बाली का इलाका पहले एशिया से जुड़ा था और लोम्बाक ऑस्ट्रेलिया का हिस्सा था. दक्षिण में अंटार्कटिका से टूटकर ऑस्ट्रेलियन प्लेट के धीरे धीरे उत्तर की ओर खिसकने की वजह से Wallace line बन गई. तो भले ही दोनों तरफ की प्रजातियां एक दूसरे के पड़ोसी हों, लेकिन ये अलग-अलग दुनिया में जीते हैं, एक दूसरे के इलाके में कदम भी नहीं रखते.

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