हैरानी की बात है कि पृथ्वी के सबसे दुर्लभ खनिज (World's Most Rarest Mineral) की एक ही स्पेसिमेन कॉपी है. यानी एक ही पीस है. वह भी अमेरिका के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ऑफ लॉस एंजिल्स काउंटी में रखा है. खनिज हमारी धरती पर चारों तरफ फैले हैं. रेत के कणों से लेकर कीमती रत्नों तक. यूएस जियोलॉजिकल सोसाइटी के मुताबिक खनिज ऐसे प्राकृतिक पदार्थ होते हैं जो अजैविक होते हैं. इनके अंदर कार्बन नहीं पाया जाता.
हर खनिज की अपनी अलग रसायनिक सरंचना होती है. अलग आंतरिक डिजाइन होती है. लेकिन दुनिया का सबसे दुर्लभ खनिज आपके पड़ोसी देश म्यांमार (Myanmar) में मिलता है. आजतक इसका सिर्फ एक ही क्रिस्टल मिला. यह 1.61 कैरेट का गहरे नारंगी रंग का रत्न है. जिसे म्यांमार के मोगोक इलाके से खोजा गया था. इसे साल 2015 में इंटरनेशनल मिनरोलॉजी एसोसिएशन ने मान्यता दी थी. इसका नाम है काथुआइट (Kyawthuite).
काथुआइट के बारे में वैज्ञानिकों को भी ज्यादा कुछ पता नहीं है. इसलिए आपको दूसरे सबसे दुर्लभ खनिज के बारे में बताते हैं. इसका नाम है पेनाइट (Painite). यह गहरे लाल रंग का षटकोण क्रिस्टल होता है. कई बार यह गुलाबी रंग भी दिखता है. पेनाइट अब आसानी से मिल जाता है, हालांकि इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा नहीं है. इसके बावजूद यह दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए एक तरह से रहस्य ही है.
कालटेक में खनिजों के एक्सपर्ट जॉर्ज रॉसमैन बताते हैं कि साल 1952 में ब्रिटिश रत्न खोजकर्ता और डीलर आर्थर पेन को म्यांमार में दो क्रिमसन क्रिस्टल मिले थे. जॉर्ज पेनाइट की स्टडी 1980 से कर रहे हैं. वो उनकी स्टडी माइक्रोस्कोपिक तरीके से करते हैं. उन्हें इन दोनों ही खनिजों के बारे में काफी कुछ पता है. आर्थर पेन को पहले लगा कि ये रूबी हैं. क्योंकि म्यांमार में रूबी काफी मात्रा में पाई जाती हैं. इसलिए उन्होंने इन दोनों खनिजों को 1954 को ब्रिटिश म्यूजियम में दान कर दिया. ताकि इनकी स्टडी की जा सके. साल 1979 और साल 2001 में दो और क्रिस्टल मिले.
तब जाकर दुनिया को पता चला कि ये पेनाइट हैं. इन्हें आर्थर पेन ने खोजा था, इसलिए उनके नाम पर इसे नाम दिया गया. पेनाइट दुनिया में सबसे अलग खनिज क्यों हैं. वजह ये नहीं कि ये कम मिला. वजह इसकी बनावट में है. यह एक बोरेट क्रिस्टल है. यानी यह बोरोन से बना है. इसमें कम मात्रा में जिरकोनियम भी मिलता है. बोरोन आसानी से जिरकोनियम के साथ बॉन्ड नहीं बनाता. लेकिन यहां बना है.
हैरान करने वाली बात ये है कि ये दोनों दुर्लभ खनिज म्यांमार में ही क्यों मिले? जॉर्ज रॉसमैन कहते हैं कि जब प्राचीन सुपरकॉन्टीनेंट गोंडवाना टूटकर अलग हुआ. तब भारत उत्तर की ओर खिसक गया. जिसे अब साउथ एशिया कहा जाता है. इन महाद्वीपों के टकराने से जो प्रेशर और गर्मी पैदा हुई उससे कई खनिजों और दुर्लभ रत्नों का निर्माण जमीन के नीचे हुए. ये खनिज समुद्री तलहटी से उठकर जमीन की ओर आए. अलग-अलग खनिज एक दूसरे से मिलकर नए खनिजों का निर्माण करते चले गए.
पेनाइट का इस्तेमाल गहनों में हो सकता है. लेकिन इसे खरीद पाना सबके बस की बात नहीं होगी. इसका एक कैरेट 60 हजार डॉलर्स का आता है. यानी 49.66 लाख रुपये प्रति कैरेट. आप ही सोचिए अगर इस खनिज के लिए आपको इतने रुपये देने हों तो कितना मुश्किल होगा. लेकिन अब तक काथुआइट की कीमत का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है.