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Curious case of Dirty Yamuna: देश में 400 नदियां हैं, लेकिन यमुना के पानी में ही फोम क्यों? कैसे और कहां से शुरू होती है गंदगी

भारत में 400 से ज्यादा नदियां हैं. 8 प्रमुख नदियां हैं. लेकिन हर साल सिर्फ यमुना में ही क्यों झाग (Foam) बनता है. वह भी इतना ज्यादा कि पानी नहीं दिखता. ये झाग हर साल आता है. इस नदी का एक सेक्शन है, जो बहुत ही ज्यादा प्रदूषित है. ये सेक्शन है वजीराबाद से ओखला के बीच. आइए जानते हैं 'गंदी यमुना' का केस...

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तस्वीर 19 अक्टूबर, 2024 की है. नई दिल्ली के कालिंदी कुंज में प्रदूषित यमुना नदी की सतह पर तैरते जहरीले झाग को साफ करने का प्रयास करती एक लड़की. (सभी फोटोः PTI)
तस्वीर 19 अक्टूबर, 2024 की है. नई दिल्ली के कालिंदी कुंज में प्रदूषित यमुना नदी की सतह पर तैरते जहरीले झाग को साफ करने का प्रयास करती एक लड़की. (सभी फोटोः PTI)

हर साल यमुना में जो सफेद झाग का नजारा देखने को मिलता है, वैसा भारत में शायद ही किसी नदी में दिखता हो. देश में 8 प्रमुख और 400 से ज्यादा अन्य नदियां हैं. कुछ अरब सागर तो कुछ बंगाल की खाड़ी में मिलती है. अगर यमुना की बात करें तो उत्तराखंड के यमुनोत्री से लेकर प्रयाग के संगम तक ही इसका अस्तित्व दिखता है. लेकिन जैसे ही ये नदी दिल्ली के 22 किलोमीटर लंबे इलाके में आती है, इसका चेहरा ही खराब हो जाता है.

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दिल्ली में घुसते ही यमुना नदी नहीं, बल्कि नाला बन जाती है. दुर्गंध, झाग, सूखे इलाके, शैवाल जैसी डरावनी चीजें आपके नाक, दिमाग और आंख को डराती हैं. नदी को देख कर जो अच्छा सुख और शांति मिलनी चाहिए, वो खत्म हो जाती है. क्यों दिल्ली में ही यमुना अपना अस्तित्व खो देती हैं? क्या सरकार की जिम्मेदारी है या जनता की?

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Yamuna Toxic Foam

1376 किलोमीटर लंबी इस नदी के पांच प्रमुख हिस्से हैं. जिसमें ही ये नदी शुरू होकर खत्म हो जाती है. इन्हीं चार सेक्शन में ये नदी एकदम साफ, गंदी, बहुत गंदी हो जाती है. इसका रंग भी बदला हुआ है. हरे रंग की नदी. आइए जानते हैं पहले इसके पांच भौगोलिक हिस्सों के बारे में... 

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पहला हिस्सा पहाड़ों पर 

यमुनोत्री से हथिनीकुंड बराज तक... उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हिमालच प्रदेश के हिस्से. इसकी लंबाई करीब 172 किलोमीटर है. यहां यमुना की कमाल, गिरि, टोन्स और असन नाम की शाखाएं हैं. दो बराज पड़ते हैं. डाक पत्थर बराज और असन बराज. दो नहरे भी इन्हीं के नाम से हैं. 

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Yamuna Toxic Foam

दूसरा हिस्सा अपस्ट्रीम दिल्ली... 

हथिनीकुंड बराज से वजीराबाद बराज तक... हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हिस्से. 224 किलोमीटर लंबा सेक्शन. यहां सोम, छोटी और यमुना ड्रेन नंबर 2 और 8 नदीं की मुख्य शाखाएं हैं. इसमें हथिनीकुंड बराज पड़ता है. जिसमें पश्चिमी और पूर्वी युमना कनाल जुड़ते हैं. 

तीसरा हिस्सा दिल्ली... 

वजीराबाद बराज से यमुना बराज ओखला तक... 22 किलोमीटर लंबा ये इलाका 22 ड्रेन और हिंडन कट से जुड़ता है. इसमे दो बराज हैं- वजीराबाद और यमुना बराज. इसी से आगरा कनाल निकलती है. यही है नदी का सबसे प्रदूषित इलाका. 

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Yamuna Toxic Foam

चौथा हिस्सा डाउनस्ट्रीम दिल्ली... 

ओखला बराज से चंबल तक... उत्तर प्रदेश और हरियाणा के हिस्से. 490 किलोमीटर लंबा सेक्शन. इसमें हिंडन, भुरिया नाला, मथुरा और वृंदावन के ड्रेन, आगरा के ड्रेन मिलते हैं. इसमें एक ही ओखला बराज है. आगरा और गुड़गांव कनाल है इसमें. 

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पांचवां हिस्सा

साफ-सुथरी सुरक्षित बचाई गई यमुना... उत्तर प्रदेश में 468 किलोमीटर लंबा भौगोलिक इलाका. इसमें चंबल, केन, सिंध और बेतवा नदियां मिलती हैं. 

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Yamuna Toxic Foam

यमुना कहां अपने मुंह से फेंकने लगती है जहरीला झाग

हमने बचपन से ये कहानी सुनी है कि एक समय में यमुना में कालिया नाग रहता था. उसके जहर से यमुना उबलने लगती थी. जिससे नदी का पानी जहरीला हो जा रहा था. तब श्रीकृष्ण ने आकर उसे भगाया. जिस तरह सांप काटने पर इंसान अपने मुंह से झाग फेंकने लगता है. ठीक उसी तरह यमुना भी हर साल प्रदूषण के नाग की वजह से झाग फेंकने लगती है. प्रदूषण का ये नाग उसे डंसता है वजीराबाद से यमुना बराज ओखला के बीच. उत्तराखंड में यमुना साफ हैं. पांचवें हिस्से में भी साफ हैं. फिर दिल्ली के हिस्से में ही इतनी गंदगी क्यों? 

यमुना को गंदा करने की ये हैं प्रमुख वजहें... 

यमुना देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है.इसमें बिना ट्रीटमेंट के, आंशिक ट्रीटमेंट वाला सीवेज, औद्योगिक गंदगी, कृषि संबंधी वेस्ट इसे प्रदूषित करते हैं. दूसरी वजह प्राकृतिक है. गर्मियों में इस नदी में पानी लगभग सूख जाता है. पूरी नदी और उसके किनारे ढेरों पेड़-पौधे, कचरा, जानवरों के शव पड़े रहते हैं. बारिश के बाद जब ये बहते हैं, तो उनकी वजह से और प्रदूषण की वजह से भयानक स्तर का जहरीला झाग बनता है. 

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