वर्ष 1996 में, वह 20,000 शिवसैनिकों के साथ दरगाह पर पूजा करने के लिए निकले. उस वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी के साथ-साथ शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे भी पूजा में शामिल हुए थे. तब से शिवसेना और दक्षिणपंथी समूह इस संरचना को 'श्री मलंगगढ़' के नाम से संबोधित करते हैं.