भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343(1) के तहत 14 सितंबर 1949 को देश में हिंदी और देवनागरी लिपि को राजभाषा का दर्जा दिया गया था. लेकिन, ये राष्ट्रभाषा नहीं है. क्योंकि, भारत की एक बड़ी आबादी ऐसी भी है जो न तो हिंदी बोलती है और न समझती है. अगर इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया गया तो ये आबादी कई अवसरों से वंचित रह सकती है.