बर्मिंघम में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा जारी है. सोमवार को हुए अलग-अलग इवेंट्स में टीम इंडिया के प्लेयर्स ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और दिन खत्म होते-होते भारत की झोली में मेडल भी आए. जूडो में भारत की सुशीला देवी ने यहां 48 किग्रा. कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया.
सोमवार देर रात को हुए मैच में सुशीला देवी का मुकाबला साउथ अफ्रीका की मिशेला व्हाइटबुई से था. हर किसी को उम्मीद थी कि यहां इतिहास रचा जाएगा और सुशीला देवी देश के लिए गोल्ड मेडल जीत पाएंगी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका, यह मैच सिर्फ 4.25 सेकेंड तक चला और सुशीला देवी हार गईं. भले ही वह गोल्ड ना जीत पाई हों लेकिन सिल्वर मेडल ज़रूर अपने नाम किया.
मणिपुर की रहने वालीं 27 साल की सुशीला देवी का कॉमनवेल्थ गेम्स में यह दूसरा मेडल है, 2014 के कॉमनवेल्थ में भी सुशीला ने सिल्वर मेडल ही जीता था. बता दें कि सुशीला मणिपुर पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर भी तैनात हैं और कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के शुरू होने से पहले ही मेडल की दावेदार थीं.
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चाचा की मदद से सीखा जूडो और रच दिया इतिहास
सुशीला देवी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मेरे चाचा भी इंटरनेशनल लेवल के जूडो प्लेयर रहे थे, उन्होंने ही मुझे जूडो सीखने के लिए प्रेरित किया और ट्रेनिंग करवाने के लिए ले गए. 2002 में यह सफर शुरू हुआ था, जिसके बाद 2007 से 2010 के बीच उन्होंने मणिपुर में ही मौजूद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली.
‘जुडोका’ सुशीला देवी इम्फाल जिले से आती हैं, उनका जन्म 1995 में हुआ था. सुशीला पहली ऐसी महिला जुडोका थीं जिन्होंने ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया. सिर्फ 27 साल की उम्र में ही उनके नाम कई बड़े रिकॉर्ड हैं.
वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं, अब 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनके नाम सिल्वर मेडल है. इससे पहले हॉन्गकॉन्ग एशिया ओपन के 2018, 2019 सीजन में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता है.